12 Dec 2017, 23:20:19 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android
news » Exclusive news

बैंकिंग लोकपाल की तर्ज पर जीएसटी लोकपाल की तैयारी

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Sep 18 2017 5:13PM | Updated Date: Sep 18 2017 5:14PM
  • facebook
  • twitter
  • googleplus
  • linkedin

- पंकज भारती

इंदौर। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद से देश में व्यापारियों को हो रही समस्याएं और टैक्स मामलों में बढ़ते विवाद को देखते हुए सरकार एक बेहतर कदम उठाने की तैयारी कर रही है। जल्द ही देश में बैंकिंग लोकपाल की तर्ज पर जीएसटी लोकपाल का गठन किया जा सकता है। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल  इंडिया ट्रेडर्स (कैट) को ऐसे संकेत दिए हैं। कैट प्रतिनिधियों का कहना है कंपनियों और सरकार के कर संबंधी विवाद के निपटारे के लिए जीएसटी लोकपाल बनाने की मांग वित्त मंत्रालय से की थी। जीएसटी लोकपाल सरकार और कंपनियों के साथ ही कंपनियों और व्यापारियों के कर विवादों को सुलझाने का काम करेगा। इस संबंध में कैट को वित्त मंत्रालय से सकारात्मक संकेत प्राप्त हुए हैं। जीएसटी लोकपाल को लेकर कैट द्वारा सूरत में 18 और 19 सितंबर को बड़ा आयोजन किया जा रहा है। इसमें औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। गौरतलब है, कैट देश के व्यापारिक समुदाय का एकमात्र सर्वोच्च संगठन है, जिसके साथ 40 हजार से ज्यादा व्यापारिक संगठन जुड़े हैं और जो छह करोड़ से अधिक छोटे व्यवसायियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

किसी ने नहीं की सीधी चर्चा

जीएसटी से फैले असंतोष एवं असमंजस के संबंध में कैट का कहना है जीएसटी क्रियान्वयन के 75 दिन व्यापारियों के लिए बुरे सपने के रूप में उभरे हैं। व्यापारियों में जीएसटी को लेकर तरह-तरह की शंकाओं ने जन्म लिया है। इसके बावजूद व्यापारी जीएसटी के तहत अलग-अलग प्रक्रियाओं को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्र, राज्य सरकारों और यहां तक कि जीएसटी काउंसिल ने भी आज तक व्यापारिक संगठनों से सीधी चर्चा नहीं की, इससे स्थिति जटिल हो गई।

भ्रम की स्थिति

अलग-अलग टैक्स स्लैब के तहत वस्तुओं का तर्कहीन वर्गीकरण, जटिल रिवर्स चार्ज मैकनिज्म की शुरुआत, जीएसटी कानून के साथ अन्य कानूनों की ओवरलैपिंग और कानून प्रक्रिया के प्रावधानों से संबंधित अस्पष्टता ने भ्रम की स्थिति पैदा की है। वहीं, ऐसे व्यापारी जिन्होंने अभी तक कम्प्यूटर इस्तेमाल नहीं किया है, उन्हें कम्प्यूटर प्रणाली से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकारों ने ध्यान नहीं दिया और न कोई सुविधा दी। कैट के अनुसार देश में लगभग 60 फीसदी और मप्र में भी 60 फीसदी छोटे व्यवसायियों ने अब तक कम्प्यूटर नहीं अपनाया है। जीएसटी के आधारभूत सिद्धांतों और प्रोसेस के बारे में व्यापारियों-ग्राहकों दोनों को जागरूक करने के लिए कोई अभियान शुरू नहीं किया गया था।

कानूनी विवाद बढ़ने की आशंका

अर्थशास्त्रियों का कहना है, भारत के अप्रत्यक्ष कर ढांचे में हुए बदलाव को लेकर बनी अनिश्चितता से कोई संकेत मिलता है तो वह यही कि आगामी समय में जीएसटी को लेकर कई कानूनी मामले दाखिल हो सकते हैं। इस नई कर प्रणाली को लागू करने के पहले दी गई कम समय सीमा और जटिलताओं के चलते कई तरह के कानूनी विवाद खड़े हो सकते हैं। ऐसा होने पर पहले से लंबित 2.4 करोड़ मुकदमों के भारी बोझ तले दबी भारतीय न्यायिक व्यवस्था पर दबाव और बढ़ जाएगा। इस कारण जीएसटी ओम्बुड्समैन की तैयारी की जा रही है।

क्या है बैंकिंग लोकपाल

देश में सरकारी या प्राइवेट किसी भी बैंक से यदि ग्राहक को कोई समस्या है तो वह अपनी शिकायत बैंकिंग लोकपाल को कर सकता है। इनमें बैंक एसएमएस चार्ज के रूप में खाते से पैसे काट रहा है या एटीएम से ट्रांजेक्शन में कोई परेशानी हो तो सभी तरह की शिकायत बैंकिंग लोकपाल से की जा सकती है। वह ग्राहक की समस्या का समाधान करेगा। बैंक की गलती हुई तो उस पर जुर्माना भी लग सकता है।

सकारात्मक संकेत मिले

हमने सरकार से बैंकिंग लोकपाल की तर्ज पर जीएसटी लोकपाल गठित करने की मांग की है। इस संबंध में वित्त मंत्रालय से सकारात्मक संकेत मिले हैं।

-प्रवीण खंडेलवाल राष्ट्रीय महामंत्री, 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)

 

उम्मीदों पर पानी फेरा

जीएसटीएन पोर्टल के निराशाजनक प्रदर्शन और जीएसटी के पहले और बाद में व्यापारियों के प्रति राज्य सरकारों के उदासीन रवैये ने सरलीकृत, तर्कसंगत कर प्रणाली की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेरा है।

-बीसी भरतीया, राष्ट्रीय अध्यक्ष, कैट 

  • facebook
  • twitter
  • googleplus
  • linkedin

More News »