20 Jan 2017, 05:00:54 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

  • भगवान पर कभी मत छोड़ो भरोसा

    एक भक्त था वह परमात्मा को बहुत मानता था,बड़े प्रेम और भाव से उनकी सेवा किया करता था । एक दिन भगवान सेकहने लगा मैं आपकी इतनी भक्ति करता हूं पर आज तक मुझे आपकी अनुभूति नहीं हुई।

  • धर्म से परिपूर्ण आचरण करें

    एक बार महामना मदनमोहन मालवीय, महात्मा गांधी व कुछ अन्य लोग धर्म पर चर्चा कर रहे थे। चर्चा के दौरान मालवीय जी ने गांधीजी से पूछा, ''बापू आपकी दृष्टि में धर्म क्या है

  • चेतावनी समझें, नहीं होगा कभी नुकसान

    एक गुरु जी प्रवचन दे रहे थे, ''ईश्वर में आस्था बनाए रखो। ईश्वर सबकी रक्षा करता है।'' एक शिष्य ने हैरान होते हुए एक-एक शब्द को हृदय में उतार रहा था।

  • कर भला तो हो भला

    किसी शहर में एकांत क्षेत्र में एक भिक्षुक रहता था। वह रोज भिक्षा लाता और घर पर लाने के बाद कहता, ''बुरा करने वाले का बुरा, और भला करने वाले का भला होता है।

  • सफलता से बड़ी है काबिलियत

    समाज में सफल लोगों को सम्माननीय दृष्टि से देखा जाता है। सफलता जीवन की कामयाबी का चिन्ह है। लेकिन सफलता से भी अधिक महत्वपूर्ण है इनसान का काबिल होना।

  • यदि यह मिल जाए तो आप क्या करेंगे

    एक व्यक्ति मौत नजदीक आ रही थी, लेकिन वह उस समय रेगिस्तानी रास्ते से कहीं जा रहा था, उस समय उसके पास यमदूत आया। यमदूत को वो पहचान न सका लेकिन

  • जानिए यह होता है धर्म का मर्म

    एक दिन तपोनिष्ठ कौशिक एक वृक्ष के नीचे बैठे हुए थे। वो वेद पाठ कर रहे थे। तभी उनके ऊपर एक पक्षी ने बीट कर दी। उन्होंने सिर उठाकर देखा तो वहां एक बगुला था।

  • दर्द के कतरे

    एक दिन एक नन्हा फरिश्ता किसी बुजुर्ग फरिश्ते के पास कुछ वक़्त गुजारने के लिए गया। वे दोनों यूं ही धरती पर किसी शहर के व्यस्त बाजार में आ गए।

  • महावीर प्रसाद द्विवेदी ने बनवाया था पत्नी का मंदिर

    हमारे धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि नारी की पूजा जहां होती है, वहां कभी धन की कमी नहीं होती वहां देवताओं का वास होता है। लेकिन संसार में ऐसे लोग भी होते हैं

  • क्रूर राजा का निष्पक्ष न्याय

    यह युद्ध कहां हो रहा था, ये नहीं पता लेकिन इसकी प्रेरक कहानी सदियों से दोहराई जा रही है। हुआ यूं कि युद्ध में तबाही का मंजर था। शत्रुदल के सेनापति को पकड़ लिया गया

  • रूप की महिमा या गुण का गुणगान

    सम्राट चंद्रगुप्त ने एक बार चाणक्य से कहा, चाणक्य काश! तुम खूबसूरत होते? चाणक्य ने कहा, राजन इनसान की पहचान उसके गुणों से होती है

  • ऐसे थे ईश्वरचंद्र विद्यासागर

    एक बालक रोज विद्यालय पढ़ने जाता था। घर में उसकी माता थी। पुत्र पढ़ाई में बड़ा तेज और परिश्रमी था। खेल के समय खेलता, लेकिन पढ़ने के समय का ध्यान रखता।

  • वही राजा आदर्श होता है

    उन दिनों शिवाजी मुगल सेना से बचने के लिए वेश बदलकर रहते थे। इसी क्रम में एक दिन शिवाजी एक दरिद्र ब्राह्मण के घर रुके। ब्राह्मण का नाम विनायक देव था।

  • समय की पाबंदी

    बात साबरमती आश्रम में गांधी जी के प्रवास के दिनों की है। एक दिन एक गांव के कुछ लोग बापू के पास आए और उनसे कहने लगे, बापू कल हमारे गांव में एक सभा हो रही है,

  • क्यों आती थी गांव में दुर्गंध

    अवंतिका देश का राजा रवि सिंह महात्मा आशुतोष पर बड़ी ही श्रद्धा रखता था। वह उनसे मिलने रोज कुटिया में जाता था।

  • सहिष्णुता के पथ पर चलना होगा

    एक बार शेख फरीद एक गांव में पहुंचे। लोगों ने क्रमश: अपनी-अपनी समस्याएं उनसे कह सुनाईं। एक व्यक्ति ने पूछा, ''जब प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाया गया तब उनके चेहरे पर खुशी थी।

  • इस वैज्ञानिक ने किया था कभी सफाई का काम

    एक विधवा थी, उसका एक पुत्र था। पुत्र ज्यादा होशियार न था, लेकिन मां के प्रयासों के चलते वह पढ़-लिख गया। उस मां का बेटा वैज्ञानिक बनना चाहता था।

  • भक्ति में बाधक है सांसारिक आसक्ति

    जो चीज हिंदू धर्म-ग्रंथों में छिटपुट दिखाई देती है, उसे गीता ने अनेक रूपों में, अनेक शब्दों में, पुनरुक्ति का दोष स्वीकार करके भी अच्छी तरह स्थापित किया है।

  • वाणी से होती है व्यक्ति की पहचान

    मनुष्य का व्यक्तित्व व प्रभाव झलकता है उसकी वाणी से। जिस तरह संगीत वाद्ययंत्र की पहचान उसके स्वर से होती है, उसी तरह व्यक्ति की पहचान उसकी वाणी से होती है।

  • चेले और शिष्य के बीच का फर्क समझें

    शिष्य का क्या मतलब है? जिसे शिक्षा दी जा रही हो, वह हुआ शिष्य। हालांकि यह कोई बहुत अच्छी श्रेणी नहीं है, क्योंकि उपदेश देने वाले ने तो दे दिया, पर यदि तुमने उसे धारण ही नहीं किया

  • सुकरात की सच्ची सहिष्णुता

    यूनान के महान दार्शनिक थे सुकरात। उनकी पत्नी झगड़ालू थी। वह छोटी-छोटी बातों पर अमूमन सुकरात से लड़ती थी। लेकिन हर समय सुकरात शांत रहते।

  • प्रेमचंद की गाय

    उन दिनों प्रसिद्ध उपन्यास-लेखक मुंशी प्रेमचंद गोरखपुर में अध्यापक थे। उन्होंने अपने यहां गाय पाल रखी थी। एक दिन चरते-चरते उनकी गाय

  • पहचान बनाना है तो कीजिए यह उपाय

    एक गांव में एक किसान रहता था। वह रोज सुबह झरनों से साफ पानी लाने के लिए दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वह डंडे में बांधकर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था।

  • किताब ने बदल दी जिंदगी

    यदि यह पुस्तक मिल जाए तो आप क्या करेंगे एक किताब किसी के जीवन को किस हद तक प्रभावित कर सकती है इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं

  • कामयाबी के लिए चाहिए नया नजरिया

    एक बालक के मन में नई-नई बातों को जानने की जिज्ञासा थी। उस बालक के मोहल्ले में एक मौलवी रहते थे। एक दिन अब्दुल उन के पास गया और बोला, ''मै कामयाब बनना चाहता हूं

  • लोगों का काम है कहना

    अमेरिकन राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के विरोधी, अखबारों में जी-खोलकर उनकी बुराई करते थे। लेकिन, लिंकन इन बातों से विचलित नहीं होते थे

  • ये है सफलता का मंत्र

    प्राचीन काल में उत्तरी चीन में एक बुजुर्ग रहता था। जो उत्तरी पहाड़ी का महामूर्ख कहलाता था। क्योंकि उसके घर के सामने दो बड़े पहाड़ थे।

  • हम ही तय करते हैं किसने किसको पकड़ा

    बात उस समय की है जब विनोबा भावे के पवनार आश्रम में एक शराबी आया। वह विनोबा जी से कहने लगा- ''बाबा, शराब के नशे ने मेरा घर तबाह कर दिया है क्या करूं ?''

  • अवसरों की पहचान करना जरूरी

    अफ्रीका में एक किसान रहता था जो बहुत सुखी था। वह सुखी इसलिए था क्योंकि वह खुश था। वह खुश इसलिए था क्योंकि वह संतुष्ट था।

  • ईमानदारी के लिए मशहूर

    सऊदी अरब में बुखारी नाम के एक विद्वान रहते थे। वे अपनी ईमानदारी के लिए मशहूर थे। एक बार वे समुद्री जहाज से लंबी यात्रा पर निकले।

  • कन्फ्यूशियस का दीघार्यु बनने का रहस्य

    एक बार चीन के विख्यात विचारक कन्फ्यूशियस से एक व्यक्ति मिलने आए। उन दोनों के बीच धर्म और दर्शन के माध्यम से अध्यात्म के अनेक पहलुओं पर चर्चा हुई।

  • रुग्ण मानसिकता है आलोचना

    जो जीवन में कुछ भी नहीं कर पाते, वे अक्सर आलोचक बन जाते हैं। जीवन-पथ पर चलने में जो असमर्थ हैं, वे राह के किनारे खड़े हो, दूसरों पर पत्थर ही फेंकने लगते हैं।

  • इस जहां में कुछ भी असंभव नहीं

    अदम्य उत्साह के धनी थे नेपोलियन बोनापार्ट। युद्ध करते हुए एक बार जब नेपोलियन आल्पस पर्वत के पास अपनी सेना सहित पहुचें, तो पहाड़ ने उनका रास्ता रोक लिया।

  • अभिमान से नहीं उदारता से करो दान

    राजा जानुश्रुति अपने समय के महान दानी थे। एक शाम वह महल की छत पर विश्राम कर रहे थे, तभी सफेद हंसों का जोड़ा आपस में बात करता आकाश-मार्ग से गुजरा।

  • खुश करने का तरीका

    एक दिन नसरुद्दीन कहीं जा रहा था कि उसने सड़क पर एक दु:खी आदमी को देखा जो ऊपरवाले को अपने खोटे नसीब के लिए कोस रहा था।

  • आपका आशियाना बन सकता है मंदिर

    एक बार की बात है मगध के व्यापारी को व्यापार में बहुत लाभ हुआ। इसके बाद से वह अपने अधीनस्थों से अहंकारपूर्ण व्यवहार करने लगा।

  • प्रेम के अतिरिक्त और कोई भाव नहीं

    संत राबिया किसी धर्मग्रंथ का अध्ययन कर रही थीं। अचानक उनकी निगाह एक शब्द पर आकर रुक गई। वह शब्द था, ''दुर्जनों से घृणा करो?''

  • विवेक और सकारात्मकता

    जापान के किसी गांव में एक समुराई बूढ़ा योद्धा रहता था। उसके पास कई समुराई युद्धकला सीखने आते थे। एक बार एक विदेशी योद्धा उसे पराजित करने के लिए आया।

  • जब कुछ न होगा तब यह होगा

    एक बार खलीफा उमर भाषण दे रहे थे। उन्होंने लोगों से पूछा, ''अगर में आप लोगों को कोई आज्ञा दूं तो क्या आप सभी उसे मानेंगे?''

  • सहिष्णुता के आगे नतमस्तक

    एक दरोगा संत दादू की ईश्वर भक्ति और सिद्धि से बहुत प्रभावित था। उन्हें गुरु मानने की इच्छा से वह उनकी खोज में निकल पड़ा।

  • छोटी बातों से ऊर्जा नष्ट न करें

    जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी-जल्दी करने की इच्छा होती है। दर्शनशास्त्र के एक प्रोफेसर कक्षा में आए

  • जब तथागत ने सुनी अछूत कन्या की बात

    जब वैशाली में धम्म प्रचार के लिए गौतम बुद्ध गए तब कुछ सैनिक भागती हुई लड़की का पीछा कर रहे थे।

  • तो शायद उन्हें कोई नहीं जानता

    महादेवी वर्मा हिंदी की प्रसिद्ध कवयित्री थीं। आधुनिक हिंदी की सबसे सशक्त कवयित्रियों में से एक होने के कारण उन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है।

  • मन का नियंत्रण में रहना जरूरी

    एक संत थे, बड़े तपस्वी और बहुत संयमी। लोग उनके धैर्य की प्रशंसा करते थे। एक दिन उनके मन में विचार आया कि उन्होंने खान-पान पर तो संयम कर लिया

  • सब कुछ भगवान का किया हुआ है

    महाभारत युद्ध चल रहा था। अर्जुन के सारथी श्रीकृष्ण थे। जैसे ही अर्जुन का बाण छूटता, कर्ण का रथ कोसों दूर चला जाता।

  • सच्चाई कभी झुकती नहीं

    स्वामी विवेकानंद के बचपन की बात है। वे जब स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे, एक दिन कक्षा में मित्रों को कहानी सुना रहे थे।

  • विचलन शक्ति छीनता है

    माही नदी के तट पर अभिरामदास नाम के महात्मा रहते थे। वह अपनी यौगिक सिद्धियों के लिए प्रसिद्ध थे।

  • जब तथागत ने सुनी अछूत कन्या की बात

    जब वैशाली में धम्म प्रचार के लिए गौतम बुद्ध गए तब कुछ सैनिक भागती हुई लड़की का पीछा कर रहे थे। सिपाहियों से बचती हुई वह लड़की एक कुएं के पास खड़ी हो गई।

  • तर्पण अर्थात जिससे तृप्ति और संतुष्टि मिले

    गुरु नानक भ्रमण करते हुए हरिद्वार पहुंचे। कोई धार्मिक पर्व था, शायद श्राद्धपर्व। गंगातट पर भारी भीड़ थी। श्रद्धालु लोग आते और स्नान करते।

  • घमंडी निशानेबाज

    धनुर्विद्या के कई मुकाबले जीतने के बाद एक युवा धनुर्धर को अपने कौशल पर घमंड हो गया और उसने एक जेन-गुरु को मुकाबले के लिए चुनौती दी।

  • सफलता के लिए जरूरी है सामंजस्य

    सफलता का श्रेय किसे मिले, इस पर एक दिन विवाद उठ खड़ा हुआ। विवाद करने वाले तीन जन थे। उनके नाम थे अभिलाषा, शक्ति और मेधावी।

  • सुंदरता और प्रवीणता

    उन दिनों प्रख्यात कलाकार माइकल एंजलो की पूरे यूरोप में चर्चा थी। उनकी लोकप्रियता देखकर एक चित्रकार उनसे बड़ी ईर्ष्या करता था।

  • धैर्य की पराकाष्ठा

    बाल गंगाधर तिलक भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी थे पर साथ ही साथ वे अद्वितीय कीर्तनकार, तत्वचिंतक, गणितज्ञ, धर्म प्रवर्तक और दार्शनिक भी थे।

  • ज्ञानी की बात का असर

    एक राजा बेहद दुखी रहता था। उसका इकलौता शैतान राजकुमार कई बुरी आदतों से घिर गया था। राजा ने उसे बहुत समझाया, पर परिणाम कुछ नहीं निकला।

  • बगीचे में टहनियों की फुसफुसाहट

    उस बगीचे में एक बांस का झुरमुट था और पास ही आम का वृक्ष खड़ा था। ऊंचाई में बांस ऊपर था और आम नीचे। सो बांस ने आम से कहा, देखते नहीं, मैं तुमसे कितना ऊंचा हूं।

  • अपना कुछ भी नहीं

    एक धर्मगुरु के तीन पुत्र थे। दुर्भाग्य से एक समय ऐसा आया कि वे तीनों एक दिन महामारी की चपेट में आ गए। अच्छी देखरेख व दवा के अभाव में वे जीवित न रह सके।

  • अपने-अपने भगवान

    एक व्यक्ति दूरबीन लेकर लोगों को तमाशा दिखाया करता था। एक दिन उसे पता चला कि शहर के एक हिस्से में सांप्रदायिक दंगे भड़क रहे हैं।

  • जहां सत्कर्म होते हैं, वह मंदिर समान

    एक दिन संत तुकड़ोजी महाराज दोपहर को विश्राम कर रहे थे कि एक शिष्य रामचंद्र उनके पास गुस्से में भरा आया। शिकायत भरे शब्दों में उसने कहा, ''गुरुदेव, लोग बड़े अहमक हो गए हैं।

  • उन्हें पीड़ा नहीं हुई

    शेख फरीद एक गांव में पहुंचे तो लोगों ने उनसे अपनी-अपनी शंकाओं के समाधान पूछे। एक व्यक्ति ने पूछा-''सुना है जब प्रभु ईसा को सूली पर चढ़ाया जा रहा था तो उनके चहरे पर खुशी झलक रही थी।

  • अवसर की पहचान

    एक भिखारी हर रोज की तरह सुबह-सुबह भीख मांगने निकला। चलते समय उसने अपनी झोली में जौ के मुट्ठी भर दाने डाल लिए।

  • कोई अपनी वस्तु वापस लेना चाहे, तो दुख क्यों?

    पारसी धर्मगुरु रवि मेहर के तीन पुत्र थे। वे तीनों एक दिन महामारी की चपेट में आ गए और वे जीवित न रह सके। मेहर उस समय बाहर गए हुए थे।

  • काले धन पर एसआईटी की चिंता जायज

    सर्वोच्च न्यायलय द्वारा काले धन पर गठित विशेष जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में काले धन के जिन स्रोतों पर सेबी को आगाह किया है, वे एक गंभीर चिंता का विषय बनकर उभरे हैं।

  • महात्माओं को न पीड़ा होती है और न ही रंज

    शेख फरीद से एक व्यक्ति ने पूछा- ''सुना है जब प्रभु ईसा को सूली पर चढ़ाया जा रहा था तो उनके चेहरे पर खुशी झलक रही थी। तनिक भी दुख नहीं था।

  • तेजी से आगे बढ़ता है अकेला चलने वाला

    जीवन का लक्ष्य होना चाहिए, निरंतर चलते रहो, तब तक चलते रहो, जब तक कि मंजिल न पा लो। जीवन चलायमान है, चलता ही रहता है, अपनी निर्बाध गति से। जीवन न तो रुकता है और न ही कभी थकता है।

  • मदद करने की भावना का लगातार विकास जरूरी

    कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को कोलकाता के एक सेठ महादेव प्रसाद मतवाला बहुत मानते थे। वे उनकी हर सुख-सुविधा का पूरा-पूरा ध्यान रखते थे।

  • दान हमेशा खुले हाथों से देना चाहिए

    एक भिखारी सुबह-सुबह भीख मांगने निकला। चलते समय उसने अपनी झोली में जौ के मुट्ठी भर दाने डाल लिए।

  • मां से मिले थे ईश्वरचंद्र को सेवा के संस्कार

    एक बालक नित्य विद्यालय पढ़ने जाता था। एक दिन दरवाजे पर किसी ने -आवाज लगाई तो बालक हाथ में पुस्तक पकड़े हुए द्वार पर गया,

  • लाल बहादुर ने माली से सीखी थी ईमानदारी

    पांच-छह साल का एक लड़का एक दिन अपने साथियों के साथ आम के बगीचे में चला गया। वहां सभी बच्चे आम तोड़ने लगे।

  • प्यारभरी आहुति से मन रहता है शांत

    किसी नगर में एक विद्वान साधु रहता था। लोग उसके पास अपनी समस्याएं लेकर आते और वहां से प्रसन्न होकर लौटते।

  • स्वरक्षा जरूरी है लेकिन अत्याचार सहना पाप

    एक गांव के बाहर एक सांप आसपास से गुजरने वाले कई लोगों को काट चुका था। एक दिन एक महात्मा उस गांव में रुके। गांव वालों ने उन्हें विषैले सांप के बारे में बताया। इस पर महात्मा सांप से मिलने चल दिए।

  • गुरु नानक की सीख पर छोड़ दी बुराई

    एक बार एक डाकू गुरु नानक के पास गया और बोला-''मैं अपने जीवन से परेशान हो गया हूं। जाने कितनों को मैंने लूटकर दुखी किया है।

  • शिवाजी को बुढ़िया ने बताया सफलता का सूत्र

    उन दिनों छत्रपति शिवाजी मुगलों के विरुद्ध छापामार युद्ध लड़ रहे थे। एक रात वह थके-मांदे एक बुढ़िया की झोपड़ी में जा पहुंचे। वहां पहुंचते ही उन्होंने बुढ़िया से कुछ खाने के लिए मांगा।

  • जरूरी नहीं कि हम जो सोचें वही सच हो

    एक बार यात्रियों से भरी बस कहीं जा रही थी। अचानक मौसम बदला और धूलभरी आंधी के बाद बारिश की बूंदें गिरने लगीं। जल्द ही बारिश तेज तूफान में बदल गई। भयंकर बिजली चमक रही थी।

  • मनुष्य की सबसे बड़ी बुराई है अहंकार

    एक मूर्तिकार उच्चकोटि की ऐसी सजीव मूर्तियां बनाता था, जो सजीव लगती थीं। लेकिन उस मूर्तिकार को अपनी कला पर बड़ा घमंड था। उसे जब लगा कि जल्दी ही उसकी मृत्यु होने वाली है तो वह परेशानी में पड़ गया।

  • बापू ने समझाया वक्त का महत्व

    एक बात साबरमती आश्रम में गांधीजी के प्रवास के दिनों की है। एक दिन एक गांव के कुछ लोग बापू के पास आए और उनसे कहने लगे, बापू कल हमारे गांव में एक सभा हो रही है,

  • गांधीजी ने दी निष्काम कर्म की सीख

    गांधी जी उन दिनों सेवाग्राम आश्रम में रह रहे थे। दूर-दूर से लोग उनसे मिलने आते और अपने मन की बात उनके सामने रखकर उनसे उसका समाधान ले जाते।

  • रोगों से बचना हो तो जमकर मेहनत करें

    किसी नगर में एक सेठ रहते थे। उनके पास सब तरह के सुख थे, पर एक तकलीफ भी थी। सेठ को रात को नींद नहीं आती थी। कभी आंख लग भी जाती तो भयंकर सपने आते। उन्होंने बहुत इलाज कराया, लेकिन रोग घटने के बजाय बढ़ता ही गया।

  • सच्चे मन से दिया दान उतारता है धर्म ऋण

    एक बार सरदार वल्लभ भाई पटेल कांग्रेस के लिए फंड एकत्रित करने रंगून गए। वहां उन्होंने अनेक व्यक्तियों से सहयोग मांगा।

  • संकल्प की ताकत से सब-कुछ संभव

    हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी गांव में एक बूढ़ा रहता था, जिसे लोग महामूर्ख समझते थे। उसके घर के सामने दो बड़े पहाड़ थे, जिससे आने-जाने में असुविधा होती थी।

  • बर्ताव पर निर्भर करती है सफलता

    एक अमेरिकी उद्योगपति अपने मजदूरों के साथ बड़ी बर्बरता से पेश आता था। विरोध में उसके मजदूरों ने लंबी हड़ताल कर दी। इससे उद्योगपति बहुत परेशान हो गया।

  • सब कुछ दान करने वाला होता है महान

    गौतम बुद्ध ने उपदेश देते हुए कहा, ''देश में अकाल पड़ा है। लोग अन्न एवं वस्त्र के लिए तरस रहे हैं। उनकी सहायता करना हर मनुष्य का धर्म है। भोजन के साथ ही आप लोगों के शरीर पर जो वस्त्र हैं, उन्हें दान में दे दें।''

  • सृष्टि में सभी जीव एक-दूसरे पर निर्भर

    एक समय एक राज्य के नागरिक पक्षियों से बहुत परेशान थे। वे उनके खेत-खलिहान बर्बाद कर देते थे। एक दिन नागरिक अपना दुखड़ा लेकर राजा के पास पहुंचे। राजा भी क्रोधित हुआ और उसने ऐलान कर दिया कि राज्य के सारे पक्षियों को मार दिया जाए, ताकि खेत नष्ट होने से बच जाएं।

  • हम सब एक ही परमात्मा की संतान

    एक दिन गेरुआ वस्त्र धारण किए एक संत जूता बनाने वाले के घर के सामने जा खड़े हुए। वह आंगन में ही अपने काम में तल्लीन था।

  • एक-दूसरे को छोटा-बड़ा समझने वाले अज्ञानी

    एक दिन गेरुआ वस्त्र धारण किए एक संत जूता बनाने वाले के घर के सामने जा खड़े हुए। वह आंगन में ही अपने काम में तल्लीन था। अचानक किसी को आया देख उसकी एकाग्रता भंग हुई।

  • सिर्फ मन बदलने से सुहानी लगने लगती है दुनिया

    एक बार एक सैनिक की नियुक्ति रेगिस्तानी इलाके में हो गई। उसकी पत्नी को भी वहीं रहने जाना पड़ा। लेकिन, उसे धूल बिल्कुल पसंद नहीं थी। उसका पति रोज ट्रेनिंग के लिए चला जाता और पत्नी को छोटे-से घर में अकेले ही रहना पड़ता।

  • अंतिम क्षणों में नहीं, वक्त पर करना चाहिए काम

    नोबल पुरस्कार विजेता कथाकार अर्नेस्ट हेमिंग्वे बचपन में बड़े हंसोड़ और नटखट थे। पढ़ने-लिखने में भी तेज थे और ईश्वर ने उन्हें गजब की कल्पना शक्ति भी दी थी। एक बार उनके शिक्षक ने बच्चों से कहानी लिखने को कहा।

  • कड़ी मेहनत है सफलता का मूलमंत्र

    बहुत दिनों की बात है हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी गांव में एक बूढ़ा रहता था, जो महामूर्ख के नाम से चर्चित था। उसके घर के सामने दो बड़े पहाड़ थे, जिससे आने जाने में असुविधा होती थी। पहाड़ के दूसरी ओर पहुंचने में कई दिन लग जाते।

  • हमेशा स्वार्थ में लिप्त रहता है ढोंगी संत

    रामदास ने कड़े परिश्रम से अपने खेत को एक खूबसूरत बाग में बदल दिया था। एक दिन जब वह बाग में पहुंचा तो देखा कि एक बाबा पेड़ पर चढ़कर फल खा रहा है।

  • अच्छा सृजन खोल देता है महानता का द्वार

    एक युवक ने समाज के दुख-दर्द की कथा सीधी-सरल भाषा में नई तकनीक के साथ लिखी। वह उसे अपने देश के प्रमुख पत्र ‘पेरी हेराल्ड’ में प्रकाशित कराने के लिए संपादक के पास ले गया। संपादक युवक को देखकर व्यंग्य से बोला, ‘तुम नए कहानीकार हो।

  • सफलता के लिए इच्छा और श्रम के साथ दृढ़ता भी जरूरी

    संत एकनाथ को अपने उत्तराधिकारी की तलाश थी। वह किसी योग्य शिष्य को यह दायित्व सौंपना चाहते थे। उन्होंने शिष्यों की परीक्षा लेनी चाही। एक दिन उन्होंने सभी शिष्यों को बुलाया और एक दीवार बनाने का निर्देश दिया।

  • न्यायप्रिय भी थे अब्राहम लिंकन

    उन दिनों अब्राहम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति थे। आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे एक व्यक्ति ने जेल में दस साल शांति और प्रेम से बिताने के बाद शेष सजा माफ किए जाने का प्रार्थना-पत्र राष्ट्रपति लिंकन के पास भेजा।

  • आश्रयदाता को छोटा समझने से होता है नुकसान

    एक बकरी के पूरे शरीर पर नर्म-मुलायम लंबे बाल थे। वह खुद को बहुत होशियार समझती थी। एक दिन वह घास चर रही थी, तभी शिकारी वहां आ पहुंचे। जैसे ही उनकी नजर बकरी पर पड़ी, वे उसे पाने के लिए लालायित हो उठे।

  • किसान का श्रम जल होता है सबसे उत्तम

    एक समय महात्मा बुद्ध राजगृह में थे। जनसमूह को नित्य प्रवचन देने के उपरांत वह सायंकाल अपने शिष्यों के साथ बैठकर विभिन्न विषयों पर वातार्लाप किया करते थे। ऐसा करने से शिष्यों का तो ज्ञानवर्धन होता ही था, बुद्ध को भी उन सभी का तुलनात्मक बौद्धिक स्तर ज्ञात हो जाता था। एक दिन इसी तरह महात्मा बुद्ध अपने शिष्यों के साथ बैठे किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे।

  • रंगों के उचित प्रयोग से भी आती है खुशहाली

    प्रकृति एक इंद्रधनुष के समान है। रंग हमारी भावनाओं को दर्शाते हैं। हर रंग का जीव के मन और शरीर से बहुत गहरा संबंध होता है, जैसे लाल रंग ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है।

  • सहनशीलता में सबसे बड़ी ताकत

    एक दरोगा संत दादू की ईश्वर भक्ति और सिद्धि से बहुत प्रभावित था। उन्हें गुरु मानने की इच्छा से वह उनकी खोज में निकल पड़ा। लगभग आधा जंगल पार करने के बाद दरोगा को केवल धोती पहने एक साधारणसा व्यक्ति दिखाई दिया।

  • भव-बंधन के जाल से बचे रहना सबसे बड़ी समझदारी

    एक दिन सुबह के समय परमहंस देव अपने शिष्यों के साथ टहल रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि पास ही कुछ मछुआरे जाल फेंक कर मछलियां पकड़ रहे हैं।

  • मनुष्य के पास सबसे बड़ी जागीर है जीवन

    तर्कशास्त्री पं. रामनाथ एक छोटी-सी जगह में बने गुरुकुल में छात्रों को पढ़ाते थे। कृष्णनगर के राजा शिवचंद्र को यह पता लगा तो उन्हें बहुत दुख हुआ कि ऐसा महान विद्वान भी गरीबी में रह रहा है।

  • विद्यासागर ने अंग्रेज को कराया गलती का अहसास

    उन दिनों ईश्वरचंद्र विद्यासागर एक संस्कृत कॉलेज के आचार्य थे। एक बार उन्हें किसी काम से प्रेसीडेंसी कॉलेज के अंग्रेज आचार्य कैर से मिलने जाना पड़ा। कैर भारतीयों से घृणा करते थे।

  • राष्ट्र के लिए सबसे अहम चीज है आस्था

    चीन में महान दार्शनिक कन्फ्यूशियस का बहुत सम्मान था। उनके विचारों से लोग इस कदर प्रभावित थे कि दूर-दूर से अपनी जिज्ञासाएं लेकर उनके पास पहुंच जाते। कन्फ्यूशियस उनकी परेशानियों को धैर्यपूर्वक सुनते और उत्तर देते।

  • जिसकी कद्र करते हैं उसे बेकार नहीं जाने देते

    जेआरडी टाटा के एक मित्र थे। जब भी मुलाकात होती तो मित्र उनसे कहते कि उनके पेन बहुत खोते हैं। वे उन्हें कहीं भी रखकर भूल जाते हैं।

  • कर्नल गद्दाफी ने सिखाया राष्ट्र सेवा का सबक

    लीबिया के लिबलिस शहर के एक प्रमुख अस्पताल में अलग-अलग वार्डों में मरीजों को मुख्य डॉक्टर के आने का इंतजार था। नर्स, कंपाउंडर आदि बेंचों पर शांति से बैठे थे, लेकिन लंबे कद का एक आदमी लंबा चोगा पहने, चहलकदमी करता हुआ प्रत्येक स्थान और वस्तु का गहराई से निरीक्षण कर रहा था, तभी अपनी ओर आते बड़े डॉक्टर को देख कर वह व्यक्ति ठिठका।

  • दूसरों के हृदय को छू लेना सबसे बड़ी कला

    एक गांव में एक साधु भिक्षा लेने के लिए गए। घर-घर घूमते रहे, पर कुछ न मिला। आखिरकार वे पानी पीकर नदी के किनारे विश्राम करने लगे। नींद खुलते ही फिर सफर शुरू कर दिया। थोड़ी दूर जाकर उन्हें एक कुटिया में एक बुढ़िया नजर आई।

  • नारी के प्रति मातृत्व भाव लाना ही सच्चा पुरुषार्थ

    यह बात उन दिनों की है जब स्वामी विवेकानंद की चर्चा दुनियाभर में फैल चुकी थी। उनके विचारों को लेकर हर जगह विचार-विमर्श चल रहा था। उन्हें एक आदर्श के रूप में स्थापित होता देख एक विदेशी महिला बहुत प्रभावित हुई।

  • काम हमेशा सही तरीके से करना चाहिए

    एक युवक अपने काम के लिए कहीं जा रहा था। रास्ते में उसने देखा कि एक मजदूर दीवार पर सफेदी कर रहा है। वह सड़क पार करने के लिए वहां कुछ देर रुका रहा और इस बीच मजदूर का काम करने का तरीका देखता रहा।

  • पंछियों को पिंजरा नहीं खुला आसमान चाहिए

    चंद्र प्रकाश के चार साल के बेटे को पंछियों से बेहद प्यार था। वह अपनी जान तक न्योछावर करने को तैयार रहता। ये सभी पंछी उसके घर के आंगन में जब कभी आते तो वह उनसे भरपूर खेलता। उन्हें जी भर कर दाने खिलाता।