25 Apr 2017, 02:31:45 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us app facebook twitter android

न्यूयॉर्क। सड़क पर गाड़ियों की टक्कर न हो इसके लिए हमें ड्रायवर की आंखों पर निर्भर रहना पड़ता है। सड़क पर दुर्घटनाओं में कमी के लिए ऑटो कंपनियां और सरकारें टेक्नोलॉजी पर कई सालों से रिसर्च कर रही है।

 
सब कुछ ठीक रहा तो चार साल में कारें वाहनों के वायरलेस नेटवर्क पर आपस में कम्युनिकेट करने लगेगी। इससे न सिर्फ दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्की सफर भी आरामदेह और सुविधाजनक हो जाएगा। 
 
अमेरिका की ऑटो सेफ्टी एजेंसी नेशनल हाई-वे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेश (एनएचटीएसए) ने एक नियम का प्रस्ताव किया है। इसके तहत बाजार में आने वाली सभी नई कारों में एक समान टेक्नोलॉजी लगाने की जरूरत होगी। 
 
यदि इसे हरी झंडी मिल जाती है तो अगले चार साल में यह टेक्नोलॉजी वहां की सभी नई कारों में होगी। ऑटो इंडस्ट्री में यह टेक्नोलॉजी 'वी2वी' के नाम से जानी जाती है। बेहतर, जल्द रिस्पॉन्स के और कैमरे-राडार पर भरोसा और पुख्ता करने के लिए इसमें ऑटोमेटेड ड्रायविंग टेक्नोलॉजी जोड़ी जा सकती है। 
 
एनएचटीएसए के मुताबिक, ऑटो कंपनियों को कई नई कारों में इस टेक्नोंलॉजी को लगाना अनिवार्य होगा। ग्राहक कानूनी तौर पर इसे बंद नहीं कर पाएंगे। हालांकि ड्रायवर के पास ऑटोमेटेड रिस्पॉन्स बंद करने का विकल्प होगा। 
 
एजेंसी का मानना है कि, वाहनों के बीच होने वाले डाटा के आदम-प्रदान में गाड़ी की पहचान नहीं हो पाएगी। इसलिए प्रायवेंसी से कोई समझौता भी नहीं होगा। 
 
वी2वी नेटवर्क हैकरों से सुरक्षित रखने के लिए एजेंसी ने सुरक्षा गाइडलाइन का भी प्रस्ताव किया है। एनएचटीएसए का मानना है कि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से दुर्घटनाओं में खासी कमी आ सकती है। 
 
ऐसे काम करेंगी टेक्नोलॉजी 
कार के ब्रेक से जुड़ा एप्लिकेशन आस-पास की अन्य कारों को इलेक्ट्रानिक सिग्नल भेजेगा। फिर कारें अपने ड्रायवर को आगाह कर देगी कि आगे चल रही कार रुकने वाली है। इसी तरह, ड्रायवर कार अचानक मोड़ न लें, इसके लिए भी एप्लिकेशन चेतावनी देगा। 
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