25 Mar 2017, 01:31:29 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

व्यापार प्रतिनिधि - 98260-11032
इंदौर। देश में सरसों का उत्पादन मुख्यत: राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड इत्यादि राज्यों में होता है। बोवनी कमजोर होने और अनुकूल मौसम न होने के कारण इस साल सरसों का उत्पादन 10 लाख टन घटकर 57 लाख टन के लगभग रह गया। उत्पादन में कमी और आने वाले तीन-चार महीने भरपूर खपत होना है। ऐसे में अगर निर्यातकों की खरीदी घरेलू बाजार में निकलती है तो सरसों और सरसों तेल की कीमतें इस साल नए रिकॉर्ड स्तर को पार कर सकती है।
 
एक विशेषज्ञ का मानना है दुनियाभर में प्रमुख सरसों उत्पादक क्षेत्र यूरोपियन यूनियन में इस साल सरसों के उत्पादन में भारी गिरावट आने का अनुमान है। यूरोपियन यूनियन के अलावा यूक्रेन में भी उत्पादन घट सकता है। इन देशों में उत्पादन कम होने की स्थिति में भारतीय सरसों की एक्सपोर्ट मांग बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा दुनियाभर में तेल और तिलहन के कारोबार पर अपना नजरिया देने वाली संस्था आॅइल वर्ल्ड के मुताबिक साल 2015 के दौरान यूरोपियन यूनियन में सरसों का उत्पादन करीब 12 फीसदी घटकर 218 लाख टन रह सकता है। 2014 के दौरान यूरोपियन यूनियन में उत्पादन 246 लाख टन के पार था।
 
यूरोपियन यूनियन के सबसे बड़े उत्पादक जर्मनी में उत्पादन करीब 17 फीसदी घटकर 51 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है। फ्रांस में उत्पादन करीब 3 लाख टन घटकर 52 लाख टन और ब्रिटेन में भी उत्पादन 3 लाख टन कम होकर 22 लाख टन रहने का अनुमान है। ब्रिटेन और फ्रांस की तरह पोलैंड में भी उत्पादन 3 लाख टन कम होकर 21 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है। 
 
कम उत्पादन होने की स्थिति में यूरोपियन यूनियन यूक्रेन से सरसों का आयात करता है लेकिन इस साल यूके्रन में भी सरसों का उत्पादन कम बताया जा रहा है, जिस वजह से यूरोपीय देशों को कनाडा का रुख करना पड़ सकता है। आॅइल मिल के मार्केट में भारतीय एक्सपोर्टरों को कनाडा से प्रतिस्पर्धा करना पड़ती है लेकिन इस साल कनाडा में भी कम उत्पादन बताया जा रहा है।
 
ऐसे में सरसों का एक्सपोर्ट करने वाले भारतीय आॅइल मिल एक्सपोर्टर अपने लिए आसानी से मार्केट तलाश सकते हैं। आॅइल मिल की मांग सरसों और सरसों तेल की कीमतों को भी हवा दे सकती है क्योंकि भारतीय बाजारों में भी सरसों का कोई खास स्टॉक नहीं है। ऐसे में घरेलू और मांग का दबाव बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरसों की कीमतों में मंदी की गुंजाइश कम नजर आ रही है। 
 
पहली तिमाही में सोया खली निर्यात 61 फीसदी घटा 
विदेश में भारतीय सोया खली के दाम ऊंचे होने से निर्यातकों की मांग कमजोर है। मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में देश से सोया खली निर्यात करीब 61 प्रतिशत गिरकर 34,160 टन रह गया।  सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया (सोपा) के चेयरमैन डेविश जैन ने कहा इससे पहले वित्तीय वर्ष 2014-15 में अप्रैल से जून तिमाही के दौरान 86,741 टन सोया खली का निर्यात किया गया था।
 
जून में देश का सोया खली निर्यात करीब 20.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,098 टन रह गया। पिछले साल जून में 2,637 टन सोया खली का निर्यात हुआ था। तेल विपणन वर्ष (अक्टूबर  2014-सितंबर 2015) में अक्टूबर से जून के बीच सोया खली निर्यात में करीब 71.50 प्रतिशत की गिरावट रही और यह लगभग 5,83,788 टन रह गया। पिछले साल इसी अवधि में 20,51,322 टन निर्यात किया गया था। 
 
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