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Astrology

रामनवमी पर ऐसे करें पूजा-अर्चना, पूरे होंगे आपके हर काम

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Apr 5 2017 11:00AM | Updated Date: Apr 5 2017 11:00AM
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देशभर में नौ दिनों तक चले नवरात्र महोत्सव का 5 अप्रैल को समापन हो जाएगा। इस दिन को रामनवमी के नाम से जाना जाता है। इसी दिन सभी भक्त कन्या पूजन करके अपने व्रत को खोलेंगे। बसंत ऋतु में आने वाले इस त्योहार को भगवान राम के जन्मदिन के तौर पर देशभर में मनाया जाता है। यह हिंदुओं के वैष्णव पंथ को मानने वाले लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण त्योहार होता है। हिंदुओं में विष्णु को भगवान का सातवां अवतार माना जाता है। नवरात्री चैत्र मास की शुक्ल पक्ष में आती है। इस दिन राम की कथा पढ़ी और सुनाई जाती है। इस साल राम नवमी का शुभ समय सुबह 10.3 मिनट से शुरू हो जाएगा।
 
ऐसा माना जाता है कि भगवान राम का जन्म मध्यान्ह काल में व्याप्त नवमी तिथि को पुष्य नक्षत्र में हुआ था। महाभारत वनपर्व के अनुसार पुनर्वसु नक्षत्र में राम का जन्म होना लिखा है। इस साल चार अप्रैल को सूर्योदय काल से रात्रि के 11:12 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा। मंगलवार को पुनर्वसु नक्षत्र के आने से बना स्थिर योग कार्यसिद्धि प्रदायक माना जाता है। इसी वजह से इस दिन खुद सिद्ध मुर्हुत में शुभ मंगल कार्य करना अति श्रेष्ठ फलदायी और सिद्धि प्राप्त कराने वाला है। व्यावसायिक कामों की शुरुआत के लिए यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है।
 
रामनवमी के दिन बहुत से लोग राम जन्म भूमि अयोध्या जाते हैं और ब्रह्म मुहूर्त में सरयू नदी में स्नान करने के बाद भगवान राम के मंदिर जाकर भक्तिभाव से पूजा-पाठ करते हैं। इस दिन जगह-जगह रामायण का पाठ करवाया जाता है। कई स्थानों में राम, सीता, लक्ष्मण और हुमान की झाकियां या पालकी निकाली जाती है। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।
पूजा विधि- प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त होकर सबसे पहले राम दरबार की पूजा में भगवान श्री राम का पूजन, आह्वान और आरती करें। इसके बाद पुष्पांजलि अर्पित करके क्षमा प्रार्थना करे। आखिर में इस मंत्र का जाप करते हुए समर्पण करें। कृतेनानेन पूजनेन श्री सीतारामाय समर्पयामि। वहीं नारद पुराण के अनुसार राम नवमी के दिन सभी भक्तों को उपवास करने का सुझाव दिया गया है। भगवा राम की पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए। उसके बाद उन्हें गाय, जमीन, कपड़े और दक्षिणा देकर दोनों हाथ जोड़कर विदा करना चाहिए। जिसके बाद ही राम की पूजा खत्म होती है।
 
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