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देशभर के चिड़ियाघर अपना रहे इंदौर के ये उपाय

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Mar 7 2018 11:18AM | Updated Date: Mar 7 2018 11:18AM
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- केपी सिंह
 
इंदौर। पहले घड़ियाल, फिर अजगर, मगरमच्छ के बच्चों की आमद के बाद अब नन्हे शावकों, भालू, लोमड़ी और भेड़ियों के नन्हे मेहमानों से चिड़ियाघर में खुशी का माहौल है। छह माह में 50 से अधिक नन्हे मेहमानों ने जू में दस्तक दी है, जिसमें दुर्लभ जीवों की संख्या में तो इजाफा हुआ है। इसके चलते इंदौर जू ने ब्रीडिंग सेंटर के रूप में अपनी खास पहचान बनाई है, क्योंकि ‘खजाना’ सिर्फ इंदौर जू के पास ही है। 
 
यहां जंगलनुमा प्राकृतिक वातावरण प्राणियों को रास आ रहा है और नन्हे मेहमानों की आमद होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक के बाद एक नन्हे मेहमानों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसीलिए इंदौर जू प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के चुनिंदा चिड़ियाघर में शुमार हो गया है। 
 
यही कारण है कि देशभर के चिड़ियाघर इंदौर के अनोखे उपाए अपना रहे हैं। अहमदाबाद, औरंगाबाद, बिलासपुर, पुणे सहित अन्य जू ने इंदौर का डाइट चार्ट अपना लिया है। इधर, सेंट्रल जू अथॉरिटी ब्रीडिंग सेंटर के लिए करोड़ों रुपए का अनुदान दे रहा है, लेकिन इससे इंदौर अछुता है। इसलिए अब ब्रीडिंग सेंटर के लिए सीजेडए से भी राशि की मांग की है, ताकि इंदौर जू को और भी खूबसूरत बनाया जाए। इंदौर जू में करीब 15 से 20 लाख लोग सालभर में सैर-सपाटे के लिए आते हैं। 
 
52 एकड़ में फैला, फिर भी पड़ना लगेगा छोटा
इंदौर जू 52 एकड़ में फैला हुआ है। यहां जिस तेजी से प्राणियों की संख्या में इजाफा हो रहा है उससे जल्द ही ये छोटा पड़ना शुरू हो जाएगा। क्योंकि जू प्राणियों का ब्रीडिंग सेंटर बन गया है। दूसरे चिड़ियाघरों में प्राणियों को अच्छा महौल नहीं मिल पाता था, जबकि इंदौर में ये ग्राफ तेजी से बढ़ता गया और देश में इंदौर जू ने अपनी अलग पहचान बनाई ली है। चिड़ियाघर में डेढ़ साल में प्राणियों ने ढेरों बच्चों को जन्म दिया है, इनकी देखभाल में डॉक्टरों से लेकर कर्मचारी तक जुटे हैं। 
 
चिड़ियाघर बन रहा ब्रीडिंग सेंटर 
पिछले कुछ सालों में इंदौर जू एक ब्रीडिंग सेंटर के तौर पर विकसित हो गया है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छह माह में अबतक चिड़ियाघर में 50 से अधिक नए बच्चों को जन्म दिया है। बब्बर शेर के परिवार में शावकों को जन्म दे चुकी है। इसके अलावा भालू ने तीन बच्चों को जन्म दिया है तो हिरण के परिवार में भी एक दर्जन से अधिक बच्चों ने जन्म लिया है। यहां तक हिप्पो पोटेमस का नन्हा बच्चा भी आया है, जिनसे इनकी संख्या में भी तेजी से वृद्धि होकर पांच हो गई। 
 
शेरों की संख्या हो गई 12
नवंबर 2013 में बिलासपुर से आकाश और मेघा नाम के बब्बर शेर-शेरनी का जोड़ा लाया गया था। शेर-शेरनी को जू में मिल रहे अच्छे माहौल और डाइट चार्ट का नतीजा है कि मार्च 2018 तक इनकी संख्या 12 तक पहुंच गई। इस दौरान कुछ हादसे भी हुए, जिसमें तीन शावकों की मौत भी हो गई। बावजूद इसके इनकी संख्या बढ़ी है। शावक जैसे-जैसे बड़े होंगे, इन्हें बड़े केज में रखना होगा, लेकिन इसके लिए जगह अब कम पड़ेगी।
 
हिप्पो का परिवार सात का, तीन रह जाएंगे 
चिड़ियाघर की शान हिप्पो पोटेमस चुन्नू नंदा के परिवार में नन्हे मेहमान की आमद हुई है। इसे मिलाकर इनकी संख्या सात हो गई, जबकि दो हिप्पो को बड़ौदा भेजा गया है। मतलब, अब जू में पांच हिप्पो नन्हे मेहमान को मिलाकर हो गए। हिप्पो की एक टाइम की खुराक 80 किलो है, इसलिए जू प्रबंधन इन्हें दूसरे जू को दे रहा है। अब दो हिप्पो को ग्वालियर भेजा जा रहा है। इसके बाद इनकी संख्या तीन हो जाएगी। 
 
घड़ियाल की देखभाल से उनका आंकड़ा 100 के पार
ये कोई पहला मौका नहीं है, जब मादा घड़ियाल ने चिड़ियाघर में बच्चों को जन्म दिया, कुछ हफ्ते पहले ही मादा घड़ियाल ने 15 बच्चों को जन्म दिया था। इससे पहले भी घड़ियाल के 9 बच्चों ने चिड़ियाघर में आंखें खोली थी। यहां का अच्छा माहौल और सही खाना मिलने की वजह से घड़ियाल ब्रीडिंग कर रहे हैं और इनकी संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब जल्द ही इन्हें रखने के लिए भी स्थान कम पड़ेगा। 
 
प्रभा-गजनी के परिवार में आए तीन मेहमान
भालू प्रभा व गजनी के परिवार में भी तेजी से इजाफा हुआ। इनके परिवार में तीन मेहमान आने के बाद इनकी संख्या पांच हो गई है। अब सुबह शाम भालू बच्चों के साथ केज में अठखेलियां करते रहते हैं।
 
दुर्लभ लोमड़ी हो गई सात 
डेढ़ साल पहले लाए लोमड़ी के परिवार में भी इजाफा हुआ। पहले दो और बाद में तीन बच्चों को जन्म दिया। इससे इनकी संख्या 7 हो गई है। ये भी दुर्लभ होती जा रही है। 

भेड़ियों की संख्या हो गई 14
दो साल पहले भेड़ियों का जोड़ा इंदौर लाया गया था, इसके बाद से इन्हें विशेष आॅब्जर्वेशन में रखा गया और डाइट चार्ट का विशेष ध्यान दिया। इसके बाद इनकी संख्या 14 हो गई है। 
 
ईमू हो गए 11 और पांच अंडे 
दो साल पहले ईमू को इंदौर जू में लाया गया। इसके बाद से ही इनकी संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया और अब तक 11 ईमू हो गए। इसके अलावा अब पांच अंडे पर ईमू बैठी हुई है। मतलब, जल्द ही इनकी संख्या में और वृद्धि हो जाएगी। 
 
इंदौर जू के पास है ‘खजाना’ 
देशभर के किसी भी चिड़ियाघर में इतने प्राणी नहीं है, जितने इंदौर जू में हैं। भेड़िया, लोमड़ी, बब्बर शेर, हिप्पो सहित अन्य प्राणियों का खजाना है। कहीं भी इनकी संख्ता इतनी नहीं है। इसमें डाइट चार्ट का खासा ध्यान रखते है, जिसमें बैलेंस डाइट देते हैं। एक जैसा खाना नहीं देते हुए बदल-बदल कर देते हैं। इसके साथ ही वेक्सीनेशन व हेल्थ पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्राणियों को अकेला नहीं छोड़ते हैं और उन्हें ग्रुप में ही रखते हैं। यहां जोड़ी बनाने की कोशिश की जाती है, जिसमें तेजी से सफलता मिल रही है। डाइट अच्छी मिलने से ब्रीडिंग हो रही है। अलग-अलग घास उगाई जा रही है। ये ताजा घास बीमारियों से लड़ने और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देती है। इससे जानवरों की हेल्थ अच्छी रहती है। इंदौर जू ब्रीडिंग सेंटर के रूप में तैयार हो रहा है। 
- डॉ. उत्तम यादव, चिड़ियाघर प्रभारी
 

 

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