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यूनिवर्सिटी में 20 करोड़ के काम की कमान अब निजी हाथों में

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Nov 14 2017 12:43PM | Updated Date: Nov 14 2017 12:43PM
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- रफी मोहम्मद शेख 

इंदौर। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में होने वाले निर्माण की कमान अब प्राइवेट इंजीनियर के हाथों में होगी। सालभर में करोड़ों के निर्माण पर नजर रखने के लिए कोई स्पेशलाइज्ड इंजीनियर नहीं होने से यूनिवर्सिटी ने यह निर्णय लिया है। वर्तमान में ही करीब 20 करोड़ रुपए के टेंडर के काम चल रहे हैं। अभी जो असिस्टेंट इंजीनियर यूनिवर्सिटी में तैनात है, वो पीडब्ल्यूडी विभाग से प्रतिनियुक्ति पर आए हैं। पिछले दिनों लगातार इस संबंध में आ रही शिकायतों के चलते यह नियुक्ति की गई है। गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी के मुख्य परिसर से लेकर टीचिंग डिपार्टमेंट तक में सालभर निर्माण चलते रहते हैं। 
 
कहने को तो यूनिवर्सिटी का यांत्रिकी डिपार्टमेंट अलग है, मगर इसमें पांजरे के अतिरिक्त एक ड्रॉफ्टमैन प्रदीप व्यास और दो अन्य स्टॉफ कार्यरत हैं, जो यूनिवर्सिटी की ओर से नियुक्त है। इनके द्वारा पूरे निर्माण की प्लानिंग से लेकर मॉनिटरिंग तक का काम करता है। कई दिनों से डिपार्टमेंट से लेकर अन्य तक की शिकायतें आ रही थी कि काम सही तरीके से नहीं हो रहे हैं और न ही मॉनिटरिंग हो रही है। यह शिकायत यूनिवर्सिटी के कार्यपरिषद सदस्यों तक भी पहुंची। जब उन्होंने इस बारे में तलाश किया कि मालूम हुआ कि वर्तमान असिस्टेंट इंजीनियर के पास बहुत ज्यादा भार है और वो प्लानिंग का काम नहीं कर पाते हैं।
 
कार्यपरिषद की बैठक में पारित
कार्यपरिषद की पिछली बैठक में यह मुद्दा उठा और सदस्यों ने प्राइवेट इंजीनियरिंग को नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा, जो पास हो गया। उसके बाद यूनिवर्सिटी ने नियुक्ति भी कर दी है। यह इंजीनियर कंसल्टेंट के रूप में काम करेगा और साढ़े तीन लाख रुपए साल का वेतन दिया जाएगा। यह कंसल्टेंट इस टीम को लीड करेगा। वह यूनिवर्सिटी में होने वाले प्रत्येक काम की प्री-प्लानिंग करेगा। उसके साथ ही जो काम चल रहे हैं, उन पर भी अपनी नजर रखेगा। 
 
प्रश्न भी उठाए जा रहे
वर्तमान में यूनिवर्सिटी को राष्ट्रीय शिक्षा उन्नयन अभियान (रूसा) के तहत करोड़ों की ग्रांट हर साल मिल रही है। इसके काम भी चल रहे हैं। वहीं यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन द्वारा भी डिपार्टमेंट को विभिन्न कार्यों के लिए करोड़ों की ग्रांट मिलती है। राज्य शासन भी समय-समय पर विभिन्न योजनाओं में अलग से ग्रांट देता है, तो यूनिवर्सिटी जरूरत के अनुसार खुद कई निर्माण कार्य कराती है। इस प्रकार यहां पर काम इतने ज्यादा है कि स्पेशलाइजेशन की जरूरत है। हालांकि इस बात पर प्रश्न भी उठाए जा रहे हैं कि यूनिवर्सिटी राज्य शासन का अंग है और यहां पर प्राइवेट इंजीनियर की सेवाएं कैसे ली जा रही है। जरूरत होती तो सरकार के डिपार्टमेंट से इंजीनियर लिया जा सकता था। इस पर अफसरों का स्पष्टीकरण है कि वो केवल कंसल्टेंट का काम करेगा।
 
इन कामों पर नजर रखेगा
यूनिवर्सिटी में करोड़ों के काम हो रहे हैं। इसके लिए स्पेशलाइज्ड इंजीनियर की जरूरत थी। यूनिवर्सिटी ने कंसल्टेंट के रूप में इसकी नियुक्ति की है, जो इन कामों पर नजर रखेगा।
- अजय वर्मा, प्रभारी रजिस्ट्रार - देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी
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