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संसद पर हमले की 16वीं बरसी, PM, सोनिया, मनमोहन सिंह पहुंचे श्रद्धांजलि देने

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Dec 13 2017 12:18PM | Updated Date: Dec 13 2017 12:46PM
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नई दिल्ली। संसद पर 2001 में आज ही के दिन आतंकी हमला हुआ था। इस हमले की 16वीं बरसी पर पूरा देश शहीदों को नमन कर रहा है। इसी कड़ा में संसद में शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पीएम मोदी के अलावा पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत सभी बड़े नेता पहुंचे। वहीं राहुल गांधी से भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद मुस्कुराकर बाते करते नजर आए।

इससे पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी ट्वीट करते हुए हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की है।राजनाथ सिंह ने ट्वीर कर शहीद जवानों को याद किया और उनके साहस को नमन किया, जिन्होंने 13 दिसंबर, 2001 को भारत के लोकतंत्र के मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।

आतं‍कियों ने इसलिए चुना था ये दिन
इस हमले को अंजाम देने के लिए आतंकियों ने सफेद एंबेसडर कार चुनी थी। ऐसा इसलिए था क्‍योंकि इस कार की पहचान करना काफी मुश्किल था क्‍योंकि संसद भवन में इस तरह की कार आमतौर पर देखी जा सकती थीं। आतंकियों की इस कार पर गृह मंत्रालय का एक स्‍टीकर भी लगा था। हालांकि संसद में प्रवेश आसान नहीं होता है और इसमें प्रवेश करने वाले हर व्‍यक्ति और वाहन की पूरी जांच की जाती है।
 
आतंकियों ने हमले के लिए वह समय चुना था जब संसद सत्र चल रहा था और अधिकतर सांसद संसद भवन में मौजूद थे। उस दिन ताबूत घोटाले को लेकर विपक्ष का हंगामा अपने चरम पर था। हंगामे के चलते संसद के दोनों सदनों को 40 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया था। इस बीच पीएम अटल बिहारी बाजपेयी और सोनिया गांधी अपने आवास के लिए निकल चुके थे और बाकी के सांसद कैंटीन में चाय नाश्ते और अपनी चर्चाओं में मशगूल थे। 

हमले के मास्टर माइंड को फांसी
संसद पर हमले की घिनौनी साजिश रचने वाले मुख्य आरोपी अफजल गुरु को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया। संसद के हमले के मास्टर माइंड मोहम्मद अफजल ने एक इंटरव्यू में कबूल किया था कि हमले के पांचों आतंकवादी पाकिस्तानी थे। इनका मकसद राजनेताओं को खत्म करना था। उसने यह भी स्वीकार किया कि उन्‍होंने इन आतंकियों की मदद की थी और वह अफजल गुरु गाजी बाबा के संपर्क में था। खुद अफजल गुरु ने पाकिस्तान में ढ़ाई महीने की आतंकी ट्रेनिंग ली थी।
 
साजिश रचने के आरोप में पहले दिल्ली हाइकोर्ट द्वारा साल 2002 में और फिर उच्चतम न्यायालय द्वारा 2006 में फांसी की सज़ा सुनाई गई थी। उच्चतम न्यायालय द्वारा भी फांसी सुनाए जाने के बाद गुरु ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर की थी, जिसको तत्‍कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दिया था। 
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