19 Jan 2017, 05:45:39 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

एक दिन एक नन्हा फरिश्ता किसी बुजुर्ग फरिश्ते के पास कुछ वक़्त गुजारने के लिए गया।  वे दोनों यूं ही धरती पर किसी शहर के व्यस्त बाजार में आ गए। वे अदृश्य थे, उन्हें कोई भी नहीं देख सकता था। बुजुर्ग फरिश्ते ने नन्हे फरिश्ते से कहा क्या तुम कुछ काम की चीज देखना चाहोगे?
 
नन्हे फरिश्ते ने कहा जैसा आप चाहें।  वह जानता था कि जब भी बुजुर्ग फरिश्ते ने उसे कोई काम की चीज दिखाई तब उसे कुछ नया सीखने को मिला। वे दोनों बाजार की एक कॉफी-शॉप में कॉफी पी रहे एक आदमी के पीछे जाकर बैठ गए। अगले ही पल वहां शैतान आया, वह भी अदृश्य था। वह कॉफी पीनेवाले आदमी के पास बैठ गया। 
 
नन्हा फरिश्ता समझ गया कि उसे मिलने वाला सबक अब करीब ही था। बुजुर्ग फरिश्ते ने उससे कहा चलो, हम शैतान के सामने जाकर बैठ जाते हैं। यहां यह जान लेना जरूरी है कि फरिश्ते तो शैतान को देख और महसूस कर सकते हैं पर शैतान उन्हें नहीं देख सकता। अगर शैतान ने फरिश्तों को देख लिया होता तो वह अपनी उस हरकत को अंजाम नहीं देता जिसके लिए वह कॉफी-शॉप में आया था। शैतान आदमी के सर के करीब गया और उसने आदमी के कान में कुछ फुसफुसाकर कहा जिसे सुनते ही नन्हा फरिश्ता बोल उठा ओह, अब मैं सब समझ गया!  
 
बुजुर्ग फरिश्ते ने उसकी पुष्टि करी हां, तो तुम अब जान गए न? नन्हे फरिश्ते ने शैतान को आदमी के कान में यह फुसफुसाते हुए सुना था इस दर्द को बांटते चलो। यह कहकर शैतान ने आदमी को दर्द के कुछ कतरे दे दिए। कॉफी पीने के बाद वह आदमी दुकान से बाहर चला गया।  दोनों फरिश्ते भी उसके पीछे चल दिए। 
 
आदमी जब अपनी कार तक पहुंचा तो उसने पाया कि किसी ने उसकी कार से बिलकुल सटा कर अपनी कार खड़ी कर दी थी और उसकी कार को निकाल पाना बहुत मुश्किल था। आदमी के मुंह से गालियों की बौछार निकल पड़ी और उसने दूसरी कार के टायर पर अपनी लात दे मारी। उस आदमी के भीतर जब यह क्रोध उबाल ले रहा था तभी एक औरत उसके करीब से गुजरी।  उस औरत ने आदमी की कोई बात नहीं सुनी लेकिन आदमी का दर्द औरत तक पहुंच गया और उसे पता ही नहीं चला कब वह दर्द उसके जहन में जज्ब हो गया। औरत के भीतर दर्द के पहुंचते ही उसकी निगाह सामने स्टोर में काम कर रही उसकी सहकर्मी पर पड़ी।  
 
उसकी सहकर्मी ने पिछले दिन उसे कोई बात कह दी थी जो उसे नागवार गुजरी थी पर वह कुछ कर न सकी। सहकर्मी को देखते ही उसे अपने भीतर उसके लिए नफरत उबलती-सी लगने लगी क्योंकि उसी जाहिल के कारण उसका दिमाग अभी भी खराब बना हुआ था।  स्टोर के भीतर मौजूद औरत को सहसा याद आ गया कि उसके बेटे ने परीक्षा में बहुत बुरे अंक प्राप्त किये हैं। उसने तय कर लिया कि घर पहुंचने पर वह अपने बेटे की अच्छी खबर लेगी। अपनी योजना को साकार होता देख शैतान मंद मुस्कान बिखेरता हुआ चला गया। जो दर्द उसने पहले आदमी को दिया था वह उससे अनभिज्ञ निर्दोष मनुष्यों के भीतर से बदस्तूर गुजरता रहा।
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