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Jio ने कहा सरकार Voda-Idea-Airtel के ब्लैकमेलिंग के आगे ना झुके

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Oct 31 2019 5:50PM | Updated Date: Oct 31 2019 5:50PM
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नई दिल्ली। मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो ने गुरुवार को भारती एयरटेल और वोडा. आइडिया को करदाताओं की कीमत पर किसी प्रकार के बेलआउट पैकेज का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश की आड़ में दोनों कंपनियां ब्लैकमेल कर रही हैं और सरकार को इस मामले में कतई झुकना नहीं चाहिए । कंपनी ने आज प्रसाद को एक पत्र लिखकर मांग की है कि दोनों कंपनियों से उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार ही सरकार इनसे बकाये की वसूली करे । जियो ने भारतीय सेलुलर आपरेटर्स संघ(सीओएआई) के दूरसंचार मंत्री को लिखे पत्र का हवाला देते हुए सीओएआई को एयरटेल और वोडा.आइडिया के हाथों की कठपुतली बताया । जियो ने सीओएआई पर आरोप लगाया कि वह दोनों कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए दूरंसचार उद्योग की झूठी तस्वीर पेश कर रहा है ।
 
गौरतलब है कि सीओएआई ने मंगलवार को दूरसंचार मंत्री को लिखे पत्र में एयरटेल और वोडा.आइडिया को राहत देने का आग्रह किया था । जियो ने दूरसंचार मत्री को लिखे पत्र में कहा है कि वह सीओएआई के इस तर्क से कतई सहमत नहीं है कि यदि सरकार ने दोनों कंपनियों की मदद नहीं की तो देश का दूरसंचार क्षेत्र ध्वस्त हो जायेगा। जियो का आरोप है कि सीओएआई अपनी बात को सही साबित करने के लिए धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल कर रहा है और सरकार को इस तरह की धमियों के आगे झुकना नहीं चाहिए। अंबानी की कंपनी का कहना है कि एयरटेल और वोडा आइडिया वित्त रुप से सक्षम कंपनियां है । दोनों ही कंपनियां देश और कई अन्य देशों में अनेकों लाभदायक कारोबार करती है । देश में भी इन्हीं कंपनियों ने बहुत धनोपार्जन किया है। अब जब उच्चतम न्यायालय ने बकाया भुगतान का आदेश दिया है तो उन्हें उसका पालन करना बकाये का भुगतान करना चाहिए। जियो का सुझाव है कि बकाया भुगतान के लिए दोनों कंपनियां अपने लाभप्रद कारोबारों का कुछ हिस्सा बेचकर सरकारी बकाए को आसानी से चुका सकती हैं।
 
दूरसंचार मंत्री को लिखे पत्र में जियो ने आरोप लगाया है कि दोनों कंपनियां न केवल सरकार के बकाये भुगतान की अदायगी के लिए बहाना ढूंढ रही हैं बल्कि इन्होंने अपने निवेशकों का भरोसा भी तोड़ा है । जियो ने सवाल किया कि जब कंपनियों के एडजस्टेड ग्रास रेवन्यू(एजीआर) के बकाया पर सरकार , नियामक और उच्चतम न्यायालय का रुख मालूम था तो कंपनियों ने इसे चुकाने का अग्रिम प्रावधान क्यों नहीं किया । इसके विपरीत दोनों कंपनियां अपने रुख पर ही अड़ी रहीं और अपने हिसाब से सरकार को भुगतान करती रहीं । वित्तीय हालात खराब होने का दावा करने वाली ये कंपनियां दरअसल अपने ही खराब परिचालन निर्णयों का शिकार हुई हैं । जियो ने सीओएआई और एयरटेल तथा वोडा.आइडिया की खराब वित्तीय हालत को पूरी तरह नकारते हुए आरोप लगाया कि इन कंपनियों ने देश में पैसा तो खूब बनाया किंतु नये निवेश से कन्नी काटती रहीं। यही वजह है कि आज यह कंपनियां पिछड़ी नजर आती हैं । इन कंपनियों के खराब वाणिज्यिक निर्णयों का खामियाजा सरकार को नहीं भुगतना चाहिए।
 
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