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असिस्टेंट प्रोफेसर्स की भर्ती में फंसा आरक्षण और उम्र का पेंच

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Dec 16 2017 1:53PM | Updated Date: Dec 16 2017 1:54PM
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रफी मोहम्मद शेख-

इंदौर। प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में होने वाली 2968 असिस्टेंट प्रोफेसर्स की भर्ती प्रक्रिया मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से एक बार फिर निकाली गई हैं। नए साल में यह भर्तियां होना है लेकिन इसमें अभी कई पेंच आने वाले हैं, जिससे पिछले सालों की तरह इसमें उलझन हो सकती हैं। इसमें गेस्ट फेकल्टी द्वारा सीधी नियुक्तियां और केवल गवर्नमेंट कॉलेजों का अनुभव जैसे कई पेंच हैं, जो कोर्ट तक जा सकते हैं। 2015 में विभाग ने यह भर्तियां निकाली थी। इसके बाद दो बार इसे किसी न किसी कारण से निरस्त किया जा चुका हैं। 12 दिसंबर को एमपीपीएससी द्वारा जारी की गई यह भर्तियां तीन तरह की हैं।
 
इसमें सबसे पहले 707 बैकलॉग पद हैं, जो केवल एससी, एसटी और ओबीसी के लिए हैं। वहीं 1040 पद ऐसे हैं जो असिस्टेंट प्रोफेसर्स के प्रमोशन और रिटायर होने के कारण रिक्त हुए हैं। उधर 1221 पद विभाग ने नए सृजित किए हैं। इस प्रकार कुल 2968 पद हो गए हैं। यह 2015 में निकाली गई भर्तियों से पूरे 1302 ज्यादा हैं, यानी दो साल में 13 सौ भर्तियां हो गई हैं।
 
पांच साल आयुसीमाकी छूट
इन भर्तियों के लिए एमपीपीएससी ने मध्यप्रदेश के निवासियों के लिए आयुसीमा में तीन साल की छूट दी है। यह छूट उच्च शिक्षा विभाग के पूर्व निर्णय के अनुसार दी गई हैं। इस प्रकार सामान्य वर्ग के लिए 43 साल और आरक्षित वर्ग और महिलाओं के लिए 48 साल तक आयुसीमा के अभ्यर्थी असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्र रहेंगें। इसके साथ ही गेस्ट फेकल्टी के रूप में गवर्नमेंट कॉलेजों में काम करने वाले अभ्यर्थियों के लिए तीन के बजाय पांच साल की छूट होगी, जिससे पुरुष अभ्यर्थियों के लिए यह आयुसीमा 45 साल और महिला व आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 50 साल तक हो गई हैं। इसके अतिरिक्त गेस्ट फैकल्टी को अधिकतम 20 नंबर मेरिट लिस्ट तैयार करते समय अलग से दिए जाएंगे।
 
भर्ती में सीधा आरक्षण मिले
इसके बाद भी गवर्नमेंट कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट फेकल्टी असंतुष्ट हैं। इनका कहना है कि उन्हें केवल आयुसीमा और मात्र 20 नंबर की छूट दी गई है। उनके अनुसार कई गेस्ट फेकल्टी पिछले 15-15 साल से कॉलेजों में कार्यरत है, जबकि इन्हें अधिकतम पांच साल के अनुभव के हिसाब से ही नंबर का प्रोत्साहन दिया जा रहा हैं। उनके अनुसार जितने साल का अनुभव है उस हिसाब से प्रोत्साहन नंबर दिए जाने चाहिए। इससे ऊपर बढ़कर मांग है कि उन्हें सबके समान प्रक्रिया में शामिल क्यों किया जा रहा हैं। पांच साल के ज्यादा समय से काम कर रही गेस्ट फेकल्टी के लिए एंट्रेस परीक्षा से छूट दी जाना चाहिए। उन्हें सीधे इंटरव्यू में शामिल किया जाना चाहिए या उनके लिए कुछ पदों का आरक्षण किया जाना चाहिए। उनके अनुसार यह उनका हक बनता हैं।
 
ग्रांट व जनभागीदारी भी सामने
इन भर्तियों में एमपीपीएससी ने इस बार केवल गवर्नमेंट कॉलेजों में गेस्ट फेकल्टी को ही अनुभव का लाभ दिया है। पिछली बार प्रोफेसर की भर्तियों में ग्रांट प्राप्त कॉलेजों में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर्स को भी इसका लाभ दिया गया था। ग्रांट प्राप्त कॉलेजों में सालों से कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर्स उन्हें भी लाभ देने की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार ग्रांट प्राप्त कॉलेज भी गवर्नमेंट कॉलेजों के समकक्ष होते हैं और यहां पर कार्यरत परमानेंट स्टॉफ के लिए गवर्नमेंट कॉलेज के नियम-कानून ही लागू होते हैं। इस प्रकार उन्हें भी समान लाभ दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही कॉलेजों में जनभागीदारी के अंतर्गत कार्यरत फेकल्टी को भी कोई लाभ नहीं दिया गया है। वो भी इसकी मांग कर रहे हैं। हालांकि पिछली बार हुई प्रोफेसर भर्ती में यही समानता विवाद का कारण बनी है और इसमें भारी फर्जीवाड़े का आरोप लगे हैं, इसलिए विभाग इस बार काफी सतर्कता बरत रहा है।
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