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पेट्रोलियम रिफाइनरी में हुए ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब में अपनी सेना भेजेगा अमेरिका

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Sep 21 2019 4:00PM | Updated Date: Sep 21 2019 4:00PM
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वाशिंगटन। सऊदी अरब की दो पेट्रोलियम रिफाइनरी में गत शनिवार हुए ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने सऊदी अरब में अपनी सेना भेजने की घोषणा की है। बीबीसी न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के रक्षा मंत्री मार्क इस्पर ने पत्रकारों को बताया कि सऊदी अरब में सेना की तैनाती ‘बचाव’ के लिए की जा रही है। अमेरिका कितने सैनिकों की तैनाती करेगा फिलहाल यह अभी तय नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि यमन के हौसी विद्रोहियों ने सऊदी अरब में हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी लेकिन अमेरिका और सऊदी अरब ने इसके पीछे ईरान का हाथ बताया था। इस बीच शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नये प्रतिबंध लगाए थे। इस्पर ने कहा कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने मदद की गुजारिश की थी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना हवाई और मिसाइल क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगी और दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरण पहुंचाने में तेजी लाएगी।
 
संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ जनरल जोसेफ डुनफोर्ड ने सेना की तैनाती को ‘सीमित’ रखा जाना बताया है। उन्होंने बताया कि वहां हजारों सैनिकों की तैनाती नहीं की जाएगी। उन्होंने हालांकि किस प्रकार की सेना की तैनाती होगी इस बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं दी है। पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या सेना ईरान पर हमला कर सकती है? इस पर रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘अभी हम इस स्थिति में नहीं पहुंचे हैं।’’  सऊदी में हमले के बाद वहां के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ड्रोन और मिसाइल इस बात का सुबूत दे रहे हैं कि इस हमले के पीछे ईरान का हाथ है। प्रवक्ता ने कहा कि हम अभी भी यह पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि ड्रोन को किस जगह से लांच किया गया था।
 
इस बीच अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उनके पास पक्के सुबूत हैं कि यह हमला दक्षिण ईरान से किया गया था। ईरान लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों के खारिज करता आ रहा है। ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने इस हमले को यमन के लोगों द्वारा की गयी बदले की कार्रवाई करार दिया था। ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद दरीफ ने ट्वीट कर कहा, ‘‘अमेरिका अगर सोचता है कि यमन के पीड़ित साढ़े चार-पांच वर्ष बाद भी बदला नहीं लेंगे तो यह उसकी गलत धारणा है।
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