29 Jun 2017, 00:49:23 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

बैतूल। देश के विभिन्न हिस्सों से अक्सर दहेजलोभी परिवारों के दहेज ना मिलने पर बारात वापस ले जाने या मामले थाने तक ही पहुंचने की खबरें आती हैं, लेकिन मध्यप्रदेश के बैतूल जिले से शादियों के इस मौसम में इससे उलट एक सुखद खबर सामने आई है।
 
जिले के मुलताई क्षेत्र के ग्राम हिवरखेड़ में गुरूवार को हुई एक शादी में दूल्हे ने न केवल वधू पक्ष से कोई तोहफा लेने से इंकार कर दिया, बल्कि शादी में उपहार लाए लोगों से भी कोई उपहार ग्रहण नहीं किया। बेहद सादगी से हुए विवाह के चर्चे पूरे क्षेत्र में जोरों पर हैं।
 
सूत्रों के मुताबिक मुलताई तहसील के हिवरखेड़ निवासी सुभाष कुंभारे के पुत्र हेमंत और इकलहरा के धनराज झरबड़े की बेटी का विवाह गायत्री परिवार से जुड़े रीति-रिवाजों के साथ हुआ। सभी लोग दूल्हा-दुल्हन के लिए उपहार लाए थे, लेकिन दूल्हे ने दहेज में आए कपड़े, गहने और बर्तन सहित सभी सामान लेने से इंकार कर दिया। 
 
दूल्हे ने कहा कि उसे दहेज में एक रुपया भी नहीं चाहिए। दुल्हन पक्ष के लोग अपनी बेटी उसे जीवनभर के लिए सौंप रहे हैं, यही दहेज है। विवाह आयोजित कराने वाले गायत्री परिवार के सदस्य रामदास देशमुख ने बताया कि गायत्री परिवार के आदर्श विवाह पद्धति से पूरा विवाह करवाया गया। दूल्हे के आग्रह पर सब कुछ उसी हिसाब से किया गया।
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