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‘इंडियन कारपेट एक्सपो’ में 400 करोड़ के कारोबार की उम्मीद

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Oct 11 2019 1:30AM | Updated Date: Oct 11 2019 1:31AM
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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शुक्रवार से शुरू होने वाले 38वें ‘इंडियन कारपेट एक्सपो’ में 400 करोड़ रूपये के कारोबार की संभावना है। चार दिवसीय मेले में अमेरिका और चीन समेत दुनिया भर की 400 खरीददार कंपनियां शामिल होंगी। आयोजन संस्था कारपेट एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल (सीईपीसी) के चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह ने गुरुवार को पत्रकारों को बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में 11 से 14 अक्टूबर तक आयोजित मेले में दुनिया भर के 50 देशों के करीब 400 खरीददार कंपनियों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। वाराणसी में 15वीं बार ‘इंडियन कारपेट एक्सपो’ का आयोजन किया जाएगा।
 
गत तीन वर्षों से कारोबारी मंदी झेलते आ रहे व्यवसायियों को आर्थिक मंदी के बावजूद पिछले वर्षों के मुकाबले बेहतर कारोबार की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि गत तीन वर्षों में कारपेट कारोबार अच्छा नहीं हुआ लेकिन इस बार विश्वव्यापी आर्थिक मंदी के बावजूद दुनिया के कारोबारियों की रूचि के कारण उन्हें 300-400 करोड़ रुपये से अधिक के खरीदारी के लिए विदेशी कंपनियों से करार होने की उम्मीद है। सिंह ने बताया कि मेले में सबसे अधिक अमेरिका से 57 और चीन 36 कंपनियों के व्यापारियों के आने की संभावना है।
 
अमेरिका और चीन के अलावा रूस, जर्मनी, जापान, साऊदी अरब, इटली, कनाडा, फ्रांस, डेनमार्क, कोलंबिया, इजिप्ट, हांगकांग, इरान, इजराइन, कजाकिस्तान, कोरिया, कुवैत, लेबनान, मलेशिया, मॉरिस,  मैक्सिको, नेपाल, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, स्पेन, ताइवान, आयरलैंड, तुर्की, ब्रिटेन, वियतनाम, उक्रेन समेत 50 देशों की करीब 400 कंपनियों के प्रतिनिधियों ने मेले में आने की पुष्टि कर दी है। आयोजनकर्ता के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिकूल आर्थिक माहौल के बीच कुछ लोग साजिश के तहत विदेश में भारतीय कारपेट उत्पाद को बदनाम कर रहे हैं।
 
सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करने के साथ ही कारपेट उद्योग को कुछ अतिरिक्त मदद करे तो इस क्षेत्र में उद्योग की संभवना काफी बढ़ जाएगी। फिलहाल करीब 20 लाख लोग इस उद्योग से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। सरकार और कुछ अतिरिक्त मदद करे तो रोजगार पाने वालों की संख्या 35 लाख तक पहुंच सकती है। उन्होंने बताया कि भारत निर्मित कारपेट का सबसे बड़ा खरीदार यूरोप में सामान्य तौर पर 40-45 फीसदी कारोबार होते थे जो घटकर 20-22 फीसदी रह गया है। इसी तरह से ब्राजील समेत कई देशों में उनके कारोबार प्रभावित हो हुए हैं जिससे व्यवसाय करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 
 
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