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Career

फिशरीज बेहतर कमाई का जरिया

By Dabangdunia News Service | Publish Date: May 9 2017 3:37PM | Updated Date: May 9 2017 3:37PM
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मछली पालन में कॅरियर कहने को तो यह बड़ा ही साधारण लगता है लेकिन आज के दौर में यह एक तेजी से उभरता हुआ कॅरिअर बन चुका है। अब इस क्षेत्र में प्रशिक्षित युवा अच्छी कमाई कर रहे हैं। अगर आप मछली पालन या फिशरी साइंस के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं तो यह शानदार आॅप्शन है। इसके लिए डिप्लोमा से लेकर बैचलर और पीजी लेवल पर कई प्रकार के कोर्स उपलब्ध हैं। फिशरी साइंस का क्षेत्र काफी बड़ा है। इसमें तमाम विषय  पढ़ाए जाते हैं जो रोजगार दिलाने में मददगार होते हैं। पिछले एक दशक में मछली पालन क्षेत्र में बड़ी तेजी से बदलाव आया है। 
 
कोर्स और योग्यता
यदि आप इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो बैचलर आॅफ साइंस इन फिशरीज (बीएफएससी) कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। इसके साथ ही फिशरीज से संबंधित कुछ जॉब ओरिएटेड शॉर्ट-टर्म कोर्सेज भी हैं, जिन्हें करने के बाद जल्द ही नौकरी मिल जाती है। फिशरीज कोर्सेज में प्रवेश के लिए बायोलॉजी विषय में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ 10+2 अनिवार्य है।
 
इसके लिए डिप्लोमा से लेकर बैचलर और पीजी लेवल पर कई प्रकार के कोर्स उपलब्ध हैं। फिशरी साइंस का क्षेत्र काफी बड़़ा है। इसमें तमाम विषय ऐसे पढ़ाए जाते हैं जो रोजगार दिलाने में मददगार होते हैं। इसके तहत मछली पकड़ने से लेकर उनकी प्रोसेसिंग और सेलिंग तक की जानकारी दी जाती है। इसमें मछलियों का जीवन, इकोलॉजी, उनकी ब्रीडिंग और दूसरे तमाम विषय भी शामिल हैं। स्टूडेंट्स हर प्रकार के पानी और हर प्रकार की मछलियों के बारे में बताया जाता है। 
 
जैसे- एडवांस्ड डिप्लोमा इन फिशिंग गियर टेक्नोलॉजी, बैचलर आॅफ साइंस इन इंडस्ट्रीयल फिश एंड फिशरीज, एम. एससी इंडस्ट्रीयल फिशरीज, मास्टर आॅफ फिशरी साइंस, फिशिंग वेसल इंजीनियरिंग और बैचलर आॅफ फिशरीज साइंस (नॉटिकल साइंस) वगैरह।  बैचलर आॅफ फिशरीज साइंस आज भी मुख्य कोर्स के रूप में है। इसके तहत स्टूडेंट्स को एक्वाकल्चर, मेरिकल्चर, फिश प्रोसेसिंग, स्टोरेज टेक्नोलॉजी, उनकी बीमारियों का उपचार और इकॉलजी आदि विविध विषयों के बारे में पढ़ाया जाता है। फिशरी ग्रेजुएट मछली पालने से जुडे विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर लेते हैं। प्रैक्टिकल ट्रेनिंग इस पढाई का अहम हिस्सा है। स्टूडेंट्स को ज्यादा से ज्यादा एक्सपोजर दिया जाता है। मछली से संबंधित आंकडे एकत्र करना भी इस पढ़ाई में शामिल है। बैचलर आॅफ फिशरी साइंस चार साल का कोर्स है। इस कोर्स में प्रवेश पाने के लिए रकम से कम बायॉलजी के साथ 12 वीं पास होना जरूरी होता है। इसी विषय में मास्टर डिग्री 
 
प्रमुख विषय फिशरी पथॉलजी ( माइक्रोबायॉलजी ) में मछलियों का सूक्ष्म स्तर पर अध्ययन किया जाता है और उनके स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जाती है। फिश प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी के तहत मछलियों के संरक्षण के विभिन्न तरीकों और उपायों और मछलियों से बनने वाले उत्पाद के विषय में सिखाया जाता है। अक्वॉटिक्स इन्वाइरनमेंट साइंस में विभिन्न जलीय जीवों के शारीरिक बारीकियों को समझाया जाता है। 
संभावनाएं
फिशरीज से संबंधित कोर्स करने के बाद असिस्टेंट फिशरीज डेवलपमेंट आॅफिसर, डिस्ट्रिक्ट फिशरीज डेवलपमेंट आॅफिसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, रिसर्च असिस्टेंट, टेक्निशियन तथा बायोकेमिस्ट आदि पदों पर काम किया जा सकता है। 
 
कहां से लें शिक्षा
- नेशनल ब्यूरो आॅफ फिश जेनेटिक रिसोर्सेज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
- सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट, पश्चिम बंगाल
- कॉलेज आॅफ फिशरीज, धोली, बिहार
- जी.बी. पंत यूनिवर्सिटी आॅफ एग्रिकल्चर एंड टेक्नोलॉजी पंतनगर, उत्तराखंड
- राजस्थान एग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी, बीकानेर, राजस्थान
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