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बेमिसाल स्वाद से भरपूर नवाब नगरी की 'बलाई' आज भी है जायके की शहंशाह

By Dabangdunia News Service | Publish Date: May 24 2018 2:30PM | Updated Date: May 24 2018 2:30PM
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लखनऊ। लजीज व्यजंनो के लिये देश दुनिया में मशहूर नवाबनगरी लखनऊ में दूध से बनायी गयी मलाई अथवा बलाई जमाये जाने की विशेष कला अनूठा स्थान रखती है। बलाई शब्द फारसी भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ ऊंचाई का हिस्सा होता है। जाने माने वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता पंकज प्रसून के अनुसार दूध का सबसे पौष्टिक भाग मलाई होता है। लखनऊ के हलवाइयों ने मलाई जमाने के ढ़ंग को एक कला में बदल दिया। यहां पर बलाई परत दर परत जमाई जाती है। दशकों पहले इसको मलाई कहा जाता था। दूध से बनी मलाई के बलाई बनने का भी अपना इतिहास है।
लखनऊ के प्रसिद्ध इतिहासकार डॉक्टर रौशनतकी ने बताया कि नवाब वाजिद अली शाह ने मलाई के नाम को बलाई रखने के पीछे तमाम तर्कों और उसके शाब्दिक अर्थ को भी ध्यान में रखा। डॉक्टर रौशनतकी ने बताया कि चूंकि दूध में मलाई या बलाई सबसे ऊपर जमती है और इस शब्द का अर्थ फारसी मे ऊपर का हिस्सा होता है, इस लिए यह तार्किक भी था। उन्होंने बताया कि नवाब वाजिद अलीशाह को बलाई बहुत पंसद थी।
---ऐसे हुआ 'मलाई पान' का आविष्कार
लखनऊ की वैश्विक पहचान बन चुकी मिठाई 'मलाई पान' के अविष्कार की भी रोचक घटना है। रामआसरे के वर्तमान वंशजों के अनुसार अवध के नवाबों के समय में पान का प्रचलन काफी था, इसी से प्रभावित उनके पूर्वज रामआसरे ने नवाब वाजिद अलीशाह के लिए बलाई से एक मिठाई मलाई पान तैयार किया। नवाब वाजिद अलीशाह ने इस मिठाई को बहुत पंसद किया। प्रसिद्ध नाटककार एस एन लाल बताते है कि पंडित भीम सेन जोशी को लखनऊ की बलाई भी खासतौर से पंसद थी। उन्होंने बताया कि भारतीय क्रिकेट के प्रसिद्ध गुगली गेंदबाज चन्द्रशेखर को भी यहां की बलाई से लगाव था। हांलाकि आज कुछ लोग सेहत की दृष्टि से मलाई को ठीक नहीं मानते मगर लखनऊ किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के फिजियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डाक्टर नरसिंह वर्मा के अनुसार यदि शारीरिक मेहनत करने वाला इंसान एक निश्चित मात्रा में मलाई का सेवन करे तो लाभप्रद है। उन्होंने कहा बीस वर्ष से कम उम्र के लोगों को मलाई का सेवन जरुर करना चाहिए। डॉक्टर नरसिंह ने कहा यह कहना गलत है  कि मलाई सेहत के लिए नकुसानदेह है। कुछ भी हो लखनऊ में आज भी पारम्परिक मिठाई की दुकानों पर बलाई जमाने की यह कला जिंदा है। इतना ही नहीं लखनऊ की कुछ मशहूर मिठाई की दुकानों में मलाई पान जैसी मिठाइयां आपको खाने के लिए मिल सकती हैं जो लखनऊ की अपनी विशेषता है।
 
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