22 Jan 2017, 19:46:05 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

कलाकार- मनोज वाजपेयी, अदिति शर्मा, के.के. मेनन, अनुपम खेर, विजय राज, अनु कपूर, जतिन सरना, विपुल।
निर्देशक- संजीव शर्मा।
 
कहानी
फिल्म 'सात उचक्के' दिल्ली में पूरी तरह फिल्मायी गयी एक और हिंदी फिल्म है। आजकल दिल्ली की तंग गलियों को बड़े पर्दे पर दिखाने का शौक निर्देशकों के बीच देखने को कुछ ज्यादा ही मिल रहा है।
 
 'सात उचक्के' में भी पुरानी दिल्ली के रहने के खास अंदाज को बड़े दिलचस्प ढंग से और नजदीकी से दिखाया गया है। लेकिन फिल्म में द्विअर्थी संवाद और गालियां कुछ ज्यादा ही हैं जिनसे बचा जा सकता था। इन गालियों के चलते फिल्म परिवार के साथ देखने लायक नहीं है। 
 
 फिल्म की कहानी पप्पी (मनोज वाजपेयी) और उसकी प्रेमिका सोना (अदिति शर्मा) के इर्दगिर्द घूमती है। पप्पी अपना सारा कुछ लॉटरी के चक्कर में गंवा चुका है और उसके सिर पर बहुत सारा कर्ज चढ़ा हुआ है जिसको उतारने के लिए वह किसी लूट को अंजाम देना चाहता है। 
 
दूसरी ओर सोना की मां जानती है कि उनकी बेटी पप्पी से प्यार करती है लेकिन वह उसकी शादी इंस्पेक्टर तेजपाल (के.के. मेनन) से करवाना चाहती हैं। दूसरी ओर पप्पी अपने कुछ करीबी दोस्तों की मदद से पास में रहने वाले दीवान साहब (अनुपम खेर) की हवेली में छिपे खजाने पर हाथ मारने की योजना बनाता है।
 
योजना के मुताबिक रात को दीवान साहब की हवेली में छुपे खजाने को हासिल करने के लिए सभी लोग हवेली पहुंचते हैं तभी वहां उनका सामना इंस्पेक्टर तेजपाल से होता है जोकि एक केस की छानबीन के सिलसिले में वहां आया हुआ है।
 
अभिनय के मामले में मनोज वाजपेयी का जवाब नहीं। विजय राज अपने खास अंदाज में की जाने वाली संवाद अदायगी के कारण छा गये। के.के. मेनन और अनुपम खेर भी प्रभावी रहे। 
 
अदिति शर्मा को मौका कम मिला लेकिन उन्होंने अच्छा काम किया है। फिल्म का गीत संगीत प्रभावी नहीं बन पाया है। निर्देशक संजीव शर्मा ने पुरानी दिल्ली में रहने वाले लोगों की कहानी के सभी किरदारों को रचने में मेहनत तो की है लेकिन किरदारों को सही तरह से पेश नहीं कर पाये।
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