20 Feb 2017, 07:11:27 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

  • वह रोशनी जो उनकी आंखों में है

    टीवी पर एक विज्ञापन आता है, जिसमें दिखाया गया है कि देर रात, कठिन पहाड़ी रास्तों पर जीप चलाते हुए एक युवक एक घर तक पहुंचता है

  • भेदभाव बढ़ा रहे हैं पर्सनल कानून

    भारत में संप्रदाय के लिए बने निजी कानूनों को लेकर हमेशा बहस होती रही है। इस बहस में हमारे देश के राजनीतिक दल भी शामिल हो जाते हैं

  • सर्वश्रेष्ठ की तलाश

    पता नहीं कैसे वैवाहिक संबंधों की तलाश में सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व तथा सर्वश्रेष्ठ पृष्ठभूमि की तलाश की जाती है। इतने ऊंचे मानदंड निर्धारित कर लिए जाते हैं

  • बगावत और जोड़-तोड़ का दौर

    यह निर्विवाद रूप से सत्य है कि सत्ता की चाहत में दशकों से सियासत में वह सब कुछ भी हुआ है जो शायद परिकल्पनाओं में निहित न था। साथ ही इससे भी कोई

  • खुल्लम-खुल्ला की बात और बेटा

    खुल्लम-खुल्ला पुस्तक लोकप्रिय तथा वास्तव में अभिनय की क्षमता रखने वाले ऋषि कपूर की आत्मकथा है, जो अभी-अभी आकर पुस्तकों के शो-रूम पर

  • जायरा मत घबराओ! सब तुम्हारे साथ हैं

    जायरा ने जब इस तरह से माफी मांगी तब ऐसा लगा जैसे सभी लड़कियों ने अपना सिर झुका लिया है और उनका आत्मविश्वास डोल गया है। पर, जिस तरह जायरा के

  • सांडों का खेल, संविधान फेल

    सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के तहत पशुओं का जीने का अधिकार कैसे निर्धारित किया, यह देखने-समझने की बात है। सरकार और अदालत आम जनता के जीवन और रोजगार के

  • धोखा देने के नए माध्यम

    सोशल मीडिया जब से अस्तित्व में आया है तब से महिलाएं छली जा रही हैं और धोखा खा रही हैं। कभी-कभी तो बहुत हैरानी होती है कि कैसे पुरुष वह रास्ता तलाश कर ही

  • दलों के खिलाफ स्टिंग में देरी क्यों?

    आचार संहिता के लागू हुए कितने दिन हो गए हैं, मगर अभी तक गैर भाजपा दलों के नेताओं का एक भी स्टिंग नहीं आया है। दिल्ली विधानसभा चुनाव, बिहार विधानसभा

  • कुर्ता फाड़ राजनीति उर्फ स्व-चीरहरण

    राहुल गांधी की कुर्ता फाड़ राजनीति ने मुझे आकंठ विचलित कर दिया। वो जब आमसभा में अपने फटे कुर्ते और फटे जूतों का मुजाहिरा कर रहे थे तो मेरा तन-मन

  • बेटियों का स्वागत यूं भी

    महाराष्ट्र का बीड़ जिला बहुत बदनाम रहा है। वहां कन्या शिशु भ्रूण हत्या का एक लंबा समय मौजूद है। बीड़ के बारे में कहा जाता रहा है कि यहां कन्या शिशु भ्रूण

  • रुक जाना नहीं तू कभी हार के...

    उस बड़ी बहन के लिए यह रास्ता कितना कठिन और दुर्गम था। पर, वह पैदल 100 किलोमीटर चलकर न्यायालय के दरवाजे पर पहुंची वह भी केवल इसलिए कि

  • साइकिल के सामने कांटोंभरी राह

    तो अब तय हुआ है कि मुलायमसिंह यादव अलग से उम्मीदवार नहीं उतारेंगे और न खुद अखिलेश यादव को ललकारेंगे। तय हुआ है कि पिता के उम्मीदवारों की सूची का

  • प्रसाधन सामग्री, कितना करें शृंगार?

    पिछलें दिनों अमेरिका से लेकर पूरे यूरोप तक यह बात फैली कि महिलाओं की प्रसाधन सामग्री इतनी हानिकारक है कि यदि गर्भवती महिलाएं उसे प्रयोग करती हैं

  • गांधी, खादी, खादी और मोदी

    फुरसत के पल में, जब दूसरा कुछ न सूझे तो हम सबका एक शगल होता है, कलम लेकर किसी लड़की के फोटो पर दाढ़ी-मूंछ चस्पा करना या कि किसी पुरुष चेहरे को

  • महिलाएं हैं सूर्य की उपासक

    हमें सर्वोच्च शक्ति को धन्यवाद देना चाहिए कि हमने पृथ्वी के एक ऐसे भू-भाग में जन्म लिया है जहां सूर्य के प्रकाश की असीम कृपा है। सूरज की किरणें मन में

  • चुनाव सुधार का सही वक्त

    विगत 2 जनवरी को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने धर्म, जाति और मत, संप्रदाय के नाम पर चुनाव लड़ने को असंवैधानिक करार दिया था। मुख्य न्यायाधीश की

  • अभिनेत्री और सामाजिक चेतना

    फिल्मी दुनिया बहुत चकाचौंधभरी है। ऐसा लगता है कि इस दुनिया में केवल रोशनी से भरे दिन होते हैं और चमकती हुई रातें होती हैं। पैसा बेहिसाब है

  • सावधानी से निपटें चीन से

    जब भारत ने 20 अप्रैल, 2012 को पहली बार तीन चरणों वाली बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया था, उस वक्त चीन ने अपनी काफी सधी हुई

  • दादा-दादी, नाना-नानी की ओर से बधाई

    प्राय: समाचार पत्रों में विज्ञापन में बच्चों के जन्मदिन को लेकर चित्र दिए जाते हैं। उनमें उनके जन्मदिन पर दी गई शुभकामनाओं में लिखा होता है

  • सियासत का स्वच्छता अभियान कब?

    आजादी के 70 वर्षों बाद भी हम अपने आचरण, चरित्र, नैतिकता और काबिलीयत को एक स्तर तक भी नहीं उठा सके। हमारी आबादी इतने वर्षों में करीब चार गुना हो

  • विदेश मंत्रालय और भावनाओं का वर्चस्व

    क्या महिलाओं की तथा सामान्य परिवारों की विदेश विभाग और उसकी नीति में कोई रुचि हो सकती है? भारत के अन्य देशों के साथ किस तरह के संबंध है और उनके

  • अब रुकेगी मजहबी सियासत

    लोकसभा चुनाव हो या विधानसभाओं के, पंचायत के चुनाव हों या स्थानीय निकायों के, चाहे बार काउंसिल का चुनाव हो या अन्य संस्थाओं के, जाति, धर्म, नस्ल, प्रदेश, समुदाय और भाषा की

  • थाने में लड़कियां और देखे हथियार

    मुंबई पुलिस ने एक अभिनव प्रयोग किया है। पुलिस ने लड़कियों के स्कूलों में संपर्क कर वहां के प्रधानाध्यापक तथा प्रधानाध्यापिका से संपर्क कर अनुरोध किया कि

  • गुनाह नहीं है बढ़ती आबादी पर चिंता

    बढ़ती जनसंख्या पर अगर बात करना गुनाह है तो सरकारी नारा ‘हम दो हमारे दो’ का क्या मतलब? यह पंचलाइन कम बच्चे पैदा करने के लिए ही लिखी गई

  • एक यातना शिविर का सफर

    एक वैन में जहां लगभग आठ लोगों के बैठने की सुविधा थी वहां 18 बच्चे भरे हुए थे। वैन के दरवाजे बंद होते हैं और इतनी ठसाठसी में सांस लेने की भी

  • भारतवंशियों की कितनी चिंता?

    आपको याद होगा कि तीन-चार दशक पहले तक भारत से बाहर जाकर बसे भारतीयों को हेय भाव से देखता था हमारा समाज। कहा जाता था कि देश के

  • चीफ जस्टिस के लिए चीफ हैं माता-पिता

    भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर के लिए उनके माता-पिता की सेवा भी सर्वोच्च प्राथमिकता रही। उनकी माता का स्वर्गवास हो

  • पिछली गलतियों से सीखें राहुल

    हर कोई छुट्टी पर जाना चाहता है, परिवार के साथ वक्त बिताना चाहता है। कोई भी हो उसके लिए छुट्टी पर किसी रोमांच से कम नहीं होता, लेकिन यही छुट्टियां जब कोई

  • जरूरी हो गया था दरवाजा दिखाना

    आखिर वही हुआ जिसका डर था। देश की सर्वोच्च अदालत ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को पद से

  • प्रशासकीय जिम्मेदारियों के बीच परिवार

    कुछ समय पहले दिल्ली के लेफ्टीनेंट गर्वनर नजीब जंग ने अपनी प्रशासकीय जिम्मेदारियों से मुक्त होने के लिए त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने कहा वह अपने परिवार को

  • मोदी सफल, सरकार विफल!

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का रिपोर्ट कार्ड उतना खराब नहीं है, जितना प्रचार किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार में अभी तक कोई

  • फिल्मी गीतों के शब्दों में गूंजती असमानता

    मुंबई के एक एनजीओ अक्षरा केंद्र ने एक सूत्र वाक्य दिया है-पेन उठाओ, गाना घुमाओ। ‘‘इस स्वयंसेवी संगठन (एनजीओ) ‘अक्षरा’ के मुंबई के अलग-अलग कॉलेज के

  • जनता जानती है नौटंकी की हकीकत

    बचपन में एक कहानी पढ़ी थी किस तरह बीमार बेटे हुमायूं की जान बचाने के लिए वालिद बाबर ने अल्लाह से दुआ मांगी और कहा था कि अगर उन्हें किसी की जान लेनी ही है

  • पिछला वर्ष और महिलाएं

    गुजरा हुआ वर्ष कई कदमों और बातों के लिए महिलाओं को याद रखना चाहिए, क्योंकि इस वर्ष जो भी हुआ वह महिलाओं को ही कई बार केंद्र में लेकर था

  • आर्थिक नाकेबंदी में उलझा मणिपुर

    मणिपुर सरकार ने 28 अक्टूबर 2016 को दो जिलों सदर हिल्स और जिरिबाम का प्रस्ताव रखा, जिसमें नागा यूथ फेडरेशन ने 30 अक्टूबर, को 24 घंटे बंद का आह्वान

  • यात्रियों की सुरक्षा ही बेपटरी

    कानपुर देहात के नजदीक 28 दिसंबर की सुबह सियालदह अजमेर एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें 50 से अधिक लोग जख्मी हो गए। इस दुर्घटना में

  • माया तू महाठगिनी

    मायावती की बहुजन समाज पार्टी के बैंक खाते में नोटबंदी की घोषणा के बाद 104 करोड़ रुपए के पुराने बड़े नोट जमा कराए जाने के बाद साफ हो जाना चाहिए

  • सभी को मिले आयकर छूट का पैसा

    नोटबंदी को लेकर एक नई खुशी छाने लगी है। नरेंद्र मोदी सरकार अपने चौथे बजट में कॉरपोरेट और इनकम टैक्स में कटौती करने वाली है ताकि मंद गति से चल रही

  • बेटियों की खुशी का दिन

    जब प्रशासन इस ओर सजग हो जाए कि बेटियों की खुशी में ही उन्हें सशक्त बनाने का संदेश भी निहित है तब बेटियां अवश्य ही बच भी जाएंगी और पढ़ भी

  • शिवाजी के बहाने शिवसेना पर चोट

    छत्रपति शिवाजी महाराज के विराट स्मारक का हॉवरक्राफ़्ट में बैठकर पहले जल पूजन और बाद में एक जनसभा को संबोधित करके पीएम नरेंद्र मोदी ने एक तीर से कई

  • अब नहीं तो कब जागेंगे ग्राहक

    देश की अर्थव्यवस्था में ग्राहक का महत्वपूर्ण स्थान होता है, वह राजा होता है, ग्राहक तय करता है कि उसे क्या खरीदना है? क्योंकि उसे चयन का अधिकार प्राप्त

  • पहले ग्रामीणों को तैयार करें

    भारत ग्रामीण बहुलता का देश है। प्रत्येक बड़े बदलाव में गांवों को शामिल करना अपरिहार्य है। कैशलेस व्यवस्था की ओर बढ़ना समय की अवश्यकता है

  • जनता की जेब खाली क्यों

    जब सरकार यह कहती है कि रिजर्व बैंक नोटबंदी के बाद पैदा हुए नोटों की कमी से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है, तो यह प्रश्न अनायास ही उठता है कि रिजर्व बैंक की इतनी