08 Dec 2019, 23:52:36 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android
news » National

यह जरूरी नहीं कि जज प्रेस के जरिये नागरिकों तक पहुंचे: जस्टिस

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Nov 16 2019 12:57AM | Updated Date: Nov 16 2019 12:58AM
  • facebook
  • twitter
  • googleplus
  • linkedin

नई दिल्ली। करीब 22 माह पहले संवाददाता सम्मेलन के जरिये देश के नागरिकों तक अपनी आवाज पहुंचाने वाले चार न्यायाधीशों में शामिल उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने शुक्रवार को कहा कि यह जरूरी नहीं कि न्यायाधीश प्रेस के जरिये नागरिकों तक पहुंचे। आगामी रविवार को मुख्य न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हो रहे न्यायमूर्ति गोगोई ने मीडियाकर्मियों के अलग-अलग साक्षात्कार का अनुरोध ठुकराते हुए कहा कि कठिन समय में अफवाह और झूठ को रोकने में प्रेस की परिपक्वता और व्यवहार सराहना के काबिल है, लेकिन जरूरी नहीं है कि न्यायाधीश प्रेस के जरिये नागरिकों तक पहुंचे।

गौरतलब है कि न्यायमूर्ति गोगोई खुद उन चार न्यायाधीशों में शामिल थे, जिन्होंने 12 जनवरी 2018 को एक अभूतपूर्व संवाददाता सम्मेलन कर आरोप लगाया था कि उच्चतम न्यायालय में प्रशासन एवं मुकदमों का आवंटन सही तरीके से नहीं हो रहा है। संवाददाता सम्मेलन के जरिये देश के नागरिकों तक अपनी आवाज पहुंचाने वाले तीन अन्य न्यायाधीश - न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

मीडियाकर्मियों को प्रेषित तीन पृष्ठ के पत्र में न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा, ‘‘यह नहीं कहा जा रहा है कि न्यायाधीश न बोलें, वे बोल सकते हैं, लेकिन सिर्फ कामकाजी आवश्यकताओं के लिए। कड़वी सच्चाई अवश्य ही स्मृति में रहनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संस्थागत स्वास्थ्य का परिचय देने वाले मापदंडों में ‘अच्छा प्रेस’ भी शामिल है। इस बारे में मैं यह कहना चाहूंगा कि बहुत हद तक प्रेस मेरे कार्यकाल के दौरान मेरे कार्यालय और हमारी संस्था के प्रति उदार रहा।’’ उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा कि भविष्य में वह उपयुक्त समय देखकर पारस्परिक हितों के मुद्दे पर मीडिया से जरूर बातें करेंगे।

मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित विदाई समारोह में भी कोई संबोधन देने से इन्कार दिया था। उन्होंने इस बारे में एसोसिएशन को पहले ही अवगत करा दिया था कि उनके विदाई समारोह में मंच की कोई व्यवस्था न की जाये। वह विदाई समारोह में सम्मानित होने के बाद वहां से रवाना हो गये। इससे पहले वह दोपहर बाद राजघाट गये और वहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। आज उनका अंतिम कार्यदिवस था और उन्होंने अदालत कक्ष में केवल पांच मिनट बिताये और अपने समक्ष सूचीबद्ध सभी 10 मामलों में एक साथ नोटिस जारी करके शुक्रिया कहते हुए उठकर चले गये थे। वह 17 नवम्बर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

  • facebook
  • twitter
  • googleplus
  • linkedin

More News »