20 Jan 2017, 05:00:23 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

  • मोती पहनने से पहले ये जरूर जाने

    कई लोग ज्योतिष के कहने पर कई तरह के रत्न पहन लेते है। कोई आय बढ़ाने के लिए पुखराज तो गुस्सा कम करने के लिए मोती पहन लेता है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की अशुभता को दूर करने के लिए ग्रहों से संबंधित रत्नों को पहनने की सलाह दी जाती है।

  • शनि के प्रकोप से बचाएगा सुलेमानी हकीक

    जिन लोगो को शनि, राहु या केतु का बुरा प्रभाव या उनकी दशा चल रही है उन्हे सुलेमानी हकीक रत्न धारण करने से काफी लाभ होता है।

  • सही समय पर धारण करें नीलम तो शनि करेंगे चमत्कार

    शनि ग्रह कुछ समय मे ही किसी को भी राजा को किसी को भी रंक बना देता है। भाग्य को अचानक बदलने में शनि सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों ही रूप में सशक्त भूमिका निभाता है।

  • रत्न के साथ एक उपचार भी है लहसुनिया

    केतु से संबंधित जन्मदोष -निवृत्ति के लिए लहसुनिया पहनना परम श्रेयस्कर होता है। यदि जन्मकुंडली में केतु शुभ अथवा सौम्य ग्रहों के साथ स्थित हो तो

  • बहुत प्रचलन में है कृत्रिम हीरा

    आजकल कृत्रिम हीरे का खास प्रचलन है, बाजार में अच्छी-खासी मात्रा में यह बिक भी रहा है। यह प्रचलन नया हो, ऐसा नहीं है। प्राचीन काल से ही नकली हीरे बनाने का प्रचलन रहा है।

  • सही समय पर धारण करें नीलम तो शनि करेंगे चमत्कार

    शनि ग्रह कुछ समय मे ही किसी को भी राजा को किसी को भी रंक बना देता है। भाग्य को अचानक बदलने में शनि सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों ही रूप में सशक्त भूमिका निभाता है।

  • कब रत्न धारण करना है फायदेमंद

    रत्न धारण करना एक विज्ञान सम्मत भी है। पहना हुआ रत्न संबंधित ग्रहों की प्रसारित किरणों को ग्रहण करके मनुष्य के शरीर में पहुंचाता है।

  • रत्न में इसे आजमाएं

    हमारे शास्त्रों में भी रत्न पहनना बहुत शुभ माना गया है। विज्ञान भी इन नगीनों और रत्नों के सकारात्मक ऊर्जा देने वाले तथ्यों की पुष्टि करता है।

  • किसी राशि का रत्न नहीं है लहसुनिया

    लहसुनिया केतु का रत्न है, अर्थात इसका स्वामी केतु ग्रह है। संस्कृत में इसे वैदुर्य, विदुर रत्न, बाल सूर्य, उर्दू-फारसी में लहसुनिया और अंग्रेजी में कैट्स आई कहते हैं।

  • माणिक खोलता है आपकी तरक्की की राह

    ज्योतिष में कई रत्नों के बारे में बताया गया है। माणिक भी उनमें से एक है। ज्योतिषियों की मानें तो माणिक (रूबी) सूर्य का रत्न है। माणिक देखने में लाल रंग का पारदर्शी पत्थर होता है जिसे सूर्य की धूप में रखने पर अग्नि के समान लपटें निकलती दिखाई देती हैं।

  • पन्ना पहनने से पहले जान लें ये बातें...

    पन्ना बुध ग्रह का रत्न है। इसे और भी कई नामों से जाना जाता है। संस्कृत में इसे मरकत मणि, फारसी में जमरन और अंग्रेजी में एमराल्ड कहा जाता है। पन्ना का रंग हल्का से गहरा हरा होता है।

  • आत्मविश्वास और साहस बढ़ाता है मूंगा

    वैसे तो समुद्र से अनेकों रत्न या फिर कहें कि सैकड़ों प्रकार के रंग बिरंगे पत्थर पाए जाते हैं। इसमें कुछ प्रख्यात हैं तो कुछ के नाम तो दे दिए गए हैं लेकिन वे इतने प्रचलन में नहीं हैं।

  • यूं ही धारण न करें कोई रत्न

    रत्न, प्राचीन काल से ही मनुष्य के आकर्षण का केंद्र रहे हैं। देवी-देवता भी रत्नों के आकर्षण से अछूते नहीं रहे। समुंद्र मंथन के समय भी रत्न प्रकट हुए थे।

  • पन्ना धारण करने के फायदे

    पन्ना बुध ग्रह का रत्न है। इसे और भी कई नामों से जाना जाता है। संस्कृत में इसे मरकत मणि, फारसी में जमरन और अंग्रेजी में एमराल्ड कहा जाता है।

  • इसलिए सोना या तांबे की अंगूठी धारण करना चाहिए

    भारतीय धर्म पंरपरा में कोई कारोबार नहीं होता, कोई शादी नहीं होती, कोई बच्चा नहीं होता, कोई परिवार नहीं होता। जो कुछ होता है, बस आपकी मुक्ति का एक साधन है।

  • ना पहनें दो से ज्यादा रत्न

    इसके साथ जो शुभ ग्रह है और अन्य कारणों से भी शुभ है तो उसका रत्न पहनना नि:संदेह उपयोगी होगा, क्योंकि उसकी प्रखरता में वृद्धि होने से संभावित अवरोध भी दूर होंगे।

  • जानें कौन सा रत्न है श्रेष्ठ

    रत्नों की श्रेष्ठता प्रमाणित करने में उसके मुख्यतया तीन गुण देखे जाते हैं। रत्नों की अद्भुत सौंदर्यता, रत्नों की दुर्लभता और रत्नों का स्थायित्व।

  • रत्न से चंद्रमा का सकारात्मक प्रभाव

    यदि आपका चंद्रमा कमजोर है, तो और कई प्रकार की परेशानियों से आप घिरे हुए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं। थोड़े से प्रयास कर आप चंद्रमा की ऊर्जा के सकारात्मक प्रभाव को अपने जीवन में ला सकते हैं।

  • जैन धर्म में है तीन रत्नों का महत्व

    नंदौड़के विमलनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय में धर्म सभा को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक धर्माचार्य कनकनंदी महाराज ने जैन धर्म के तीन रत्नों के महत्व के बारे में बताया।

  • रत्न भी बदल देते हैं मनुष्य की तकदीर

    रत्नों को धारण करने के पीछे मात्र उनकी चमक प्रमुख कारण नहीं है बल्कि अपने लक्ष्य के अनुसार उनका लाभ प्राप्त करना अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह जानना भी

  • रत्नों से रोगों का उपचार

    ज्योतिष शास्त्र भविष्य दर्शन की आध्यात्मिक विद्या है। भारतवर्ष में चिकित्साशास्त्र (आयुर्वेद) का ज्योतिष से बहुत गहरा संबंध है। जन्मकुण्डली व्यक्ति के जन्म

  • संयुक्त रत्न पहनना श्रेष्ठ फलदायी

    रत्न कोई भी हो अपने आपमें प्रभावशाली होता है। हीरा शुक्र को अनुकूल बनाने के लिए होता है तो नीलम शनि को। इसी प्रकार माणिक रत्न सूर्य के प्रभाव

  • चार उंगली और नौ रत्न पहनने के निर्देश

    नीलम शनि के शुभ फल देने में सहायक होता है, यह अक्सर लोहे के व्यवसायी, प्रशासनिक व्यक्ति, राजनेता भी पहने देखे जा सकते है। इसके बारे में यह कहावत है

  • कैसे करें रत्नों का चुनाव

    अनिष्ट ग्रहों के प्रभाव को कम करने के लिए या जिस ग्रह का प्रभाव कम पड़ रहा हो उसमें वृद्धि करने के लिए उस ग्रह के रत्न को धारण करने का परामर्श ज्योतिषी देते हैं।

  • रत्नों से हो सकता है रोगों का नाश

    हजारों वर्षों से वैद्य रत्नों की भस्म और हकीम रत्नों की षिष्टि प्रयोग में ला रहे हैं। माणिक्य भस्म शरीर मे उष्णता और जलन दूर करती है। यह रक्तवर्धक और वायुनाशक है

  • रत्न विज्ञान: कौन-सा रत्न कब धारण करें

    सूर्य को शक्तिशाली बनाने में माणिक्य का परामर्श दिया जाता है। 3 रत्ती के माणिक को स्वर्ण की अंगूठी में, अनामिका अंगुली में रविवार के दिन पुष्य योग में धारण करना चाहिए।

  • सिर्फ पत्थर नहीं रत्न करते हैं प्रभावित

    यह सुविदित है कि रत्न विभिन्न मात्रा में विभिन्न रासायनिक यौगिक मेल से बनता है। मात्र किसी एक रासायनिक तत्व से नहीं बनता। स्थान-भेद

  • नव रत्न

    णिक्य सूर्य ग्रह का रत्न है। माणिक्य को अंग्रेजी में ''रूबी'' कहते हैं। यह गुलाब की तरह गुलाबी सुर्ख श्याम वर्ण का एक बहुमूल्य रत्न है

  • रत्नों पर प्रकाश तथा रंगों का प्रभाव कैसा होता है

    बहुत से रत्नों पर तीव्र प्रकाश या रंग का प्रभाव ऐसा दिखाई देता है कि जिनका सम्बन्ध न तो उनकी रासायनिक बनावट से होता है और न ही उनमें उपस्थित अशुद्धियों से

  • रत्नों में रंगों का प्रभाव

    रत्नों के बाह्म रूप को आभामंडित करने में रंगों का बहुत बड़ा योगदान है। अगर रंग-रूप में रत्न द्युतिमान न हों तो उनकी कोई कीसम नहीं रह जाती।

  • रत्नों की उत्पत्ति

    मान्यताआचार्य वराहमिहिर ने भी पुराण परंपरा का आश्रय ले आज से 1500 वर्ष पूर्व अपनी वृहतसंहिता में रत्नाध्याय का वर्णन करते हुए रत्नोत्पत्ति के कारणों का वर्णन किया है

  • कैसे हुई रत्नों की उत्पत्ति

    कुछ पुराणों का मत है कि दैत्यराज बलि का वध करने के लिए भगवान त्रिलोकीनाथ ने वामन-अवतार धारण किया और उसके गर्व को चूर किया। इस समय भगवान के चरण स्पर्श से दैत्यराज बलि का सारा शरीर रत्नों का बन गया

  • ग्रह रत्न और धातु

    रत्न शुभ फल देने की शक्ति रखता है तो अशुभ फल देने की भी इसमें ताकत है। रत्नों के नाकारात्मक फल का सामना नहीं करना पड़े इसके लिए रत्नों को धारण करने से पहले कुछ सावधानियों का भी ध्यान रखना जरूरी होता है।

  • जीवन में रत्नों का प्रभाव

    सभी रत्न नौ ग्रहों के अंतर्गत आते हैं। सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहू, केतु यह सब ग्रह जन्मकुंडली के अनुसार व्यक्ति को शुभाशुभ फल प्रदान करते हैं।