25 Mar 2017, 01:27:36 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

काफी पहले की बात है। धर्मबुद्धि और पापबुद्धि नाम के दो दोस्त रहा करते थे। एक दिन पापबुद्धि ने सोचा, मेरे अंदर दिमाग कम है, इसीलिए मैं गरीब हूं। ऐसा करता हूं कि धर्मबुद्धि के साथ व्यापार करके खूब सारा पैसा कमाता हूं। बाद में उसकी संपत्ति भी हथिया लूंगा। इस तरह की योजना बनाकर पाप ने धर्म से कहा, मेरे दोस्त, तुम्हारी उम्र अब ढल रही है।
 
अब तुम यात्रा पर निकल जाओ, क्योंकि बिना यात्रा के ज्ञान अर्जित नहीं कर पाओगे। वह यात्रा पर निकल पड़ा। जाते हुए पाप भी उसके साथ हो चला। दोनों ने खूब धन कमाया। अब घर लौटने का समय आ गया था। जैसे ही दोनों शहर के बाहर पहुंचे तो पाप ने धर्म से कहा, यह सारा धन घर ले जाना उचित नहीं है, क्योंकि रिश्तेदार और दोस्तों की नीयत इसे देखकर खराब हो सकती है।
 
इसलिए हमें सारा धन जंगल में एक स्थान पर दबा देना चाहिए। जब भी हमें आवश्यकता होगी तो हम यहां आ जाएंगे और पैसा निकाल लेंगे। धर्म, पाप की बातों में आ गया। उसने एक घड़े में सारा धन जमीन में गाढ़ दिया।  दोनों अपने-अपने घरों की ओर चले गए। उसी रात पाप उस जंगल में फिर गया। उसने मटका निकाला और सारा धन चुराकर अपने घर ले आया। अगली सुबह, वह धर्म के पास गया और उससे कहा, जंगल चलते हैं। थोड़ा धन निकाल लाते हैं।
 
जैसे ही दोनों जंगल पहुंचे और उस जगह को देखा वहां खाली घड़ा पड़ा था। पाप ने नाटक करते हुए चिल्लाना शुरू कर दिया तुम चोर हो।  यह सुनते ही धर्म की आंखों में आंसू आ गए। उसने कहा कि वह चोर नहीं है। लेकिन पाप ने कहा, इसका फैसला तो कोर्ट में जाकर ही होगा। जब कोर्ट में यह मामला पहुंचा तो पाप ने कहा, मैं जंगल के देवता को अपने गवाह के तौर पर पेश करना चाहता हूं। जज ने यह बात सुनकर कहा कि वह अगली सुबह जंगल में सुनवाई करेंगे। यह सुनकर पाप बड़ा खुश हुआ और घर लौटकर उसने पिता से कहा, पिताजी, मैंने धर्म की सारी दौलत चुरा ली है। अब मैं आपकी मदद से यह केस जीत सकता हूं।
 
पिताजी ने कहा, बेटे मैं किसी तरह से तुम्हारी मदद कर सकता हूं? पाप बोला, जंगल में एक बड़ा पेड़ है। आप उस पेड़ के खोखले में जाकर छिप जाएं। कल सुबह जब जज वहां आएंगे, तो मैं आपसे सच बताने को कहूंगा। तब आप बता देना कि चोरी धर्म ने ही की है। यह सुनकर पाप के पिता जाकर उस पेड़ में छिप गए। अगले दिन सुबह, पाप और धर्म जंगल पहुंचे।
 
जब जज आए तो पाप ने चिल्लाना शुरू कर दिया, हे दिन एवं रात तुम सभी गवाह हो कि चोरी किसने की है। यह सुनते ही जज सारा माजरा समझ गए। जज ने कहा, धर्म, तुम इस पेड़ के खोखले भाग में आग लगा दो। जैसे ही धर्म ने आग लगाई तो पाप के पिता ने चिल्लाना शुरू कर दिया। आवाज सुनकर सैनिकों ने उसे बाहर निकाला। पिता ने बाहर आते ही कहा, मैंने तेरे लिए यह सब किया और तूने मुझे ही नहीं बचाया।  यह सुनते ही राजा के सैनिकों ने पाप को पकड़ लिया। (पंचतंत्र से साभार)
 
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