17 Jan 2017, 08:14:32 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

सोचो कि झीलों का शहर हो, लहरों पे अपना एक घर हो...। कोई बात नहीं जो झीलों के शहर में लहरों पर अपना घर नहीं, कुछ समय के लिए इसका अनुभव तो कर ही सकते हैं। कहीं झीलों में तैरते घर तो कहीं, उसमें बोटिंग का रोमांचक आनंद। ऐसी अनेक झीलें हैं हमारे देश में... 

डल लेक, लहरों पर घर

डल लेक का तो नाम ही काफी है। देश की सबसे अधिक लोकप्रिय इस लेक को प्राकृतिक खूबसूरती के लिए तो दुनियाभर में जाना ही जाता है, यह लोगों की आस्था से भी जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस लेक के किनारे देवी दुर्गा की निवास स्थली थी और इस जगह का नाम था सुरेश्वरी। इस लेक को धरती के स्वर्ग के रूप में प्रसिद्ध जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर का गहना यूं ही नहीं कहा जाता।

श्रीनगर की खूबसूरती को चरम पर पहुंचाने वाली इस लेक का क्षेत्रफल भी लगभग 18 वर्ग किलोमीटर है। इसकी लंबाई 15.5 किलोमीटर है और यह श्रीनगर के गले में हार की तरह दिखता है, जिस कारण इसे श्रीनगर का गहना भी कहा जाता है। लेक में तैरते हाउसबोट और शिकारे पर्यटकों को दुनिया से अलग शांति, सुकून और मनमोहक खूबसूरती से भरी एक ऐसी दुनिया में होने का अहसास कराते हैं, जिससे कभी दूर होने का मन न करे। 

लेक पिछौला: उदयपुर की शान

झीलों के शहर के नाम से प्रसिद्ध उदयपुर दुनियाभर के पर्यटकों में खासा लोकप्रिय है। इस शहर की हवेलियां और किले तो पर्यटकों में लोकप्रिय हैं ही, यहां की झीलें भी इस शहर को झीलों का शहर कहलाने का गौरव प्रदान करती हैं। खासकर पिछौला झील तो सर्वाधिक लोकप्रिय है। यहां से लौटने के वर्षों बाद खासकर इस नीली झील की खूबसूरती को भूल पाना आपके लिए संभव नहीं हो पाएगा। चार किलोमीटर लंबी और तीन किलीमीटर चौड़ी इस झील में जैसे एक पूरा संसार है। संसार भी ऐसा, जहां समय को एन्जॉय करने के तमाम साधन मौजूद हों। जी हां, इस झील में एक होटल है और आस्था से गहरे जुड़े प्रसिद्ध जग मंदिर भी। पिछौला गांव के नाम पर प्रसिद्ध यह झील आज जहां है, कभी उसका बड़ा हिस्सा पिछौला गांव था। महाराजा उदय सिंह ने शहर की स्थापना के बाद शहर की खूबसूरती में चार चांद लगाने के उद्देश्य से यहां पहले से स्थित झील को बड़ा करवाया। 

चिल्का : एशिया की सबसे बड़ी झील

चिल्का झील एशिया की सबसे बड़ी झील होने का तमगा पा चुकी है। हिमालय क्षेत्र की तरह प्राकृतिक सौंदर्य से भरे ऐसे नजारे उड़ीसा में भी कम नहीं। खासकर जब आप समुद्र से लगे उड़ीसा के तटों की खूबसूरती को निहारना चाहें और पहुंच जाएं चिल्का झील। यूं तो यह एक झील है, लेकिन क्षेत्रफल इतना बड़ा कि इसके दूसरे किनारे को ढूंढ़ने के लिए आपको झील में उतरना पड़े यानी बोटिंग से इसकी थाह ले सकते हैं। आखिर ऐसा क्यों न हो, जब क्षेत्रफल 1,100 वर्ग किलोमीटर हो। कहीं समुद्र के नीले पानी की रंगत तो कहीं हरे-भरे टापुओं की हरियाली का असर। पर्यटकों के बीच डॉलफिन के करतब लोकप्रिय हैं, वहीं झींगा व कई ऐसी मछलियां इन पर्यटकों के लंच और डिनर में प्रमुखता से शामिल होती हैं। चिल्का के आईलैंड भी पर्यटकों में खासे लोकप्रिय हैं। चार सीटों वाली बोट से लेकर 50 सीटों वाली बोट तक यहां उपलब्ध हैं। 

हुसैन सागर लेक, खूबसूरत राष्ट्रीय धरोहर

हैदराबाद सिटी के मध्य में 24 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुसैन सागर लेक की खूबसूरती ऐसी है कि एक नजर देख कर ही आप मोहित हो जाएं। इंसानों द्वारा निर्मित इस लेक को सरकार ने देश की बेहद खूबसूरत राष्ट्रीय धरोहरों में से एक घोषित किया हुआ है। इस लेक का निर्माण सुल्तान इब्राहिम कुतुब शाह ने 1562 में करवाया था। लेक के बीचोबीच स्थित 18 मीटर ऊंची भगवान बुद्ध की प्रतिमा एक तरह से इस लेक की खास पहचान बन चुकी है। हैदराबाद के लिए देश के तमाम बड़े शहरों से विमान सेवा और रेल सेवा भी उपलब्ध है।

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