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अंशदाता के लिए पीएफ के ‘होम’ की राह आसान नहीं

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Apr 28 2017 10:18AM | Updated Date: Apr 28 2017 10:18AM
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रफी मोहम्मद शेख -

इंदौर। एम्पलाई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन द्वारा पीएफ सदस्यों के लिए घर उपलब्ध करवाने की योजना भले ही एक मई से लागू कर दी जाएगी, किंतु इसकी घोषणा से उन करोड़ों सदस्यों को निराशा ही हाथ लगी है, जो सीधे इसका लाभ मिलने की उम्मीद कर रहे थे। ईपीएफओ ने इसके लिए कम से कम 10 लोगों की सोसायटी बनाकर मकान या प्लॉट पर लोन देने की पेशकश की है। इससे सीधे सदस्यों को लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि संस्थानों में काम करने वाले एक हो तभी फायदा मिलेगा। उधर, इस योजना से कॉलोनाइजर्स को कारोबार होने की नई उम्मीद जागी है। दबंग दुनिया ने 13 अक्टूबर 2016 को खबर प्रकाशित कर इस योजना का खुलासा किया था।
 
ईपीएफओ की नई योजना के अनुसार किसी भी सदस्य को मकान या प्लॉट के लिए सीधे लोन नहीं दिया जाएगा, बल्कि सदस्यों को सोसायटी का गठन करना होगा, जिसके पंजीयन की प्रक्रिया को अपनाना होगा। वर्तमान में सोसायटीज में घपलों के चलते संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी ऐसी प्रक्रिया से परहेज करते हैं, जो लंबी होती है। इसका पंजीयन फर्म व पंजीयन सोसायटी में करवाना होता है और प्रति वर्ष इसका हिसाब-किताब भी देना होता है।
 
यहां पर बड़ा प्रश्न यह भी उठ रहा है कि पीएफ सदस्य को पहले अपने साथ 10 लोगों को एकत्रित कर एकमत करना होगा, उसके बाद ही संस्था पंजीकृत हो पाएगी। इसमें यह समस्या भी है कि इन सभी सदस्यों को एक ही बिल्डर या कॉलोनी में प्लॉट, फ्लैट या मकान खरीदना होगा। यह मामला भी टेढ़ा ही है, क्योंकि सभी एक ही कॉलोनी में मकान खरीदने के लिए एकमत हो यह जरूरी नहीं है। इसमें अधिकांश एक ही संस्थान में कार्यरत व्यक्ति ही लाभ ले पाएंगे। प्रदेश में 40 लाख से ज्यादा पीएफ सदस्य है, जबकि संस्थानों की संख्या 40 हजार से ज्यादा है।

जोखिम लेना नहीं चाहता
पीएफ ने जब इस योजना का खाका तैयार किया था, तो सभी सदस्यों के लिए मकान की टैगलाइन पर काम शुरू किया था, किंतु यह मूर्त रूप में आते-आते संस्था में बदल गया, जिससे प्रत्येक सदस्य बाहर ही है। जानकारी के अनुसार पीएफ इसमें किसी भी प्रकार का जोखिम लेना नहीं चाहता है। किसी भी समस्या की स्थिति में व्यक्तिगत सदस्य से ज्यादा संस्था पर सीधे कार्रवाई हो सकती है। मकान या फ्लैट नहीं क्रय होने की स्थिति में इनसे वापसी भी ज्यादा आसानी से हो सकती है, क्योंकि संस्था के अकाउंट में यह रुपया किया जाएगा। 

रियल एस्टेट उठा सकता है लाभ
इस योजना से बिल्डर लॉबी को आशा की नई किरण दिखाई दे रही है। वास्तव में वो पीएफ का अंशदान देने वाले सदस्यों को एकत्रित कर अपनी कॉलोनी या बिल्डिंग में मकान देने का काम कर सकते हैं। नोटबंदी के बाद एक साथ बड़ी रकम बैंक या नकद के रूप में नहीं दे पाने के कारण सबसे ज्यादा असर रियल एस्टेट पर पड़ा है। अब सरकारी योजना से उनको आसानी होगी, क्योंकि पूरा रुपया एक नंबर का होगा। हालांकि खुद ईपीएफओ योजना से सदस्यों को मकान सस्ते में मिलने की उम्मीद कर रहा है। पहले डिपार्टमेंट खुद मकान बनाकर देने का भी प्लॉन भी कर रहा था, जो नहीं हो पाया।
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