15 Dec 2018, 15:48:12 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के प्रतीक रक्षाबंधन को लेकर पश्चिम क्षेत्र के बाजारों में खूब रौनक है। भारतीय संस्कृति से जुड़ी चंदन, रुद्राक्ष और तुलसी आदि की राखियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। मोर का पंख, सूच्चे मोती वाली राखियों की भी खासी डिमांड है। बाजारों में अलग-अलग किस्म की और सस्ती से लेकर महंगे दामों वाली राखियां उपलब्ध हैं।
 
रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर इन दिनों शहर के बाजारों में महिलाओं और लड़कियों का जमघट देखा जा रहा है। सभी महिलाएं अपने भाई के लिए सबसे सुंदर और अलग राखी खरीदने के लिए दुकानों पर पहुंच रही हैं। दुकानदारों ने भी इस वर्ष महिलाओं और लड़कियों की पसंद का ख्याल करते हुए विभिन्न किस्मों तथा बढ़िया दामों पर राखियां बेचने को रखी हैं।
 
हर तरह की राखियां
बच्चों की पसंद के मुताबिक राखियां भी देखने को मिल रही हैं। रिवर साइड रोड के व्यवसायी कमल ने बताया कि राखी का त्योहार नजदीक आते ही उनकी दुकान पर महिलाओं का आना शुरू हो गया था। ग्राहकों की पसंद को देखते हुए उनकी दुकान पर सस्ते से लेकर महंगे दामों वाली राखियां मौजूद हैं। लड़कियों की पसंद को देखते हुए ट्रेंडी राखियों भी रखी हंै। उन्होंने बताया कि हालांकि हर दाम की राखी मौजूद है। सबसे ज्यादा मांग 5 से 20 रुपए तक की राखी की है। करीब 80 प्रतिशत बिक्री इन्हीं दामों की राखियों की है।
 
बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर्स 
बाजार में विभिन्न किस्मों की राखियां मौजूद हैं। इसमें भारतीय संस्कृति से जुड़ी चंदन, रुद्राक्ष, तुलसी और अन्य उत्पादों से बनी राखियां उपलब्ध हैं। इसके अलावा जरकन वाली राखियों की भी डिमांड देखने को मिल रही है। बच्चों की पसंद के मुताबिक कार्टून हीरो जैसे बेन टेन, मोदी, डोरेमॉन, छोटा भीम, बाल गणेश और अन्य तरह की राखियां रेशम की डोर के अलावा, ब्रेसलेट, रबरबैंड और स्पार्किंग लाइट बैंड के साथ उपलब्ध हैं। 
 
एक रुपए से लेकर 1000 तक की राखी
मिल क्षेत्र में सजी राखियों की दुकानों पर भी 1 से लेकर 1000 रुपए तक की राखी मौजूद है। इनमें 1 रुपए वाली राखी मौली के धागे के स्वरूप में है, वहीं इसके अलावा 2, 5, 10, 20, 30, 50, 100, 150, 250, 300, 350 से 1000 रुपए तक की राखियां भी हैं। महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार इन राखियों का चयन कर रही हैं।
 
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