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कंबोडिया में बनेगा ‘पांचवा धाम’, लगेगी शिव की 180 फुट ऊंची प्रतिमा

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Nov 23 2019 1:40AM | Updated Date: Nov 23 2019 1:40AM
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नई दिल्ली। दक्षिण पूर्व एशियाई देश कम्बोडिया में ‘पांचवां धाम’’ विकसित किया जा रहा है और वहां भारत के बाहर भगवान शिव की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी जिस पर 500 करोड रुपए की लागत आने की संभावना है। यह स्थान आसियान में सनातन धर्म के प्रचार प्रसार का प्रमुख केन्द्र होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार और कंबोडिया में 1008 अष्टोत्तर सहस्र शिवनाम संघ कंबोडिया के संस्थापक न्यासी डॉ. गुरुजी कुमारन स्वामी ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कंबोडिया में विश्व का सबसे बड़ा मंदिर परिसर अंकोरवाट में है। इसी क्षेत्र में अंकोरवाट से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्याम रीप में 180 फुट ऊंची शिव प्रतिमा एवं 100 एकड़ में भव्य शिवधाम का निर्माण हो रहा है। इस पर करीब 500 करोड़ रुपए से अधिक की लागत आएगी और यह आसियान देशों में सनातन धर्म के प्रसार प्रचार का प्रमुख केन्द्र होगा। 

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के केन्द्र के रूप में कंबोडिया में विकसित हो रहे इस ‘पांचवे धाम’ में भारत के बाहर यह विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा होगी जिसके माध्यम से भगवान शंकर को ब्रह्मांड के सर्वाेच्च अधिपति के रूप में जनमानस में प्रतिष्ठित करने का संकल्प लिया गया है। डा. कुमारन स्वामी ने कहा कि इस स्थान पर भगवान शंकर के अलावा गणेश एवं भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी। इसके माध्यम से भगवान शिव को पूरे ब्रह्मांड में चराचर जगत के ईश्वर के रूप में मान्यता दिलाने का प्रयास किया जाएगा। यह पूछे जाने पर कि इसे पांचवां धाम क्यों बताया जा रहा है, उन्होंने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने चार धामों की स्थापना की थी लेकिन वे भारत में ही हैं। 

उन्हें लगा कि विश्व बंधुत्व का संदेश देने वाले सनातन धर्म का संदेश भारत के बाहर नहीं फैल पा रहा है। इसलिए उन्हें सभी शंकराचार्यों एवं अन्य धर्माचार्यों से भेंट करके परामर्श किया। इसके बाद कंबोडिया में उस पवित्र स्थान के समीप शिवधाम बनाने का संकल्प सिद्ध करने का निर्णय हुआ। उन्होंने कहा कि अंकोरवाट भगवान विष्णु का विश्व में सबसे बड़ा मंदिर है और अब यह शिवधाम भगवान शिव का विश्व का सबसे बड़ा मंदिर होगा। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर यह मंदिर बनाया जा रहा है। उस स्थान पर हजारों लाखों वर्ष पहले निर्मित दस हजार आठ शिवलिंगों का समूह है जिस पर एक प्राकृतिक जलधारा प्रवाहित होती रहती है। यह करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी में फैले हैं। उनका प्रतिष्ठान रुद्राभिषेक का आयोजन करता है। उन्होंने कहा कि भारत के बाहर पहली बार भगवान की इतनी ऊंची प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है। 

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