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गुनाह नहीं है बढ़ती आबादी पर चिंता

By Dabangdunia News Service | Publish Date: Jan 10 2017 10:51AM | Updated Date: Jan 10 2017 10:51AM
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-रमेश ठाकुर
वरिष्ठ पत्रकार


बढ़ती जनसंख्या पर अगर बात करना गुनाह है तो सरकारी नारा ‘हम दो हमारे दो’ का क्या मतलब? यह पंचलाइन कम बच्चे पैदा करने के लिए ही लिखी गई है। भाजपा सांसद साक्षी महाराज के बढ़ती जनसंख्या वाले बयान को सियासी रंग से पोत दिया गया है। इस समय चुनावी बादल छाए हुए इसलिए उनके बयान को कुछ तथाकथित लोग तूल देने में लगे हैं। अगर देखा जाए तो उनका बयान पूरी तरह से सामाजिक और व्यावहारिक है। जनसंख्या कम हो इस बात की वकालत सभी धर्म के लोग कर रहे हैं, पर कुछ लोगों ने उनके बयान की आड़ में सियासत करने का मौका ढूंढ लिया है। हम दो हमारे दो ये पंचलाइन बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए सरकार द्वारा जारी अभियान है। इसका मलतब साफ है अगर सुखी रहना है तो कम बच्चे पैदा करना होगा, लेकिन समय के साथ इस पंचलाइन का अर्थ धूमिल हो गया।

कुछ लोगों ने अपनाया, कुछ ने इसका उपहास उड़ाया। बच्चे कम या ज्यादा पैदा करने की बात जब भी कोई करता है तो उसे हिंदू-मुस्लिम मुद्दा बना दिया जाता है। पर, असल सच्चाई पर कोई ध्यान नहीं देता। दरअसल आजादी के बाद से अब तक बढ़ती जनसंख्या को हमेशा से एक बोझ की तरह माना जाता रहा है। विकास और तरक्की की राह में यही समस्या सबसे बड़ी रोड़ा रही है। सही मायनों में इसे एक संसाधन के रूप में मानकर इसका सदुपयोग किया जाय तो यह कल्याणकारी हो सकता है। जनसंख्या को लेकर एक बार फिर से मुद्दे को हवा दे दी गई है। ताजा मुद्दा भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. साक्षी महाराज के बीबी-बच्चों वाले बयान पर खड़ा हो गया है।

स़ाक्षी महाराज इससे पहले कुछ और विवादास्पद बयानों के लिए चर्चा में रहे हैं। लेकिन इस मुद्दे को जानबूझकर हवा दी जा रही है। महाराज के बयान को सामंतवादी सोच वाले लोगों द्वारा विवादित कहकर केवल इसलिए बवाल मचाया जा रहा है कि वह सामाजिक रूप से पिछड़े समुदाय से है व गोरे रंग के प्रति भारतीयों में जो कॉम्प्लेक्स है उससे संबंधित नहीं है। सभी जानते हैं कि इस समय जनसंख्या विस्फोट आज के समय में देश की सबसे बड़ी समस्या बनकर खड़ी है। यूं कहे कि तथाकथित विकास की बेमानी है।

बयानों पर गौर न करें तो एक समय ऐसा आएगा जब इस समस्या को रोकने को लेकर प्रत्यक्ष कानून बनाना पड़ेगा, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण पर कानून की दरकार आज भी महसूस की जा रही है। हर समुदाय इस बात की वकालत करता है कि किसी भी तरह से जनसंख्या को नियंत्रित किया जाए। इस मसले को तूल देना उचित नहीं होगा। जनसंख्या को लेकर साक्षी महाराज ने अपनी निजी वैचारिक सोच को प्रदर्शित किया है। साक्षी महाराज के बयान को अगर ठीक से सुने तो उन्होंने मुसलमानों के साथ-साथ हिंदुओं को भी सचेत किया है। ज्यादा बच्चे पैदा करने पर मुसलमान भी परेशान हैं। इस मुद्दे पर अब उनकी सोच पहले से बदली है। उन्होंने समानांतर बात कही है। कुल मिलाकर साक्षी महाराज को उनके इस बयान को लेकर बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उनके भाषण को जिस तरह से प्रस्तुत किया जा रहा है उससे लगता है मानो उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ खुलकर कुछ बोला है एवं लोगों से वोट देने के संदर्भ में बात की हो। उन्होंने देश की असल समस्या पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि आबादी तेजी से बढ़ रही है जो कि महिलाओं पर जुल्म है। 

मुद्दा चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। मुकदमा भी दर्ज हो गया है। इस वक्त चुनावी बादल छाए हुए हैं इसलिए अब हर मुद्दे को सियासी बनाने का माहौल भी हो रहा है। सांसद साक्षी महाराज के इस बयान की चुनाव आयोग में भी शिकायत की गई है। चुनाव आयोग में शिकायत करने का कोई तुक इसलिए नहीं बनता, क्योंकि उन्होंने किसी चुनावी सभी में यह बयान नहीं दिया है। जहां बयान दिया है वह चुनावी सभा नहीं थी। उत्तरप्रदेश के मेरठ में संत समागन का कार्यक्रम था, जिसमें महाराज भी शामिल हुए थे।

साक्षी महाराज ने कहा था कि आबादी बढ़ाने के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्ती दिखानी चाहिए। जनसंख्या पर काबू करने के लिए सख्त कानून बनाने की भी उन्होंने वकालत की। साथ ही यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सभी सियासी दलों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में निर्णय लेना होगा। एकजुटता के साथ इस समस्या से लड़ना चाहिए। पर, कुछ लोगों ने उनके इस बयान को सियासी रंग दे दिया। लोगों ने उनके पूर्व के विवादित बयानों से जोड़ दिया।

व्यावहारिक रूप से अगर उनके बयान का आंकलन करें तो किसी तरह से चुनाव के लिए मजहब के इस्तेमाल का मामला नहीं दिखाई पड़ता , जिससे यह कहा जाए कि इस बयान से भाजपा को आगामी चुनाव में फायदा होगा। जागरुक मुसलमान एवं खासकर मुस्लिम महिलाएं अब एक से ज्यादा पत्नियों का विरोध कर रही हैं। मुस्लिम समाज धीरे-धीरे अशिक्षा के ग्रहण से बाहर आ रहा है।

जाति-धर्म के नाम पर बंटने वाला अल्पसंख्यक समाज अब पहले से जागरूक हुआ है। सही, गलत का फर्क उन्हें समझ आने लगा है। महाराज के बयान से हम असहमत हो सकते हैं, पर इसे किसी तरह से भड़काऊ या मजहब के नाम पर परोक्ष-प्रत्यक्ष वोट की अपील का बयान नहीं कह सकते। दरअसल, उनका बयान ऐसे वक्त आया है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव दस्तक चुके हैं। चुनाव आयोग ने हाल ही में चुनावी तारीखों का ऐलान किया है और राज्य में इस समय आचार संहिता भी लागू हो चुकी है। हालांकि भाजपा ने साक्षी महाराज के बयान से असहमति जताते हुए उनका निजी बयान करार दिया है।

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