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अच्छी क्वालिटी के जीरे की अछत

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jun 16 2015 11:58AM | Updated Date: Jun 16 2015 12:00PM
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इंदौर। इस साल मार्च और अप्रैल में जीरे के उत्पादक केंद्र राजस्थान में कई बार वर्षा होने और ओला वृष्टि से जीरे की फसल को नुकसान होने की आशंका है। इसके अलावा बोवनी के समय मौसम जीरे की बोवनी के प्रतिकूल होने और किसानों द्वारा भी अन्य फसलों की बोवनी को प्राथमिकता दिए जाने से इस साल गुजरात में इसकी बोवनी में करीब 31 प्रतिशत और राजस्थान में करीब 30 प्रतिशत की कमी आने के समाचार हैं।
 
 इधर, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हाल ही में दो सकारात्मक चीजें सामने आई हैं। इनमें से पहली और सबसे महत्वपूर्ण है कि पिछले करीब एक महीने से भी कुछ अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय जीरे के दाम उच्च स्तर 3.70 डॉलर प्रति किलोग्राम पर स्थिर बने हुए हैं। एक साल पूर्व की इस अवधि में यह 2.65 डॉलर पर बना हुआ था। स्पष्ट है कि बीते सीजन की तुलना में जीरे की अंतरराष्ट्रीय कीमत 39.62 प्रतिशत या 1.05 डॉलर ऊंची बनी हुई है। दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि रुपए की तुलना में अमेरिकी डॉलर भी 64 का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर चुका हैं। 
 
इससे घरेलू बाजार में भी जीरे के दामों में पिछले कुछ दिनों में सुधार देखने को मिला है। इंदौर थोक किराना बाजार में जीरा 16000 से 22500 रु. प्रति क्विंटल पर बना हुआ है। हाल ही में जीरे में थोड़ी तेजी आई है, इसमें अभी और कुछ तेजी आने की संभावना है लेकिन यह तेजी आहिस्ता-आहिस्ता ही आएगी। उधर, ऊंझा मंडी में जीरे की आवक घटकर फिलहाल 8-10 हजार बोरी होने तथा कीमत 3180-3200 रु. प्रति 20 किलोग्राम के बीच चल रही है। 
 
सीरिया में नए जीरे की दस्तक
सीरिया में नए जीरे की सीमित रूप से आवक शुरू हो गई है। गृहयुद्ध और आतंकवाद से बुरी तरह ग्रसित इस देश की फसल के संबंध में कोई विश्वसनीय जानकारी तो सामने नहीं आ रही है लेकिन कुछ समय पूर्व गृहयुद्ध की विभीषिका झेल रहे सीरिया द्वारा हाल ही में अपनी इस उपज की बिक्री के लिए कीमत का आॅफर किए जाने की चर्चाएं सुनी गई थीं।
 
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सीरिया ने कितनी कीमत  आॅफर की है लेकिन यह तो सभी जानते हैं कि भारत की तुलना में सीरिया का जीरा आमतौर पर सस्ता ही बिकता है। सीरिया में नए जीरे की अच्छी आवक अगले महीने से ही देखने को मिल पाएगी। उधर, सीरिया अंतरराष्ट्रीय बाजार से गायब होने के कारण फिलहाल भारत ही जीरे का एकमात्र भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में घरेलू बाजार में जीरे के दामों में आगे कुछ और सुधार देखने को मिल सकता है।
 
चालू वित्त वर्ष के लिए एक लाख टन जीरे के निर्यात का लक्ष्य
वित्त वर्ष 2014-15 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में 1433.40 करोड़ रुपए कीमत के 1,28,500 टन जीरे का निर्यात हुआ है। बीते वित्त वर्ष की समीक्षागत अवधि में इसकी 1,00,340 टन मात्रा निर्यात हुई थी और इससे 1325.05 करोड़ रुपए की आय हुई थी। स्पष्ट है कि इस बार जीरे के मात्रात्मक निर्यात में 28 प्रतिशत और आय में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
 
आय कम बढ़ने का प्रमुख कारण यह है कि पिछले वित्त वर्ष की आलोच्य छमाही में जीरे की औसत निर्यात कीमत 132.06 रुपए प्रति किलोग्राम थी, जो इस बार घटकर 111.55 रुपए रह गई है। भारतीय मसाला बोर्ड ने चालू वित्त वर्ष के लिए एक लाख टन जीरे के निर्यात का लक्ष्य तय किया हुआ है। गुजरात की करीब 70-75 प्रतिशत फसल मंडियों में आ चुकी है और राजस्थान का करीब 50-60 प्रतिशत माल आ चुका है। अच्छी क्वालिटी का जीरा काफी कम आ रहा है। आगामी दिनों में जीरे में आहिस्ता-आहिस्ता तेजी आने के आसार हैं।
 
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