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न्याय नगर एक्सटेंशन का नहीं होगा नियमितीकरण

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jan 8 2017 10:39AM | Updated Date: Jan 8 2017 10:39AM
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तेज कुमार सेन इंदौर। आईडीए को खजराना क्षेत्र में बने न्याय नगर एक्सटेंशन मामले में हाई कोर्ट से बड़ी जीत हासिल हुई है। डिविजन बेंच ने आईडीए की अपील स्वीकारते हुए सिंगल बेंच के उस निर्णय को निरस्त कर दिया, जिसमें उक्त कॉलोनी को नियमित किए जाने संबंधी आदेश दिए गए थे।

जस्टिस पीके जायसवाल और जस्टिस वीरेंदर सिंह की डिविजन बेंच ने आईडीए की उक्त रिट अपील स्वीकार कर यह फैसला दिया है। इसमें आईडीए की ओर से सीनियर एडवोकेट एएस कुटुंबले व सुदर्शन जोशी ने तर्क रखे। खजराना क्षेत्र में न्याय विभाग कर्मचारी हाउसिंग सोसायटी की करीब 41.76 एकड़ जमीन पर न्याय नगर एक्सटेंशन कालोनी बनाई
गई थी।

स्कीम लाने की दी थी स्वतंत्रता

पूर्व में आईडीए ने यहां 14 मई 1993 को स्कीम-132 घोषित की थी जो कोर्ट के आदेश से 14 अगस्त 2007 को निरस्त कर दी गई थी, लेकिन आईडीए को यह स्वतंत्रता दी गई थी कि वह नियमानुसार यहां नई स्कीम ला सकता है। इसके चलते 4 मई 2012 को आईडीए यहां पर स्कीम-171 लाया था। इसी बीच जब 2007 में स्कीम-132 निरस्त हो गई थी उसके बाद सन् 2009 में सोसायटी की ओर से एक याचिका
हाई कोर्ट में लगाई गई थी।

नियमितीकरण की लगाई थी गुहार
इस याचिका में इस जमीन पर बनाए गए न्याय नगर एक्सटेंशन को नियमित करने की अनुमति देने की गुहार की गई थी। इसमें कहा था कि आईडीए की स्कीम-132 निरस्त की जा चुकी है और शासन का अवैध कॉलोनियों को नियमितीकरण करने का जो नया नियम आया है, उसके अनुसार सोसायटी की इस कॉलोनी को भी नियमित किए जाने की पात्रता है। यहां न केवल दस प्रतिशत मकान बन चुके हैं, बल्कि सोसायटी सदस्य विकास व बिजली शुल्क भी काफी पहले जमा कर चुके हैं।

2013 में सोसायटी के पक्ष में फैसला

इस मामले में तत्कालीन जस्टिस एनके मोदी की सिंगल बेंच ने 14 नवंबर 2013 को सोसायटी के पक्ष में निर्णय दिया था। इस निर्णय के साथ याचिका निराकृत की थी कि सोसायटी द्वारा 28 मार्च 2000 को कॉलोनी को नियमित किए जाने संबंधी जो आवेदन दिया है उस पर शासन व आईडीए तीन माह में रुल्स 1998 के अनुसार नियमानुसार निर्णय करे।

आईडीए ने दी चुनौती
इस निर्णय के विरुद्ध आईडीए द्वारा रिट अपील दायर की गई। यह अपील सिंगल बेंच द्वारा सुनाए गए फैसले के बाद तय समय से 57 दिन बाद दायर की थी। इसके तर्क में कहा गया कि सिंगल बेंच का आदेश त्रुटिपूर्ण है। उक्त सोसायटी को नियमितीकरण की अनुमति नहीं दी जा सकती। आईडीए के अलावा नगर निगम व टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा भी इसे नियमित किए जाने के संबंध में कभी सहमति नहीं दी गई। इन तर्कों के आधार पर डिविजन बेंच ने रिट अपील स्वीकार करते हुए सिंगल बेंच के निर्णय को निरस्त कर दिया।

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