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असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में कोर्स वर्क जरूरी नहीं

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Dec 19 2017 12:23PM | Updated Date: Dec 19 2017 12:23PM
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रफी मोहम्मद शेख-

इंदौर। प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में होने वाली मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली 2968 असिस्टेंट प्रोफेसर्स की भर्ती प्रक्रिया में 2009 के पहले रजिस्टर्ड या पीएचडीधारकों के लिए पिछली बार की तरह इस बार कोर्स वर्क की अनिवार्यता नहीं हैं। इससे कई विषयों में पीएचडीधारकों को इससे राहत मिली हैं। अन्यथा लॉ जैसे विषय की 169 रिक्तियां होने के बाद भी कई पीएचडीधारक भर्ती प्रक्रिया के बाद नियुक्ति नहीं ले पाते क्योंकि इनका कोर्स वर्क ही केवल एक बार हुआ हैं। इस बार भी इसके लिए केवल रजिस्ट्रेशन हुए हैं। उधर यूनिवर्सिटी के अधिकारी पहले कोड 28 में केवल इसी कोर्स वर्क के कारण नियुक्तियां नहीं करते रहे हैं। 
 
इस भर्ती प्रक्रिया में 2009 के पहले पीएचडी में रजिस्टर्ड या पीएचडी प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी केवल पांच बिंदुओं को पूरा करने पर ही आवेदन कर सकते हैं। इसमें नियमित पीएचडी होने, कम से कम दो बाह्य परीक्षकों द्वारा मूल्यांकन करने, पीएचडी रिसर्च कार्य के दौरान दो रिसर्च पेपर रिफर्ड जर्नल में प्रकाशित होने, कांफ्रेंस/सेमीनार में दो पेपर प्रस्तुत करने और अभ्यर्थी का मौखिक साक्षात्कार होना जरूरी किया गया हैं।
 
चौथे संशोधन के आधार पर
यह नियम यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन द्वारा यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में शिक्षकों और अन्य एकेडमिक स्टॉफ के लिए जरूरी न्यूनतम अर्हताओं वाले 2009 के नियम में चौथे संशोधन के वक्त जारी की हैं। मध्यप्रदेश शासन ने भी इसी को आधार बनाकर मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को नियुक्तियां करने के लिए कहा हैं। इसमें कही भी छह महीने के कोर्स वर्क की अनिवार्यता नहीं हैं। इससे पहले यह प्रचारित किया जाता रहा है कि नियुक्तियों में कोर्स वर्क अनिवार्य है और इसी कारण पुराने पीएचडीधारकों ने पीएचडी करने के सालों बाद यूनिवर्सिटी के कोर्स वर्क में एडमिशन लेकर इसे पूरा किया हैं।
 
कई को नियुक्तियां नहीं दी
इससे पहले यूनिवर्सिटी और उच्च शिक्षा विभाग कॉलेजों में कोड 28 में नियुक्त होने वाले स्टॉफ के लिए कोर्स वर्क अनिवार्य बताती थी। इसी कारण कई अभ्यर्थियों की नियुक्तियां सभी अर्हताएं पूरी होने के बाद भी रोक दी गई थी। इसके बाद पांच बिंदुओं का सर्टिफिकेट भी अनिवार्य किया गया हैं। अब लोक सेवा आयोग द्वारा गवर्नमेंट कॉलेजों में छह महीने के कोर्स वर्क की अनिवार्यता को समाप्त करने के बाद इन अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली थी। पिछले साल से इन भर्तियों की सुगबुगाहट के बाद से ही इनमें से अधिकांश अभ्यर्थियों ने कोर्स वर्क कर लिया था और कई अभी भी इन कोर्सेस में रजिस्टर्ड हुए हैं।
 
पिछली बार अनिवार्य था
पिछली बार एमपीपीएससी ने जब असिस्टेंट प्रोफेसर्स की भर्तियों जारी की थी तो अभ्यर्थियों के लिए कोर्स वर्क अनिवार्य किया था। इसमें केवल यह राहत दी गई थी कि अभ्यर्थी सालभर के भीतर यह कोर्स वर्क कर लें, अन्यथा उसकी नियुक्ति निरस्त कर दी जाएगी। उस समय यूजीसी का चौथा संशोधन नहीं आया था। जब 2009 के पूर्व पीएचडी में रजिस्टर्ड या पीएचडी प्राप्त अभ्यर्थियों ने यूजीसी से इस संबंध में मांग की तो उन्होंने कोर्स वर्क की अनिवार्यता खत्म कर दी। वास्तव में कोर्स वर्क में पीएचडी करने का प्रशिक्षण दिया जाता है और पीएचडी होने के बाद कोर्स वर्क करना एक तरीके से बेकार ही हैं।
 
...तो रह जाते कई अभ्यर्थी
नए साल में होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर्स की भर्तियों में लॉ सहित कई विषय ऐसे हैं, जिनमें सालों से कोर्स वर्क नहीं हुआ हैं। सैन्य विज्ञान से लेकर ज्योतिष-संस्कृत जैसे कई विषय ऐसे हैं जिनमें कोर्स वर्क हुआ ही नहीं है। लॉ के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर्स में 169 पद निकाले गए हैं। इसमें 29 पद बैकलॉग यानी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है। जबकि प्रमोशन या रिटायर्ड प्रोफेसर्स के खाली पदों से 82 और 58 पद नवीन सृजित पद हैं। वही अन्य विषयों में भी कई पद हैं। इस प्रकार अगर कोर्स वर्क अनिवार्य होता तो यह आवेदन ही नहीं कर पातें।
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