23 Jun 2017, 00:00:53 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

दो भाई किसी ज्योतिषी के पास गए। उसने दोनों को देखा। छोटे से उसने कहा- तुम्हें कोई राज्य मिलने वाला है। तुम बड़े शासक बनोगे। बड़े भाई से कहा-सावधान रहना। कोई बड़ी विपत्ति आने वाली है। एक खुश हुआ, दूसरा  उदास। दोनों घर आ गए। दूसरे ने ज्योतिषी की भविष्यवाणी पर काफी गंभीरता से मंथन किया। उसने सोचा विपत्ति तो आने वाली है, मुझे अपने जीवन को अच्छे कामों में लगाना चाहिए।  वह  जागरूक बन गया। अच्छे आचरण में लग गया। पहले वाले ने भी ज्योतिषी की भविष्यवाणी को शाश्वत सच मान लिया। उसने सोचा- अब चिंता की क्या बात है? राज्य मिलने वाला है। उसमें अहंकार आ गया। दुनिया भर की जितनी बुरी आदतें थीं, उसने सब शुरू कर दिए। 

उसका व्यवहार तानाशाह जैसा हो गया। तभी किसी राजा का पुत्र मर गया। पीछे कोई था नहीं। राजा ने सोचा, बूढ़ा हूं। व्यवस्था करूं। राजा ने एक पद्धति अपनायी और उसमें बड़ा भाई उत्तीर्ण हो गया। बड़ा भाई राजा बना तो छोटे को अजीब लगा। दोनों ने ज्योतिषी को बुलाया और कहा कि आपने उल्टी बात बता दी। ज्योतिषी ने कहा- ठीक बात बताई थी। उस समय जो होने वाला था, वही बताया। बताओे कि मेरे बताने के बाद तुम दोनों ने क्या-क्या किया? दोनों भाइयों ने अपनी-अपनी कहानी सुनाई। ज्योतिषी ने कहा- मैं क्या करूं? ज्योतिष का जो नियम था उसी के आधार पर मैंने बताया था। तुमने बुरा आचरण किया। तुम्हें राज्य मिलने वाला था, किंतु बुरे आचरण के कारण नियम बदल गया।

उसने इतना अच्छा आचरण किया कि विपत्ति बदल गई। हम स्वयं हैं अपने भाग्य के निमार्ता। हम चाहें तो जीवन में घटित होने वाली बुरी से बुरी घटना को टाल सकते हैं। कोई दूसरा कर्त्ता नहीं है। कोई दूसरा नियंता नहीं है। भगवान महावीर के अनुसार हम स्वयं अपने भाग्य के विधाता हैं। हमारे भाग्य का विधाता कोई दूसरा नहीं है। हमारे भाग्य की बागडोर हमारे ही हाथ में है। दूसरा कोई उसे थामे हुए नहीं है। न किसी के आगे गिड़गिड़ाओ और न किसी पर दोषारोपण करो। कभी भी यह न सोचो कि अमुक आदमी ने हमारे भाग्य को बिगाड़ दिया। हम अपने नेक कामों से अपने भाग्य के खराब क्षणों को सुखद बना सकते हैं।

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