22 Jun 2017, 19:36:17 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

व्यापार प्रतिनिधि
शैलेश पाठक इंदौर - 98260-11032


इंदौर। देशभर की मंडियों में चने की आवक धीरे-धीरे घटने लगी है। प्रमुख उत्पादक केंद्र मध्यप्रदेश और राजस्थान के कारोबारी इस बार 55-56 लाख टन उत्पादन अनुमान लगा रहे हैं जो पिछले साल 85 लाख टन हुआ था। हालांकि सरकारी चना उत्पादन का आंकड़ा व्यापारी अनुमान से कुछ अधिक आ रहा है लेकिन पिछले साल से कम है। इधर, राजस्थान के बीकानेर लाइन में चने का कुल मिलाकर 8-10 लाख बोरी स्टॉक बताया जा रहा है जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 40 प्रतिशत कम है। इसके अलावा महाराष्ट्र के अकोला, जलगांव, खामगांव को मिलाकर मुश्किल से 5-6 लाख बोरी स्टॉक होने का अनुमान आ रहा है।

मध्यप्रदेश में इस बार स्टॉक कुल 40-45 लाख बोरी के करीब होने की सर्वे रिपोर्ट आई है। हालांकि इसमें भी बेस्ट क्वालिटी का चना काफी कम है। इसके अलावा जो चना वास्तविक रूप में होने का अनुमान है, वह वायदा एक्सचेंजों में वेयर हाउस रेगुलेशन एक्ट के अंतर्गत मौजूद है, जो आगे की तेजी-मंदी के हिसाब से कंपनियां खरीद-फरोख्त करेंगी। अब स्थिति यह रह गई है कि मंडियों में किसानी माल की आवक लगभग सिमट चुकी है। इंदौर में अप्रैल से अब तक चने की आवक सीमित दायरे में घूम रही है।

यह स्थिति दिल्ली में भी देखने को मिल रही है, वहीं अप्रैल से अब तक किसी दिन 100 ट्रक से अधिक चना नहीं आ पाया। इस समय तो आवक और घटकर 35-36 ट्रक रह गई है जो पिछले साल तक 150 गाड़ियां तक अप्रैल-मई में लग जाती थीं। इस समय चना कांटे के भाव इंदौर मंडी में 4300-4325 रुपए चल रहे हैं जो काफी कम है। इन दामों पर कीमतें ज्यादा नीचे जाने की गुंजाइश कम है।  दूसरी ओर नई फसल के लिए बोवनी अक्टूबर में शुरू होगी। पूरे साल किसानों को अन्य फसल की तुलना में चने में कोई खास लाभकारी मूल्य नहीं मिलने से वो इस साल बोवनी में कम रुचि दिखा सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि चालू सीजन में चने की बोवनी महाराष्ट्र और मध्यप्रदश में कुछ घट सकती है। नई फसल मार्च-अप्रैल में आएगी। उससे पहले मिलों में दाल की प्रोसेसिंग हेतु चने की उपलब्धता मांग की तुलना में कम होने का पूरा अंदेशा है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में चने का स्टॉक अधिक है लेकिन आयात पड़ता भी महंगा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए देशी चना आगे चलकर शॉर्टेज में आ जाएगा।

फिलहाल सरकारी स्टॉक लिमिट की दहशत के चलते कोई भी स्टॉकिस्ट लंबा स्टॉक नहीं रख रहा है और जल्द से जल्द स्टॉक हलका करने में पिछले एक महीने से जुटे हुए हैं। यही वजह है कि पिछले दिनों इंदौर में जो चना कांटा 4450 रुपए पर पहुंच गया था वो घटकर 4325 रु. रह गया। हालांकि इन दामों पर ज्यादा मंदी की गुंजाइश नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में चने की कीमतों में 500-600 रुपए की तेजी आ जाए तो कोई आश्चर्य नहीं है। 
लंबी मंदी के आसार कम
अगस्त से त्योहारी सीजन की शुरुआत हो जाएगी, जिसमें दलहन में चने की खपत सबसे ज्यादा रहने की संभावना है। वर्तमान  स्थिति को देखते हुए अच्छी क्वालिटी के चने की अछत बाजार में बन सकती है और वर्तमान में चने के दाम काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में आगे चने में डिमांड बढ़ने पर कीमतों में सुधार की स्थिति बन सकती है।

देशी चने का उत्पादन और स्टॉक दोनों ही घरेलू की तुलना में अब कम है। वर्तमान में सरकारी दहशत की वजह से बिकवाली का प्रेशर बना हुआ है जिससे कीमतें घट रही हैं। देश के कई गोदामों के माल काफी निपट चुके हैं। अक्टूबर से शुरू होने वाली बोवनी में भी कुछ कमी का अनुमान लगाया जा रहा है। इधर, अक्टूबर से जनवरी तक चने की खपत भरपूर रहने की संभावना है। ऐसे में उस दौरान चने की शॉर्टेज बन सकती है। चने के वर्तमान दामों में 400-500 रुपए की तेजी आ जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। इसे देखते हुए वर्तमान भाव पर व्यापार लाभदायक रहेगा।

 

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