23 Aug 2017, 00:06:01 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android
Astrology

छठे दिन होती है मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Apr 2 2017 11:00AM | Updated Date: Apr 2 2017 11:00AM
  • facebook
  • twitter
  • googleplus
  • linkedin

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र के छठे दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के छठे रुप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना का विधान है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं।

मां दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है। उस दिन साधक का मन 'आज्ञा' चक्र में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

इस चक्र में स्थित मन वाला साधक मां कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है। परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्तों को सहज भाव से माँ के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।

मां का नाम कात्यायनी कैसे पड़ा इसकी भी एक कथा है- कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए. इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे।

इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी मां भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। मां भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली।

नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी की उपासना का दिन होता है। इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है और दुश्मनों का संहार करने में ये सक्षम बनाती हैं। 

इनका ध्यान गोधुली बेला में करना होता है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य मां का श्लोक सरल और स्पष्ट है। मां जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इस को कंठस्थ कर नवरात्रि में छठे दिन इसका जाप करना चाहिए।

  • facebook
  • twitter
  • googleplus
  • linkedin

More News »