20 Jan 2017, 04:57:33 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

  • सरकार गेहूं के दाम घटाकर हलका करे स्टॉक

    देशभर में इस बार गेहूं का उत्पादन 960 लाख से घटकर 915 लाख टन के करीब रह जाने का अनुमान है। केंद्रीय पूल में भी 281 लाख टन के करीब 2015-16 साल के लिए खरीद हो गई

  • स्टॉकिस्टों में घबराहट से चने में गिरावट

    देसी चने का स्टॉक मध्यप्रदेश और राजस्थान की मंडियों में पिछले साल की समानावधि की तुलना में 40-45 प्रतिशत कम है। वहीं कई सटोरिये इससे भी कम स्टॉक की अफवाह फैला रहे हैं

  • प्रदेश में अभी तक कॉटन की बोवनी हुई कम

    फिलहाल मानसून की लंबी खेंच की वजह से स्टॉकिस्ट आदि अपनी बिकवाली से पीछे हटने लगे हैं जिससे रूई के घटते दामों में रुकावट के साथ ही कुछ सुधार देखने को मिला है। पिछले दिनों जो रूई के दाम 34800 रुपए थे, वो बढ़कर 35200 रुपए प्रति खंडी पर पहुंच गए हैं।

  • निवेशकों का रुझान कम, सोना और होगा सस्ता

    एक व्यापारी का कहना है वर्तमान हालातों को देखते हुए सोना अब भी सुरक्षित निवेश का विकल्प नहीं रहा। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि ग्लोबल मार्केट में रिकॉर्ड स्तर से सोने का भाव 40 फीसदी नीचे आ गया है।

  • देशभर में तुवर का स्टॉक कम, भविष्य तेजी का

    सरकारी दहशत से देशभर में कारोबारी तुवर का स्टॉक तेजी से काटने में जुट गए हैं, जबकि महाराष्ट्र-कर्नाटक में चालू सीजन वाली तुवर का स्टॉक लगभग पहले ही निपट चुका था।

  • चीन ने रूई बेची तो कीमतें और टूटेंगी

    चीन के बाजारों में जोरदार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। साथ ही यहां की इकोनॉमी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। चीन की दिक्कतों से सिर्फ शेयर बाजार ही आहत नहीं हुए हैं, बल्कि कमोडिटी बाजारों में भी तेज गिरावट देखने को मिली है।

  • पर्याप्त भंडार से सोने की चमक फीकी

    कम मांग और पर्याप्त भंडार की वजह से सोने की कीमतें धीरे-धीरे नीचे जा रही हैं। लंदन की कीमतों के मुकाबले आठ डॉलर से 15 डॉलर तक की कमी दर्ज की गई और ये जून के मध्य की कीमतों के मुकाबले एक डॉलर अधिक है।

  • देश-विदेश में सरसों का उत्पादन कम

    एक विशेषज्ञ का मानना है दुनियाभर में प्रमुख सरसों उत्पादक क्षेत्र यूरोपियन यूनियन में इस साल सरसों के उत्पादन में भारी गिरावट आने का अनुमान है। यूरोपियन यूनियन के अलावा यूक्रेन में भी उत्पादन घट सकता है।

  • हरी इलायची का बंपर उत्पादन संभावित

    सूत्रों का अनुमान है कि यदि संभावनाएं सच हुईं तो इस बार देश का इलायची उत्पादन 20000 टन का आंकड़ा पार कर जाएगा। ध्यान रहे कि भारत हरी इलायची के वैश्विक उत्पादन में दूसरे स्थान पर है जबकि प्रथम स्थान पर ग्वाटेमाला है।

  • चार-पांच दिन में बारिश नहीं हुई तो सोयाबीन को नुकसान की आशंका

    सोयाबीन प्रदेशों में मानसून 26 जून से नदारद है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में छुटपुट बारिश हुई है लेकिन बोवनी के बाद जैसी बारिश की उम्मीद है वैसी नहीं हो पा रही है।

  • खपत के दौरान चने की बढ़ सकती है शॉर्टेज

    देशभर की मंडियों में चने की आवक धीरे-धीरे घटने लगी है। प्रमुख उत्पादक केंद्र मध्यप्रदेश और राजस्थान के कारोबारी इस बार 55-56 लाख टन उत्पादन अनुमान लगा रहे हैं

  • कपड़ा मार्केट में वैवाहिक खरीद फरोख्त आशानुरूप नहीं

    इधर, रमजान माह शुरू हो गया है जिससे खुदरा मार्केट में सलवार सूट में सीमित पूछपरख दिखाई देने लगी है। इसमें विशेष रूप से चमक-थम, भारी वर्क और कॉटन सलवार सूट की डिमांड ज्यादा है जो ईद तक बनी रहेगी।

  • अगस्त से दलहन का इम्पोर्ट फायदे का सौदा

    एक्सपर्ट्स का तो कहना है सरकार को अगस्त तक दलहन का इम्पोर्ट स्थगित करना चाहिए। इंडियन ग्रेन्स एंड पल्सेज एसोसिएशन के चेयरमैन प्रवीण डोंगरे ने बताया अगस्त-सितंबर तक कनाडा, अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया और म्यांमार जैसे देशों से नई फसलों की आवक शुरू हो जाएगी।

  • मौसम ने साथ दिया तो रिकॉर्ड उत्पादन संभावित

    मध्यप्रदेश में मानसून ने समयानुसार दस्तक दे दी है और 22 जून तक पूरे प्रदेश में मानसून सक्रिय होने की संभावना है। इधर, किसानों ने बोवनी के लिए खेत तैयार कर रखे हैं।

  • स्कूल यूनिफॉर्म में खरीद-फरोख्त अच्छी

    इसका असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिल रहा है। इस बार तैयार स्कूल यूनिफॉर्म के दाम भी पिछले साल से करीब 5-10 फीसदी ज्यादा हैं। दूसरी ओर वैवाहिक मुहूर्त कम होने के कारण थोक बाजार में सुस्ती का माहौल बना हुआ है।

  • अच्छी क्वालिटी के जीरे की अछत

    इधर, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हाल ही में दो सकारात्मक चीजें सामने आई हैं। इनमें से पहली और सबसे महत्वपूर्ण है कि पिछले करीब एक महीने से भी कुछ अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय जीरे के दाम उच्च स्तर 3.70 डॉलर प्रति किलोग्राम पर स्थिर बने हुए हैं।

  • गोल्ड स्कीम में पेंच, आरबीआई की आपत्ति!

    इसके अलावा पुरुषों को 100 ग्राम तक सोना जमा करने पर राहत मिल सकती है, लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि सरकार जो गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम लाने जा रही, उसे लेकर वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक में मतभेद शुरू हो गए हैं।

  • सोयाबीन में स्टॉकिस्टों की रुचि कम

    देश में सोयाबीन की रोजाना की आवक 1 लाख 70 हजार बोरी के आसपास हो रही है जिसमें 80-90 हजार बोरी मध्यप्रदेश, 45-50 हजार बोरी महाराष्ट्र, 15-20 हजार बोरी राजस्थान और अन्य राज्यों में 15-20 हजार बोरी के करीब हो रही है।

  • इंडोनेशिया से गहने लाकर मोटा मुनाफा बना रहे ट्रेडर्स

    देश में गोल्ड ट्रेड पर दोहरी चोट पड़ रही है। सरकार 1 लाख रुपए से अधिक ज्वेलरी खरीदने के लिए पैनकार्ड जल्द ही अनिवार्य करने की बात पर अड़ी हुई है। वहीं ज्वैलर्स सरकार से एक लाख रु. की लिमिट को पांच लाख करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

  • कमजोर मानसून के अनुमान से सटोरिए सक्रिय

    एजेंसी के अनुसार ब्राजील की सोयाबीन कटाई पूर्ण होकर उत्पादन 955 लाख टन तक हो जाने के आसार नजर आ रहे हैं। वहीं अर्जेंटीना में उत्पादकता 3300 किलो प्रति हेक्टेयर से 600 लाख टन होने की उम्मीद है

  • थोक कपड़ा मार्केट में वैवाहिक खरीद-फरोख्त कमजोर

    अगर इस साल मानसून अच्छा रहा तो अगस्त में रक्षाबंधन की निकलने वाली ग्राहकी जोरदार रह सकती है। हालांकि इस महीने के अंत से रमजान की ग्राहकी कुरते-पाजामे में निकल सकती है।

  • शकर के दाम एक साल में 660 रुपए क्विंटल तक टूटे

    2014-15 के शकर सत्र के लिए ही गन्ना किसानों का बकाया 21,000 करोड़ शकर से अधिक हो गया है। यह शकर उद्योग के इतिहास का बकाए का सबसे बड़ा आंकड़ा है। मिलों द्वारा शकर लागत मूल्य से 6 से 8 रु. प्रति किलो कम दाम पर बेची जा रही है।

  • उत्पादन में कमी से चने के दाम उछले

    चने के दाम 4500 रुपए के आसपास रह सकते हैं और इन दामों पर 100-200 रुपए की तेजी-मंदी अगस्त तक जारी रहेगी और अगस्त मध्य से चने की डिमांड में इजाफा होने की संभावना है जिससे उस दौरान कीमतों में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है।

  • अमेरिकी बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से सोने में दबाव

    अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में निवेशकों का रुझान कमजोर है, वहीं अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की प्रबल होती संभावनाओं की वजह से कॉमैक्स वायदा मार्केट में सोना 1200 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया।

  • वायदा में सोयाबीन की करीब 10 फीसदी डिलिवरी अनिवार्य हो

    सोया उद्योग की समस्याओं को सुनने के बाद एनसीडीईएक्स के प्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया है कि वे हर संभव प्रकार से उद्योग के साथ सहयोग करेंगे और प्रभावी ढंग से सट्टा व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए उच्च अधिकारी और एफएमसी के साथ भी चर्चा कर प्रभावी कदम उठाएंगे।

  • परिधान निर्यात बढ़ाने के लिए सरकारी कदम जरूरी

    परिधान निर्यात संगठन एईपीसी ने सरकार से मांग की है कि वह इस क्षेत्र के निर्यात को बढ़ाने के लिए ब्याज सब्सिडी स्कीम जैसे कदमों की घोषणा करे।

  • इलायची का उत्पादन बंपर होने की संभावना

    मौसम अनुकूल रहने के साथ ही गर्मी में बारिश हो जाने से इलायची की फसल को अच्छे लाभ के संकेत हैं। फसल जल्द तैयार होने के साथ ही बंपर उत्पादन की संभावना है।

  • मसूर का स्टॉक कम, भविष्य में अच्छी तेजी संभव

    देशभर की मंडियों में देसी मसूर में भारी किल्लत देखी जा रही है जिससे स्टॉक सीमा की तलवार दिखाई देते हुए भी मसूर के कारोबारी निश्चिंत हैं। इसका महत्वपूर्ण कारण यह है कि घरेलू उत्पादन 20 लाख टन के आसपास रह गया है, जो पिछले साल की तुलना में चार लाख टन कम है।

  • आभूषणों में ग्रामीण क्षेत्रों की डिमांड कमजोर

    गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम से भारत के गोल्ड इंपोर्ट में काफी कमी आ सकती है। ये स्कीम गोल्ड डिपॉजिटर्स के साथ-साथ बैंकों के लिए भी काफी फायदेमंद हो सकती है। इस स्कीम से देश में मौजूद सोने के भंडार का सर्कुलेशन बढ़ेगा

  • किसान सोयाबीन बोवनी की तैयारियों में जुटे

    देश में इस साल मानसून समय पर बताया जा रहा है। इसके चलते किसान सोयाबीन की बोवनी के लिए खेत तैयार करने में जुट गए हैं। अभी तक किसानों के रुझान को देखते हुए अच्छी बोवनी की संभावना है।

  • सूटिंग-शर्टिंग में यूनिफॉर्म निर्माताओं की अच्छी मांग

    देश के कई इलाकों में प्री मॉनसून की दस्तक से कपड़ा व्यापारी आगे अच्छी ग्राहकी निकलने की आस में उत्साहित हैं। हालांकि थोक क्लॉथ मार्केट में वैवाहिक सीजन की खरीदी थम चुकी है।

  • गन्ना किसानों का बकाया 21 हजार करोड़ के पार पहुंचा

    पूर्व कृषि मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर संकटग्रस्त शकर मिलों को उबारने के लिए केंद्र से शकर का बफर स्टॉक बनाने की मांग की।

  • देश में दलहन का उत्पादन करीब 50 लाख टन कम

    बेमौसम बारिश का साइड इफैक्ट साफ देखने को मिल रहा है। दाल हो, मसाले हों या रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली सब्जियां, हर ओर महंगाई की आग भड़क रही है। हालांकि आंकड़ों में महंगाई कुछ कम हुई है लेकिन हकीकत कुछ और ही है।

  • आईटीसी, एसबीआई के तिमाही नतीजों से तय होगी बाजार की चाल

    इस सप्ताह आईटीसी व एसबीआई जैसी दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजों से शेयर बाजार की दिशा तय होगी। वहीं रपया और कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव का भी बाजार की धारणा पर असर होगा।

  • गेहूं खरीदी का सरकारी लक्ष्य हासिल होना मुश्किल

    गेहूं में सरकारी खरीदी के चलते व्यापारी मंडियों में गेहूं की आवक बेहद कम है जबकि डिमांड उपभोक्ता, मशीन क्लीन, बिनावट और आटा-मैदा मिलों की भरपूर खरीदी बनी हुई है जिससे गेहूं की कीमतों में सुधार की स्थिति बनी हुई है।

  • रुपए की कमजोरी से डायमंड इंडस्ट्री की मुश्किलें बढ़ीं

    एक हफ्ते में डॉलर के मुकाबले रुपए की दर में तेज गिरावट से रफ डायमंड की कॉस्ट 2.3 फीसदी बढ़ गई है। इससे भारतीय डायमंड ट्रेड की चिंताएं बढ़ गई हैं। भारतीय डायमंड इंडस्ट्री दुनिया के 80 फीसदी रफ डायमंड की कटिंग और पॉलिशिंग करती है।

  • बंद हो जून-अगस्त का सोयाबीन वायदा

    सट्टेबाजी के चलते सोयाबीन की कीमतें बिना किसी कारण एकतरफा बढ़ रही हैं। उधर, दलहन उत्पादन में कमी के कारण दालों की कीमतें आम उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति से बाहर होती जा रही हैं।

  • निर्यातकों की मांग से जीरे में और तेजी संभव

    इस साल जीरे का उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम उतरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। दूसरी ओर निर्यातकों के साथ ही स्टॉकिस्टों की सक्रियता बढ़ने से कीमतों में एकतरफा तेजी की स्थिति है।

  • उत्पादन में कमी, देसी चना और होगा महंगा

    दूसरी ओर आस्ट्रेलिया में इसके भाव 690 डॉलर प्रति टन के आसपास चल रहे हैं और डॉलर भी रुपए की तुलना में लगातार बढ़ रहा है, जिससे मुंबई में आकर आॅस्ट्रेलियाई चना 4500 रुपए से भी ऊंचा बोला जाने लगा।

  • विदेश में सोना सस्ता होने का फायदा भारतीय ग्राहकों को कम

    विदेशी मार्केट में आने वाले दिनों में गोल्ड की कीमत 1150 डॉलर तक पहुंचने के आसार हैं, भारत में इस कमजोरी का फायदा करंसी के चलते नहीं मिलेगा। इस हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आॅफिशियल्स वहां इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के लिए मीटिंग करने जा रहे हैं।

  • सोया वायदा पर रोक लगाने की उठी मांग

    ब्राजील में सोयाबीन की कटाई पूरी हो चुकी है और अर्जेंटीना की कटाई भी लगभग 50 से 60 फीसदी हो चुकी है। वहां सोयाबीन की उपलब्धता बेहद सुगम है। आगामी सोयाबीन की फसल भी अच्छी बढ़त के साथ देखने को मिल सकती है।

  • कपड़ों में ग्राहकी कम, मई में फिर बढ़ने के आसार

    सूती कपड़ों में बारिश के पहले तक अच्छी ग्राहकी रहने की संभावना है। कॉटन यार्न में पिछले एक महीने में करीब 10-15 रुपए प्रति किलो की तेजी आ चुकी है जिसका असर कॉटन के तैयार कपड़ों में भी देखने को मिला है।

  • शकर पर आयात शुल्क बढ़ाने पर विचार

    शकर की गिरती कीमतों से परेशान इस उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं वहीं किसानों के गन्ने का बकाया 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुका है। इसे ध्यान में रखते हुए अगले सीजन में 25 फीसदी मिलें क्रशिंग शुरू करने में असमर्थ हो सकती हैं।

  • तुवर की फसल कमजोर, बढ़ सकते हैं दाम

    देश में इस समय तुवर का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में नहीं है। दरअसल, पिछले कुछ ही दिनों में तुवर में आई तेजी के कारण स्टॉकिस्ट ऊंचे दामों पर स्टॉक करने में घबरा रहे थे। मांग का दबाव बढ़ते ही कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

  • गहनों में इस बार 25 फीसदी ज्यादा ग्राहकी के आसार

    अक्षय तृतीया पर सोने और चांदी के आभूषणों में रही जोरदार खरीदारी के बाद ज्वेलर्स अब शहरी क्षेत्रों की वैवाहिक खरीदी पर ध्यान लगा रहे हैं। पिछले साल की अपेक्षा सोना सस्ता होने और आयात में ढील के साथ ही इस बार रिकॉर्ड विवाह-लग्न के कारण आभूषणों की बुकिंग जोरों पर देखने को मिली है।

  • सटोरियों की सक्रियता से सोयाबीन 4000 रुपए तक बिकने के आसार

    इंडोनेशिया और मलेशिया से सस्ते आयात की वजह से इसमें बढ़ोतरी हुई है। आने वाले महीनों में देश का वनस्पति तेल आयात कम हो सकता है क्योंकि मलेशिया ने एक अप्रैल से कच्चे पॉम तेल पर फिर से 4.5 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगा दिया है और इंडोनेशिया भी जल्द ही ऐसा कदम उठाने की योजना बना रहा है।

  • केसर के उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना

    2013 में राज्य में केसर उत्पादन प्रति हेक्टेयर 4.5 किलोग्राम और कुल उत्पादन 1.5 करोड़ टन रहा था। हालांकि इसके अगले साल भारी बारिश और बाढ़ से फसलें तबाह हो गई। केसर की खेती मार्च-अप्रैल से सितंबर-अक्टूबर के बीच होती है।

  • वैवाहिक खरीद-फरोख्त से कपड़ा मार्केट गुलजार

    मौसम खुलने से कपड़ा मार्केट में फिर चहल-पहल बढ़ गई है। अक्षय तृतीया की ग्रामीण क्षेत्रों की ग्राहकी जोरदार रहने के बाद अब शहरी क्षेत्रों में कामकाज बढ़ने लगा है। इसमें विशेष रूप से फैंसी व लेनदेन की साड़ियों के साथ सलवार सूट में कामकाज जोरदार है।

  • बासमती चावल का भविष्य निर्यात पर निर्भर

    देश में इस बार फसल बंपर उतरने से बासमती चावल की कीमतें पिछले साल से करीब 20 फीसदी कम खुली हैं। इधर, इस समय निर्यात कामकाज भी बेहद कमजोर है। दरअसल, ईरान भारतीय चावल का मुख्य आयातक है और भारत से निर्यात होने वाले चावल का करीब 40 फीसदी हिस्से का वो अकेला खरीदार।

  • मिलों की डिमांड कमजोर, रूई के दाम फिर टूटे

    उत्पादन में कमी की आशंका से पिछले दिनों रूई में आई तेजी अब पुन: मंदी में तब्दील होती नजर आ रही है। दरअसल, ऊंचे दाम की वजह से मिलों को यार्न में पड़तल नहीं बैठने से मिलों की रूई खरीदी घट गई जिससे कीमतों में 300 रुपए तक गिरावट रही। बेस्ट रूई घटकर 34700 रुपए प्रति खंडी रह गई।

  • शेयर में कमजोरी से निवेशकों का रुझान सोने के प्रति बढ़ा

    भारत में आयात पर प्रतिबंध होने के बावजूद विनिर्माण व खपत रिकॉर्ड स्तर पर रही। इससे सोने के प्रति भारतीयों के आकर्षण का पता चलता है। वर्ष 2014 के दौरान विश्व में आभूषण, बिस्कुट और पदकों की कुल मांग में भारत और चीन का हिस्सा 54 फीसदी रहा।

  • सब्सिडी बढ़ाने के बाद भी सोयाबीन डीओसी का निर्यात बढ़ना मुश्किल

    देश में सोयाबीन के उत्पादन में 2015-16 में कमी के आसार प्रबल हैं क्योंकि 25 फीसदी किसान दलहन की फसल या अन्य लाभदायक उत्पादन में परिवर्तन को विवश हो सकते हैं।

  • कपड़ों में अच्छी ग्राहकी से बाजार धनतंगी से मुक्त

    वाहिक सीजन की गूंज कपड़ा मार्केट में भी दिखाई देने लगी है। बाजार में ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही शहरी क्षेत्रों की भी डिमांड धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी है जिससे बाजार भी धनतंगी से भी मुक्त होता जा रहा है।

  • निर्यातकों की खरीदी से जीरा महंगा

    जीरे के प्रमुख उत्पादक केंद्रों में गुजरात और राजस्थान प्रमुख हैं। इस साल जीरे की कीमतों में कोई खास तेजी की स्थिति नहीं बनने के कारण किसानों ने इसकी बोवनी में कुछ कम दिलचस्पी दिखाई थी।

  • अच्छी क्वालिटी का गेहूं हो सकता है महंगा

    प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में फरवरी अंत और मार्च की शुरुआत में हुई बारिश और ओलावृष्टि से चालू फसल वर्ष में देश का गेहूं उत्पादन चार से पांच प्रतिशत घटने की संभावना है। मध्यप्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीदी जोरों पर बनी हुई है। हालात यह हैं कि व्यापारी मंडियों में आवक बेहद कमजोर है जिससे गेहूं की कीमतों में सुधार की स्थिति बनी हुई है।

  • उत्पादन में कमी की आशंका से रूई महंगी

    चालू सीजन में कॉटन उत्पादन को लेकर बाजार में एक बार फिर भिन्न-भिन्न आंकड़े आने लगे हैं। पिछले दिनों कपड़ा मंत्रालय द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2015 में खत्म हो रहे

  • सोया तेल में ऊंचे दामों पर ग्राहकी का सपोर्ट कम

    सस्ते आयात से देश में खाद्य तेलों की उपलब्धता मांग से अधिक होने की संभावना है। यही वजह है कि पिछले दिनों हुई बारिश और ओलावृष्टि में तिलहन फसल को हुए नुकसान से तिलहन उत्पादन घटने की संभावनाओं के बाद भी तेलों में लंबी तेजी नजर नहीं आ रही है।

  • विदेश व्यापार नीति में अनदेखी से कपड़ा उद्योग नाखुश

    नई विदेश व्यापार नीति में टेक्सटाइल (कपड़ों) के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए जबकि देश में रोजगार मुहैया कराने के मामले में यह दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है।

  • कालीमिर्च का बाजार सटोरियों की गिरफ्त में

    इस साल कालीमिर्च का उत्पादन 48 हजार टन से बढ़कर 65 हजार टन के करीब पहुंचने की संभावना है। इसके बावजूद मंडियों में कालीमिर्च की आवक का प्रेशर अभी तक नहीं बन पा रहा है जबकि सीजन शुरू हुए तीन महीने बीत चुके हैं। इससे साफ है कि बाजार सटोरियों की गिरफ्त में है।

  • कपास का उत्पादन 2 फीसदी घटने की संभावना

    पिछले साल देरी से बोवनी करने के कारण पैदावार में आई भारी गिरावट के चलते देश में कपास का उत्पादन महज 2 फीसदी घटने की संभावना है। कपड़ा मंत्रालय द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2015 में खत्म हो रहे इस सीजन में कपास का कुल उत्पादन 390 लाख गांठ रहने का अनुमान है।

  • निर्यात के अभाव में काबली चना आंशिक टूटा

    काबली चने के प्रमुख उत्पादक केंद्र मध्यप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में इस साल काबली चने की बोवनी पिछले साल की तुलना में 50-60 फीसदी ही हुई क्योंकि पिछले साल किसानों को काबली चने के कोई खास लाभकारी मूल्य नहीं मिलने से उन्होंने इसकी बोवनी में खास दिलचस्पी नहीं ली थी।

  • सोयाबीन और तेल का बढ़ सकता है स्टॉक

    करीब दो-ढाई सप्ताह तक चली ट्रक वालों की हड़ताल खुलने के बाद ब्राजील में सोयाबीन का कारोबार करीब सामान्य हो गया है। हालांकि हड़ताल के दौरान भी किसानों ने सोयाबीन की कटाई जोरशोर से चालू रखी थी।

  • पश्चिम एशिया संकट, विदेशी निवेश प्रवाह तय करेंगे बाजार की चाल

    पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, बाजार में नकदी की स्थिति तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों की प्रवृत्ति इस सप्ताह मुख्य रूप से शेयर बाजार की दिशा निर्धारित करेंगे। विशेषज्ञों ने यह बात कही है।

  • नौ दिन में सोना 1155 और चांदी 3100 रुपए उछली

    फेडरल रिजर्व के बयान के बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों की लेवाली निकलने से सोने की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ रही हैं। इंदौर में सोना कैडबरी नौ दिन में 1155 रुपए प्रति दस ग्राम और चांदी 3100 रुपए प्रति किलो महंगी हो गई है।

  • बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से तिलहन उत्पादन में कमी की आशंका

    देशभर में बेमौसम हुई बारिश और ओलावृष्टि से रबी सीजन में तिलहन उत्पादन में कमी का अनुमान लगाया जाने लगा है। इसे ध्यान में रखते हुए वनस्पति तेल का आयात 8 फीसदी बढ़कर 127 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है।