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देशभर में तुवर का स्टॉक कम, भविष्य तेजी का

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jul 12 2015 12:21PM | Updated Date: Jul 12 2015 12:21PM
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शैलेश पाठक - 98260-11032
इंदौर। देशभर में दलहन की बढ़ती कीमतों से परेशान सरकार ने पिछले महीने दालों के बढ़ते दामों को रोकने के लिए कुछ कदम उठाने की घोषणा की थी जिसमें राज्य सरकारों को आदेश दिया था कि जमाखोरों पर सख्त कार्रवाई की जाए। सरकारी दहशत से देशभर में कारोबारी तुवर का स्टॉक तेजी से काटने में जुट गए हैं, जबकि महाराष्ट्र-कर्नाटक में चालू सीजन वाली तुवर का स्टॉक लगभग पहले ही निपट चुका था। उधर, कानपुर, इलाहाबाद, सुल्तानपुर, हरदोई एवं नगर उटारी लाइन में जो चैत वाली तुवर आती है, वह भी इस बार काफी कम आई थी। 
 
 
हालांकि बोई गई फसल में दाने बढ़िया और कचरी की मात्रा कम आई थी, लेकिन रबी सीजन वाली तुवर लम्बे समय में तैयार होने से किसान दिन-प्रतिदिन इसकी बोवनी कम कर रहे हैं। इसके स्थान पर टमाटर सहित अन्य सब्जियों की बोवनी पर जोर देने लगे हैं। इसके अलावा बर्मा में भी तुवर की फसल जनवरी-फरवरी की बरसात से इस बार 20 प्रतिशत कम आई है। यही कारण है कि घरेलू बाजारों में भी तुवर कुछ शॉर्टेज में है। 
 
डेढ़ महीने से स्टॉक सीमा को देखते हुए सरकार छापेमारी कर रही है लेकिन जो चाहिए वो बाजार में काफी कम है, छापेमारी से केवल टैम्प्रेरी दबाया जा सकता है। वर्तमान में पुरानी लेमन 7100 एवं नई लेमन तुवर 7300 रुपए तक बोली जा रही है। बर्मा से हाजिर शिपमेंट की तुवर यहां 7600 रुपए के पड़ते की लग रही है।
 
इसी को देखकर सटोरिये आगे के सौदे काफी ऊंचे दामों पर करने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों में तुवर की कीमतों में 300-450 रुपए की तेजी आ चुकी है। पिछले दिनों महाराष्ट्र की सफेद तुवर इंदौर डिलिवरी 7000 और लेमन 6950 रुपए तक बिक रही थी, वो वर्तमान में बढ़कर 7450 और लेमन 7300 रुपए पर पहुंच गई। 
वर्तमान में दली हुई दाल की बिक्री बिलकुल नहीं है। साबुत माल भी दाल मिल वाले प्रोसेसिंग के अनुरूप ही ले रहे हैं। मुंबई में भी कोई विशेष स्टॉक नहीं है। केंद्र सरकार ने पिछले महीने 5000 टन तुवर के इंपोर्ट का टेंडर जारी किया है। दाल व्यापारियों के मुताबिक फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दालों की कीमतें ऊंची ही हैं। यही नहीं, इंपोर्ट के लिए प्री-बुकिंग के चलते दुनिया के बड़े दाल बाजारों में स्टॉक भी कम है। ऐसे में इंपोर्ट से दालों की कीमतें कम होंगी, इसकी उम्मीद न के बराबर है। हालांकि पिछले दिनों 96 कंटेनर नवांसेवा पोर्ट पर लगे थे। वे जलगांव, पुणे, दिल्ली, सहित कई राज्यों की बड़ी दाल मिलों एवं आयातकों के हैं। इसमें अधिकतर माल पहले का ही बिका हुआ है। घरेलू फसल 5-6 महीने से पहले किसी भी राज्य की आने वाली नहीं है, जिससे वर्तमान भाव पर आगे चलकर व्यापार लाभदायक रहेगा। कृषि मंत्रालय के तीसरे आंरभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में दलहन की पैदावार घटकर 173.8 लाख टन होने का अनुमान है जबकि फसल सीजन 2013-14 में देश में रिकॉर्ड 192.5 लाख टन दालों की पैदावार हुई थी।
 
लंबी मंदी के आसार कम
अगस्त से त्योहारी सीजन की शुरुआत हो जाएगी जिसमें तुवर और तुवर दाल की खपत में बढ़ोतरी की संभावना है। इधर, मिलें स्टॉक लिमिट की दहशत से ज्यादा स्टॉक नहीं कर रही है। ऐसे में आगे मांग अच्छी निकलने पर तुवर और दाल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसी उम्मीद है कि तुवर 7700 रुपए से ऊपर पहुंचेगी।  
- मुकेश असावा, व्यवसायी
 
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