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सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक खबरों के संबंध में वास्तविक स्थिति

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Apr 16 2019 12:39AM | Updated Date: Apr 16 2019 12:39AM
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भोपाल। मध्यप्रदेश में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है आपके पास भले ही वोटर आईडी हो परन्तु मतदाता सूची में नाम नहीं है, तो आप मतदान नहीं कर सकते। सोशल मीडिया पर इस बारे में चलाई जा रही भ्रामक खबर 'आप पोंिलग बूथ पर पहुँचते हैं और यदि मतदाता सूची में आपका नाम नहीं है, तो आप आधार कार्ड या वोटर आईडी दिखाकर भी चुनौती वोट मांगते हुए मतदान कर सकते हैं।'' के कारण आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार मतदाता अपना नाम मतदाता सूची में होने की पुष्टि एनवीएसपी डॉट इन पोर्टल पर अपने दूरभाष या मोबाईल से 1950 टोल फ्री नम्बर डायल कर अपने क्षेत्र के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी/सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के कार्यालय में मतदाता सूची में अपना नाम देखकर सकते हैं।
 
यदि मतदाता सूची में नाम नहीं है, तो मतदाता सूची में निरन्तर प्रक्रिया के तहत नाम जोडने के लिये आवेदन कर सकते हैं। प्रथम चरण के अन्तर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों के लिए आवेदन 30 मार्च तक, द्वितीय चरण के लिए 08 अप्रैल तक, तृतीय चरण के लिए 13 अप्रैल तक एवं चतुर्थ चरण के लिए 19 अप्रैल तक आवेदनों को निराकरण के लिए शामिल किया जायेगा। मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर आवेदन ऑनलाईन एनवीएसपी डॉट इन पोर्टल पर या निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के कार्यालय में जाकर आवेदन फार्म-6 में प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया पर यह खबर भी चल रही है कि आप मतदान करने जाते हैं और यदि आप पाते हैं कि किसी ने पहले से ही आपका वोट डाला है, तो टेण्डर वोट मांगें और अपना वोट डालें।
 
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह सही है, लेकिन फोटो आधारित मतदाता सूचियों के तथा वोटर स्लिप के साथ-साथ मतदाता पहचान पत्र या आयोग निर्धारित पहचान के दस्तावेज के फलस्वरूप ऐसा न के बराबर होता है। ऐसी भ्रामक खबर भी सोशल मीडिया में पोस्ट की जा रही है कि 14 प्रतिशत टेण्डर वोट होंगे तो ऐसे मतदान केन्द्रों पर पुनर्मतदान आयोजित किया जाएगा। यह खबर पूर्णत: गलत है। मतदान के दूसरे दिन केन्द्रीय प्रेक्षक की उपस्थिति में सभी मतदान केन्द्रों की स्क्रूटनी की जाती है। यह भी देखा जाता है कि कोई ऐसी घटना तो नहीं हुई, जिससे मतदान की शुचिता प्रभावित हुई हो। उक्त रिपोर्ट आयोग को प्रेषित की जाती है। तत्पश्चात् ही आयोग के निर्देश पर पुनर्मतदान की कार्यवाही होती है।
 
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